नागदा में गायत्री रचनात्मक परिवार द्वारा आयोजित नौ दिवसीय प्रखर गायत्री साधना शिविर का यज्ञ एवं मंत्रोच्चार के साथ समापन हुआ। शिविर में योग, प्राणायाम, स्वाध्याय और कुटुंब प्रबोधन सहित विभिन्न गतिविधियां हुईं।
नागदा में नौ दिवसीय प्रखर गायत्री साधना शिविर का समापन, यज्ञ में मंत्रोच्चार के साथ दी आहुतियां
साधना, आराधना, योग-प्राणायाम, स्वाध्याय और कुटुंब प्रबोधन की गतिविधियां रहीं आकर्षण का केंद्र
नागदा। गायत्री रचनात्मक परिवार, नागदा के तत्वावधान में गायत्री तीर्थ शांतिकुंज की नियमावली के अनुसार आयोजित नौ दिवसीय प्रखर गायत्री साधना शिविर का यज्ञ एवं मंत्रोच्चार के साथ विधिवत समापन हुआ। समापन अवसर पर गायत्री माता एवं महामृत्युंजय मंत्रों के उच्चारण के बीच यज्ञ में आहुतियां समर्पित की गईं।
नौ दिनों तक चले शिविर में साधना, आराधना, स्वाध्याय, योग-प्राणायाम, सात्विक आहार, कुटुंब प्रबोधन और भजन-संगीत सहित विभिन्न आध्यात्मिक एवं जीवनोपयोगी गतिविधियां आयोजित की गईं।
योग-प्राणायाम से हुई शिविर की शुरुआत
शिविर के प्रथम दिन योगाचार्य एवं वैद्य अग्निवेश पाण्डेय के मार्गदर्शन में साधकों को योग और प्राणायाम का अभ्यास कराया गया। इसके साथ ही सात्विक एवं संतुलित भोजन के महत्व की जानकारी देते हुए स्वस्थ जीवनशैली के लिए उचित आहार अपनाने पर जोर दिया गया।
साधना और व्यक्तित्व विकास पर मिला मार्गदर्शन
शिविर के चतुर्थ दिवस उज्जैन से पहुंचे वरिष्ठ गायत्री परिजन नरेंद्र सिकरवार एवं श्यामलाल जोशी ने साधना-आराधना की सफलता के सूत्र, स्वाध्याय और व्यक्तित्व विकास के विभिन्न पहलुओं पर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने साधना और स्वाध्याय को जीवन निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए गायत्री परिवार के विचारों से साधकों को अवगत कराया।
मंत्रों के शुद्ध उच्चारण का कराया अभ्यास
शिविर में गायत्री नित्य हवन में उपयोग होने वाले मंत्रों के शुद्ध उच्चारण और उन्हें कंठस्थ करने का भी अभ्यास कराया गया। राजेश स्वामी ने गायत्री परिजनों को मंत्रों के शुद्ध वाचन का अभ्यास कराया।
वहीं गायत्री परिजन एवं संगीत प्रशिक्षक पदमा गोथरवाल ने भजन-गीत के साथ ढपली वादन का प्रशिक्षण दिया। साधकों ने उत्साह के साथ इन गतिविधियों में सहभागिता की।
कुटुंब प्रबोधन में संस्कार और संवाद पर जोर
पंचम दिवस आयोजित कुटुंब प्रबोधन गतिविधि में दीपक परमार, भंवर सिंह राठौर एवं बलभीम पोखले ने मार्गदर्शन दिया। वक्ताओं ने परिवार में संस्कार, आपसी संवाद, सद्भाव और सकारात्मक वातावरण के महत्व पर अपने विचार रखे।
उन्होंने कहा कि संस्कारित एवं सुदृढ़ परिवार स्वस्थ और सकारात्मक समाज की आधारशिला है। परिवार में संवाद और संस्कारों को मजबूत बनाकर सामाजिक जीवन को भी बेहतर बनाया जा सकता है।
यज्ञ के साथ हुआ नौ दिवसीय शिविर का समापन
नौ दिनों तक साधना और आराधना के साथ स्वास्थ्य, संस्कार, स्वाध्याय एवं पारिवारिक जीवन से जुड़े विभिन्न विषयों पर गतिविधियां आयोजित की गईं। अंतिम दिन यज्ञ में गायत्री माता एवं महामृत्युंजय मंत्रों के साथ आहुतियां समर्पित कर शिविर का विधिवत समापन किया गया। शिविर में गायत्री परिवार के परिजनों एवं साधकों ने सहभागिता की।


