CM Yogi Adityanath बोले- भारत की बुद्धि और सनातन परंपरा को कमजोर करना था विदेशी आक्रांताओं का उद्देश्य
गोरखपुर: CM Yogi Adityanath ने गोरखपुर स्थित श्री गोरखनाथ मंदिर में आयोजित सप्तदिवसीय पुण्यतिथि समारोह के अंतर्गत व्याख्यान-सत्र के शुभारंभ समारोह को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने रामायण काल, भारतीय ज्ञान परंपरा, विदेशी आक्रांताओं और सनातन संस्कृति के संरक्षण जैसे विषयों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान केवल उसकी भौगोलिक सीमाओं से नहीं, बल्कि उसकी समृद्ध ज्ञान, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा से रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा को कमजोर करने के प्रयास इतिहास के अलग-अलग कालखंडों में होते रहे हैं। उन्होंने रामायण काल का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय भी ऋषियों और मुनियों के आश्रमों पर राक्षसों द्वारा अत्याचार किए जाने की बात सामने आती है। वहीं, मध्यकालीन इतिहास का उल्लेख करते हुए उन्होंने सोमनाथ मंदिर और महमूद गजनवी के प्रसंग के माध्यम से अपनी बात रखी।
रामायण काल का उल्लेख करते हुए कही यह बात
सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में रामायण काल का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भगवान राम जब दंडकारण्य पहुंचे थे, तब उन्होंने वहां ऋषियों के आश्रमों की स्थिति देखी। ऋषियों ने भगवान राम को बताया कि राक्षस उन्हें परेशान करते हैं और उनके धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यों में बाधा डालते हैं।
मुख्यमंत्री के अनुसार, इसके बाद भगवान राम ने अत्याचार के खिलाफ संघर्ष किया और राक्षसों का अंत किया। उन्होंने इस प्रसंग को भारतीय परंपरा में धर्म, ज्ञान और साधना की रक्षा से जोड़ते हुए कहा कि समाज में ज्ञान और सत्य की परंपरा को सुरक्षित रखना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि भारत में ऋषियों और मुनियों ने हजारों वर्षों तक ज्ञान की साधना की। शिक्षा, दर्शन, विज्ञान, आध्यात्मिक चिंतन और संस्कृति से जुड़े अनेक विचार इसी भूमि से विकसित हुए। यही कारण है कि भारत को लंबे समय तक विश्व के ज्ञान केंद्र के रूप में देखा गया।
भारत की पहचान ज्ञान परंपरा से रही है
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति उसकी ज्ञान परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि भारत की सभ्यता ने दुनिया को जीवन, प्रकृति, अध्यात्म और मानव कल्याण से जुड़े अनेक विचार दिए हैं।
योगी आदित्यनाथ ने लोगों से इस विरासत को समझने और अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की अपील की। उन्होंने कहा कि केवल इतिहास को याद करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उससे जुड़े मूल्यों को वर्तमान जीवन में भी समझने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा में ज्ञान को समाज के कल्याण से जोड़ा गया है। ऋषि-मुनियों की साधना का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि समाज और मानवता के लिए मार्गदर्शन देना भी रहा है।
मुख्यमंत्री ने इस दौरान यह भी कहा कि समाज को अपनी सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत के प्रति जागरूक रहना चाहिए। उन्होंने लोगों से इतिहास और परंपरा से संबंधित विषयों को समझने के लिए प्रमाण और तथ्यों पर ध्यान देने की अपील की।
सोमनाथ मंदिर और महमूद गजनवी का प्रसंग
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमनाथ मंदिर का उदाहरण भी दिया। उन्होंने महमूद गजनवी के सोमनाथ मंदिर पर हमले से जुड़े प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि विदेशी आक्रांताओं के उद्देश्यों को केवल धन-संपत्ति की लूट के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
सीएम योगी ने कहा कि सोमनाथ मंदिर के पुजारियों और महमूद गजनवी से जुड़े एक प्रसंग में यह बताया जाता है कि गजनवी का उद्देश्य केवल मंदिर की संपत्ति को लेकर जाना नहीं था, बल्कि वह भारत की सनातन परंपरा को भी नुकसान पहुंचाना चाहता था।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि गजनवी ने सोमनाथ मंदिर को लूटा और वहां की मूर्तियों को नष्ट किया। मुख्यमंत्री ने इस प्रसंग के माध्यम से कहा कि भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक संस्थाओं पर हुए हमलों को उसकी व्यापक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में समझने की आवश्यकता है।
केवल लूटपाट तक सीमित नहीं था उद्देश्य: योगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत पर हुए विभिन्न विदेशी आक्रमणों को केवल आर्थिक दृष्टि से देखना पर्याप्त नहीं है। उनके अनुसार, भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक संरचना को प्रभावित करने के प्रयास भी इतिहास में दिखाई देते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत की सनातन परंपरा हजारों वर्षों से चली आ रही है और अनेक परिस्थितियों के बावजूद यह परंपरा निरंतर आगे बढ़ती रही। योगी ने कहा कि समाज की जिम्मेदारी है कि वह अपनी सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं के बारे में सही जानकारी प्राप्त करे तथा उसे सुरक्षित रखने के लिए काम करे।
उन्होंने लोगों से इतिहास के विभिन्न प्रसंगों को समझते समय तथ्यों की जांच करने की भी अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी विषय पर बिना प्रमाण के निष्कर्ष निकालने या उसे आगे बढ़ाने से बचना चाहिए।
सत्य को प्रमाणित करके बोलने की अपील
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में सत्य और प्रमाण के महत्व पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सूचनाओं का तेजी से प्रसार हो रहा है। ऐसे में किसी भी जानकारी को सही मानने से पहले उसकी प्रमाणिकता की जांच करना जरूरी है।
उन्होंने लोगों को दुष्प्रचार और भ्रम फैलाने वाली सूचनाओं के प्रति सतर्क रहने का संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज को ऐसी किसी भी बात को बिना जांचे स्वीकार नहीं करना चाहिए, जिससे भ्रम या संशय पैदा हो।
योगी ने कहा कि किसी भी विषय पर बात करते समय उसके तथ्य और प्रमाण सामने रखना जरूरी है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे अफवाहों और अपुष्ट दावों के बजाय प्रमाणित जानकारी को महत्व दें।
ज्ञान परंपरा को लेकर युवाओं की भूमिका
मुख्यमंत्री ने भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण में युवाओं की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को अपने इतिहास, संस्कृति और परंपराओं के बारे में जानकारी होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ युवाओं को भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा से भी परिचित कराया जाना आवश्यक है। इससे वे अपनी सांस्कृतिक विरासत को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे।
योगी ने कहा कि भारत की परंपरा केवल अतीत की स्मृति नहीं है, बल्कि इसमें वर्तमान और भविष्य के लिए भी अनेक महत्वपूर्ण विचार मौजूद हैं। इसलिए युवा पीढ़ी को इतिहास को तथ्यों के साथ समझना चाहिए और उससे सकारात्मक सीख लेने का प्रयास करना चाहिए।
सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि मंदिर, तीर्थ, आश्रम और धार्मिक संस्थाएं भारत की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनके साथ केवल धार्मिक भावनाएं ही नहीं, बल्कि भारत के इतिहास और सामाजिक जीवन की स्मृतियां भी जुड़ी हैं।
उन्होंने कहा कि अपनी विरासत के संरक्षण के लिए समाज की भागीदारी आवश्यक है। इसके लिए नई पीढ़ी को भारतीय परंपराओं के बारे में सही जानकारी देना और उन्हें उनके ऐतिहासिक संदर्भ से परिचित कराना महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की संस्कृति ने लंबे समय तक विभिन्न चुनौतियों का सामना किया है। इसके बावजूद इसकी मूल परंपराएं आज भी समाज के विभिन्न हिस्सों में दिखाई देती हैं।
दुष्प्रचार से सतर्क रहने का संदेश
अपने संबोधन के अंत में योगी आदित्यनाथ ने लोगों से दुष्प्रचार से सावधान रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी भी विषय पर राय बनाने से पहले तथ्यों की जांच करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से तेजी से फैलने वाली सूचनाओं के दौर में विशेष सावधानी की आवश्यकता है। किसी भी संदेश या दावे को आगे बढ़ाने से पहले उसके स्रोत और प्रमाण की जांच करना जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में सत्य, ज्ञान और प्रमाण आधारित संवाद को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपनी सांस्कृतिक जड़ों और ज्ञान परंपरा के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया।
इतिहास और वर्तमान के बीच संबंध
सीएम योगी के संबोधन में रामायण काल से लेकर मध्यकालीन इतिहास और वर्तमान समय में सूचना के प्रसार तक कई विषय शामिल रहे। उन्होंने अलग-अलग ऐतिहासिक प्रसंगों के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया कि समाज को अपनी परंपराओं और इतिहास के प्रति जागरूक रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इतिहास से जुड़े विषयों पर भावनाओं के साथ-साथ तथ्यों को भी महत्व देना चाहिए। प्रमाणित जानकारी के आधार पर ही किसी विषय पर चर्चा करने से समाज में सही समझ विकसित हो सकती है।
गोरखनाथ मंदिर में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने भारतीय संस्कृति, ज्ञान परंपरा और सनातन मूल्यों के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने लोगों से सत्य को प्रमाणित करके बोलने, अपुष्ट सूचनाओं से बचने और दुष्प्रचार के प्रति सतर्क रहने का संदेश दिया।
