LNIPE में 15 दिन बाद छात्रों का आंदोलन समाप्त, प्रभारी रजिस्ट्रार का इस्तीफा स्वीकार
श्रुति उपाध्याय की मौत के बाद शुरू हुआ था प्रदर्शन; जांच और अन्य मांगों पर लिखित दस्तावेज मिलने के बाद छात्रों ने भूख हड़ताल खत्म की
ग्वालियर। लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान (LNIPE) में लगभग 15 दिन से चल रहा छात्र आंदोलन बुधवार देर रात समाप्त हो गया। संस्थान के गुवाहाटी परिसर में बीपीएड तृतीय वर्ष की छात्रा श्रुति उपाध्याय की मौत के बाद शुरू हुए प्रदर्शन में ग्वालियर और गुवाहाटी परिसर के छात्र शामिल थे। छात्रों ने बताया कि स्वतंत्र जांच समिति के गठन सहित अपनी मांगों पर लिखित दस्तावेज मिलने के बाद रात करीब 12:15 बजे धरना और भूख हड़ताल समाप्त करने का निर्णय लिया गया। आंदोलन के बीच प्रभारी रजिस्ट्रार का इस्तीफा स्वीकार किए जाने और हॉस्टल प्रबंधन से जुड़े पदाधिकारियों को हटाए जाने की खबर भी सामने आई है।
9 सितंबर से प्रदर्शन कर रहे थे छात्र
श्रुति उपाध्याय की मौत के बाद 9 सितंबर को छात्रों ने संस्थान में विरोध शुरू किया था। उनकी मांग थी कि मौत से जुड़ी परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच हो और यह स्पष्ट किया जाए कि छात्रा की तबीयत बिगड़ने पर उसे किस समय, किस स्तर पर चिकित्सा सहायता मिली। छात्रों ने परिसर की स्वास्थ्य सुविधाओं और हॉस्टल व्यवस्था पर भी सवाल उठाए।
प्रदर्शन धीरे-धीरे लंबा चला और कुछ छात्र भूख हड़ताल पर बैठ गए। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, दोनों परिसरों को मिलाकर दो हजार से अधिक छात्र-छात्राएं विरोध से जुड़े। छात्रों का कहना था कि वे अपनी मांगों पर केवल मौखिक आश्वासन के आधार पर आंदोलन खत्म नहीं करेंगे; उन्हें निर्णयों और आगे की कार्रवाई का लिखित रिकॉर्ड चाहिए था।
देर रात बातचीत के बाद बनी सहमति
लंबे गतिरोध के बाद बुधवार देर रात छात्रों और संस्थान प्रशासन के बीच सहमति बनी। स्वतंत्र जांच समिति समेत अन्य मुद्दों पर लिखित दस्तावेज मिलने के बाद छात्रों ने धरना समाप्त किया। केंद्रीय खेल मंत्रालय की टीम के हस्तक्षेप को भी बातचीत आगे बढ़ने की एक वजह बताया गया है। भूख हड़ताल समाप्त होने से परिसर में कई दिनों से जारी तनाव कम हुआ, हालांकि अब छात्रों की नजर लिखित आश्वासनों के क्रियान्वयन पर रहेगी।
प्रशासनिक पदों पर कार्रवाई
आंदोलन के दौरान प्रभारी रजिस्ट्रार को पद से हटाने की मांग प्रमुखता से उठी थी। प्राप्त जानकारी के अनुसार, उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है। हॉस्टल प्रबंधन से जुड़े पदाधिकारियों को भी हटाए जाने की खबर है। विभिन्न रिपोर्टों में इन पदों के लिए ‘हॉस्टल मैनेजर’ और ‘वार्डन’ शब्द इस्तेमाल हुए हैं; संबंधित प्रशासनिक आदेश से पदनाम और कार्रवाई का पूरा विवरण स्पष्ट होगा।
इन कदमों को छात्रों की मांगों पर तत्काल प्रशासनिक प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि किसी पदाधिकारी को हटाए जाने से श्रुति की मौत के मामले में व्यक्तिगत जिम्मेदारी स्वतः सिद्ध नहीं होती। इसके लिए जांच के निष्कर्ष और उपलब्ध साक्ष्य महत्वपूर्ण होंगे।
परिवार के लिए मुआवजे का प्रस्ताव
छात्रों ने श्रुति के परिवार के लिए 50 लाख रुपये मुआवजे की मांग भी उठाई थी। एक प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, संस्थान प्रबंधन ने इस राशि का प्रस्ताव तैयार कर स्वीकृति के लिए केंद्रीय खेल मंत्रालय को भेजा है। प्रस्ताव भेजे जाने का अर्थ यह नहीं है कि राशि स्वीकृत या परिवार को भुगतान की जा चुकी है। इस संबंध में अंतिम फैसला और भुगतान की स्थिति आगे की आधिकारिक कार्रवाई से स्पष्ट होगी।
जांच से किन सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है?
छात्रों ने श्रुति की तबीयत बिगड़ने के दौरान मिली चिकित्सा सहायता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि समय पर उचित जांच और उपचार की व्यवस्था नहीं हुई। ये आरोप जांच का विषय हैं। स्वतंत्र समिति के गठन की मांग के पीछे छात्रों का उद्देश्य घटनाक्रम की समयरेखा, उपचार से जुड़े रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष समीक्षा कराना था।
जांच में यह भी देखा जाना होगा कि आपात स्थिति में हॉस्टल से चिकित्सा सहायता तक पहुंचने की संस्थान की व्यवस्था क्या थी और उसका पालन कैसे हुआ। निष्कर्ष आने से पहले श्रुति की मौत का कारण या किसी व्यक्ति की लापरवाही तय बताना उचित नहीं होगा।
आंदोलन खत्म, अब फैसलों के अमल पर नजर
धरना समाप्त होने के साथ छात्रों और प्रशासन के बीच बातचीत का यह चरण पूरा हुआ है, लेकिन मामले में कई कदम अभी बाकी हैं। जांच समिति का काम, उसकी रिपोर्ट, प्रशासनिक आदेशों का स्पष्ट विवरण और मुआवजे के प्रस्ताव पर निर्णय आगे की प्रमुख प्रक्रियाएं होंगी।
श्रुति उपाध्याय की मौत से उठे सवाल केवल एक घटना तक सीमित नहीं हैं। छात्रों ने यह भी पूछा है कि परिसर में रहने वाले किसी विद्यार्थी की तबीयत अचानक बिगड़ने पर तत्काल मदद कैसे सुनिश्चित की जाएगी। लिखित सहमति के बाद आंदोलन समाप्त हुआ है; अब उसके अनुसार होने वाली कार्रवाई से ही पता चलेगा कि छात्रों की चिंताओं का कितना समाधान हुआ है।
