MP Teacher Service Case: 70 हजार शिक्षकों के पक्ष में हाईकोर्ट जबलपुर का बड़ा फैसला, प्रथम नियुक्ति से सेवा गणना के आदेश का पालन करने के निर्देश
जबलपुर/भोपाल। MP के करीब 70 हजार शिक्षकों के पक्ष में हाईकोर्ट जबलपुर ने बड़ा फैसला दिया है। अदालत ने प्रथम नियुक्ति की तारीख से सेवा की गणना करने के मामले में दिए गए आदेश का पालन करने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले से प्रदेश के शिक्षकों में उम्मीद की नई किरण जगी है। शिक्षकों को अब नौकरी की अवधि के आधार पर सीनियरिटी, वेतन वृद्धि, पेंशन और अन्य सेवा लाभ मिलने का रास्ता खुल सकता है।
क्या है पूरा मामला
यह मामला शिक्षकों की सेवा अवधि की गणना से जुड़ा है। शिक्षकों की मांग है कि उनकी सेवा की गिनती उनकी पहली नियुक्ति की तारीख से की जाए, न कि बाद की किसी तारीख से। इसी मुद्दे पर हाईकोर्ट जबलपुर ने शिक्षकों के पक्ष में आदेश दिया था। अब अदालत ने उस आदेश का पालन करने के निर्देश दिए हैं। सेवा की गणना का सीधा असर शिक्षकों की वरिष्ठता, वेतन और सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले लाभों पर पड़ता है, इसलिए यह मामला प्रदेश के बड़े शिक्षक वर्ग के लिए बेहद अहम माना जाता है।
शिक्षकों को क्या फायदे मिल सकेंगे
प्रथम नियुक्ति से सेवा की गणना होने पर शिक्षकों को कई स्तरों पर लाभ मिल सकता है:
- वरिष्ठता (सीनियरिटी): सेवा अवधि अधिक गिनी जाने से शिक्षकों की वरिष्ठता में सुधार होगा, जिसका असर पदोन्नति की प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है।
- वेतन वृद्धि: नौकरी की अवधि के आधार पर वेतन में बढ़ोतरी का लाभ मिल सकेगा।
- पेंशन: कुल सेवा अवधि बढ़ने से सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।
- अन्य सेवा लाभ: सेवा से जुड़े दूसरे फायदे भी शिक्षकों को मिल सकेंगे।
सुप्रीम कोर्ट में खारिज हो चुकी है राज्य सरकार की SLP
इसी मामले में राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका (SLP) को सुप्रीम कोर्ट 24 अगस्त को खारिज कर चुका है। SLP वह याचिका होती है, जिसके जरिए किसी पक्ष को हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की अनुमति मांगनी होती है। सर्वोच्च न्यायालय से राहत न मिलने के बाद हाईकोर्ट का आदेश प्रभावी माना जा रहा है। शिक्षकों का कहना है कि अब आदेश के पालन में किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि मामला देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंचकर शिक्षकों के पक्ष में स्थापित हो चुका है।
अवमानना याचिका पर हाईकोर्ट ने दिया समय
सुप्रीम कोर्ट से SLP खारिज होने के बाद भी जब आदेश का पालन नहीं हुआ, तो अवमानना याचिका दायर की गई। अवमानना याचिका तब दायर की जाती है, जब किसी अदालती आदेश का पालन न किए जाने की शिकायत हो। इस याचिका पर हाईकोर्ट ने संबंधित पक्ष को आदेश के पालन के लिए समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई अक्टूबर के चौथे सप्ताह में होगी। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि तय समय में आदेश का पालन होता है या नहीं।
2006 से मिलना था छठे वेतनमान का लाभ
शिक्षकों का कहना है कि छठा वेतनमान 1 जनवरी 2006 से लागू हुआ था, लेकिन उन्हें इसका लाभ 2016 से दिया जा रहा है। उनका तर्क है कि प्रथम नियुक्ति से सेवा जोड़ने पर उन्हें 2006 से ही छठे वेतनमान का लाभ मिलना चाहिए। शिक्षकों के अनुसार इस अंतर के कारण उन्हें लंबे समय तक आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। यदि हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार सेवा की गणना होती है, तो इस मांग को भी मजबूती मिल सकती है। हालांकि इसका अंतिम निर्णय आदेश के पालन और उसके स्वरूप पर निर्भर करेगा।
शिक्षकों में उम्मीद, अगली सुनवाई पर नजर
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद शिक्षकों में उत्साह का माहौल है। लंबे समय से अपने हक के लिए संघर्ष कर रहे शिक्षकों को उम्मीद है कि अब उन्हें न्याय मिलेगा और सेवा की गणना का लाभ दिया जाएगा। अक्टूबर के चौथे सप्ताह में होने वाली अगली सुनवाई इस मामले में अहम मानी जा रही है, क्योंकि उसी दिन तय होगा कि आदेश के पालन की दिशा में कितनी प्रगति हुई है।
