बालाघाट में गर्भवती महिला का गर्भपात, परिजनों ने किरनापुर पुलिस पर लगाए मारपीट के आरोप
चोरी के मामले में पूछताछ के बाद बिगड़ी थी सावित्री चौधरी की तबीयत; परिजन और समाजजन निष्पक्ष जांच तथा जिम्मेदारों पर कार्रवाई की कर रहे मांग
बालाघाट। किरनापुर थाना क्षेत्र की महिला सावित्री चौधरी का गर्भपात होने के बाद पुलिस पर लगे मारपीट के आरोप एक बार फिर चर्चा में हैं। परिजनों का आरोप है कि चोरी के एक मामले में पूछताछ के दौरान थाने में सावित्री और उनके पति कैलाश चौधरी के साथ मारपीट की गई थी। बाद में महिला को पेट में तकलीफ और रक्तस्राव होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। परिजन पुलिस कार्रवाई और गर्भपात के बीच संबंध की जांच कराने की मांग कर रहे हैं। इस संबंध में चिकित्सकीय जांच और मामले की जांच का निष्कर्ष सामने आना बाकी है।
पोस्ट ऑफिस में चोरी के बाद दंपती से हुई थी पूछताछ
किरनापुर थाना क्षेत्र के ग्राम टिमकीटोला निवासी कैलाश चौधरी के अनुसार, दो सितंबर को क्षेत्र के पोस्ट ऑफिस में चोरी हुई थी। उनका कहना है कि किसी अन्य व्यक्ति द्वारा लगाए गए आरोप के आधार पर पुलिस उन्हें और उनकी पत्नी सावित्री को पूछताछ के लिए थाने ले गई। कैलाश ने चोरी के आरोप को गलत बताया है।
परिवार का आरोप है कि थाने में दंपती को अलग-अलग कमरों में रखा गया और उनके साथ मारपीट की गई। कैलाश का यह भी दावा है कि सावित्री उस समय गर्भवती थीं। पुलिसकर्मियों पर लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र जांच आवश्यक है; आरोपों को अभी जांच से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता। सात सितंबर को मामला सामने आने के बाद बालाघाट के पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा ने संबंधित चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर जांच महिला एसआईटी को सौंपने की जानकारी दी थी।
खाट पर लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे थे परिजन
परिजनों ने पहले भी प्रशासन के सामने महिला की हालत को लेकर चिंता जताई थी। सात सितंबर को वे सावित्री को खाट पर लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे थे और पुलिसकर्मियों के खिलाफ शिकायत की थी। उस समय प्रशासन ने महिला को उपचार के लिए जिला अस्पताल भिजवाया था। परिवार ने निष्पक्ष जांच, उचित कार्रवाई और सहायता की मांग की थी।
अब गर्भपात की सूचना के बाद परिवार का कहना है कि मामले की जांच में महिला के उपचार से जुड़े सभी दस्तावेज और घटनाक्रम शामिल किए जाएं। उनके मुताबिक, सवाल केवल थाने में कथित मारपीट का नहीं, बल्कि पूछताछ के बाद महिला की स्वास्थ्य स्थिति में आए बदलाव का भी है।
22 सितंबर को अस्पताल में भर्ती कराया गया
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 22 सितंबर की शाम सावित्री को पेट में तकलीफ और रक्तस्राव होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में जांच के दौरान गर्भस्थ शिशु की धड़कन नहीं मिलने की बात सामने आई। इसके बाद महिला का गर्भपात कराया गया। परिवार के लिए यह घटना गहरे दुख का कारण बनी है।
हालांकि, गर्भपात का चिकित्सकीय कारण क्या था और कथित मारपीट से उसका कोई संबंध है या नहीं, यह उपलब्ध जानकारी से तय नहीं किया जा सकता। इसके लिए उपचार के रिकॉर्ड, चिकित्सकों की राय और जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों को देखना होगा। परिजन चाहते हैं कि इन पहलुओं की निष्पक्ष पड़ताल हो और उन्हें जांच के नतीजों की स्पष्ट जानकारी दी जाए।
कार्रवाई की मांग तेज
घटना के बाद समाज के कुछ लोगों ने संबंधित पुलिसकर्मियों के विरुद्ध गंभीर धाराओं में मामला दर्ज करने की मांग की है। परिवार भी चाहता है कि उसकी शिकायत को गंभीरता से लिया जाए। दूसरी ओर, पहले घोषित निलंबन और महिला एसआईटी को जांच सौंपे जाने के बाद जांच की वर्तमान स्थिति तथा उसके निष्कर्ष की जानकारी सामने आना महत्वपूर्ण है।
यह मामला कई सवाल छोड़ता है—पूछताछ के दौरान दंपती के साथ क्या हुआ, महिला को कब-कब उपचार मिला और गर्भपात के कारण के बारे में चिकित्सकीय जांच क्या बताती है। इन सवालों का उत्तर जांच से ही मिलेगा। तब तक पुलिसकर्मियों पर लगे आरोप और गर्भपात से उनके कथित संबंध को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
