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‘छोड़ो और दौड़ो, जितना हल्का हो जाओगे उतना ऊपर उठोगे’—मुनिश्री सुधासागर जी

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Published On: 24 September 2026

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‘छोड़ो और दौड़ो, जितना हल्का हो जाओगे उतना ऊपर उठोगे’—मुनिश्री सुधासागर जी

संवाददाता: राजेश जैन दद्दू

इंदौर। श्रावक संस्कार शिविर एवं पर्युषण महापर्व के नौवें दिन आज उत्तम आकिंचन्य धर्म पर विद्यासुधा देशना मंडप दलाल बाग में धर्मसभा को संबोधित करते हुए तीर्थ चक्रवर्ती मुनिश्री 108 सुधासागर जी महाराज ने आज की मंगल देशना में कहा कि जीवन में ऊपर उठने के लिए व्यक्ति को अपने भीतर का भार कम करना होगा। उन्होंने कहा — “छोड़ो और दौड़ो। जो जितना छोड़ देगा, उतना आगे बढ़ेगा और जो जितना जोड़ता जाएगा, उतना ही रुकता जाएगा।”
मुनिश्री ने तराजू का उदाहरण देते हुए कहा कि भारी पलड़ा नीचे जाता है और हल्का पलड़ा ऊपर उठता है। इसी प्रकार जीवन के दस धर्म व्यक्ति के भीतर के भार को क्रमशः कम करते हैं। जैसे-जैसे मोह, लोभ, आसक्ति और परिग्रह का भार कम होता है, आत्मा ऊंचाई की ओर बढ़ती है।

“पाप का कर्ज हो तो पुण्य ब्याज चुकाने में चला जाता है”
मुनिश्री ने कहा कि कई लोग पूछते हैं कि हम पूजा-पाठ, भक्ति और धर्म करते हैं, फिर भी जीवन में परिवर्तन क्यों नहीं आता। उन्होंने व्यापारी का उदाहरण देते हुए समझाया कि जिस प्रकार पुराने कर्ज का ब्याज वर्तमान की पूरी कमाई को खा जाता है, उसी प्रकार पूर्व में किए गए पापों का भारी कर्म-कर्ज वर्तमान में किए जा रहे पुण्य के फल को भी पहले अपने ब्याज में ले सकता है। ऐसी स्थिति में धर्म से निराश नहीं होना चाहिए।
मूर्ति बनाई नहीं जाती, प्रकट की जाती है

उत्तम आकिंचन्य धर्म की व्याख्या करते हुए मुनिश्री ने पाषाण की मूर्ति का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि मूर्तिकार पत्थर के अंदर मूर्ति को बनाता नहीं है, बल्कि मूर्ति के स्वरूप में बाधक पत्थर को धीरे-धीरे हटाता जाता है। अंततः मूर्ति स्वयं प्रकट हो जाती है। “आत्मा को कुछ नया बनाना नहीं है। जो आत्मस्वरूप के प्रकट होने में बाधक है, उसे हटाते जाना है।” मोह, आसक्ति, परिग्रह, क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे विकारों को हटाते जाने पर आत्मा का शुद्ध स्वरूप प्रकट होता है। यही आकिंचन्य धर्म की साधना है।
शरीर साधना का माध्यम है, आत्मा नहीं — मुनिश्री ने कहा “मैं शरीर नहीं हूं, मैं शरीर से भिन्न चेतन आत्मा हूं” — इस भाव को दृढ़ करना ही साधना की दिशा है।
*अंत में मुनिश्री ने धर्मसभा को सूत्र दिया — “जो जितना छोड़ेगा, उतना दौड़ेगा। जितना हल्का होगा, उतना ऊपर उठेगा। छोड़ो और दौड़ो।” धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि
आज की धर्मसभा में पाद पक्षालन महामंत्री हर्ष जैन ने किया। प्रवचन में प्रमुख रूप से चक्रवर्ती अध्यक्ष नवीन , आनंद जी गोधा, चक्रवर्ती मनीष जी गोधा, अशोक डोशी, हर्ष जैन, आलोक आकाश कोल प्रिंसपाल टोंग्या, हुकुमचंद जैन काका, संजयजी पाटोदी, अक्षय कासलीवाल, धर्मेंद्र सिनकेम गिरीश ‘गिन्नी’, प्रदीप ,पारस जी ब्रह्मचारी, विजय धुर्रा आदि धर्मप्रेमी समाजजन उपस्थित रहे।

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