शी जिनपिंग के अमेरिका पहुंचने पर व्यापारिक युद्धविराम बढ़ाने की घोषणा, अब 10 जनवरी तक जारी रहेगा समझौता
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के अनुसार, दोनों देशों को आर्थिक मुद्दों पर बातचीत के लिए दो महीने का अतिरिक्त समय मिलेगा
वॉशिंगटन। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा के बीच अमेरिका और चीन ने अपने मौजूदा व्यापारिक युद्धविराम को 10 जनवरी 2027 तक बढ़ाने पर सहमति जताई है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने 23 सितंबर को फॉक्स न्यूज के एक कार्यक्रम में यह जानकारी दी। उनके अनुसार, ‘बुसान समझौता’ पहले 10 नवंबर को समाप्त होना था। नई समयसीमा से दोनों देशों को आर्थिक मुद्दों पर बातचीत जारी रखने के लिए लगभग दो महीने और मिलेंगे।
शी जिनपिंग 23 सितंबर को अमेरिका पहुंचे। व्हाइट हाउस ने यात्रा से पहले बताया था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उसी दिन जॉइंट बेस एंड्रयूज पर शी का स्वागत करेंगे, जबकि 24 सितंबर को व्हाइट हाउस में औपचारिक स्वागत समारोह रखा गया है। चीन के विदेश मंत्रालय ने भी 23 से 25 सितंबर तक उनकी राजकीय यात्रा की पुष्टि की है।
किस बात पर बनी सहमति?
बेसेंट की घोषणा का मुख्य बिंदु मौजूदा व्यापारिक युद्धविराम की अवधि बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और चीन ‘बुसान समझौते’ को 10 नवंबर की तय समाप्ति तिथि से आगे 10 जनवरी तक जारी रखने पर सहमत हुए हैं। इससे दोनों पक्षों को आर्थिक मोर्चे पर आगे क्या किया जा सकता है, इस पर चर्चा के लिए और समय मिलेगा। युद्धविराम बढ़ने को नए व्यापक व्यापार समझौते के बराबर नहीं समझना चाहिए। उपलब्ध घोषणा में सभी शुल्क हटाने या दोनों देशों के बीच लंबित व्यापारिक विवाद समाप्त होने की बात नहीं कही गई है। फिलहाल घोषित निर्णय मौजूदा व्यवस्था को दो महीने और जारी रखने का है। आगे शुल्क और अन्य व्यापारिक शर्तों पर क्या निर्णय होगा, यह बातचीत के परिणाम पर निर्भर करेगा।
शी जिनपिंग की यात्रा के बीच आई घोषणा
शी जिनपिंग अपनी पत्नी पेंग लियुआन के साथ अमेरिका की राजकीय यात्रा पर हैं। चीन के विदेश मंत्रालय के अनुसार, वह राष्ट्रपति ट्रंप के निमंत्रण पर अमेरिका गए हैं। व्हाइट हाउस द्वारा पहले जारी कार्यक्रम में जॉइंट बेस एंड्रयूज पर ट्रंप की ओर से स्वागत और अगले दिन व्हाइट हाउस में राजकीय स्वागत समारोह की जानकारी दी गई थी।
व्यापारिक युद्धविराम बढ़ाने की घोषणा इसी यात्रा के समय सामने आई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे ट्रंप और शी की औपचारिक वार्ता का परिणाम बताना सही नहीं होगा। बेसेंट ने अपने टेलीविजन साक्षात्कार में अमेरिका और चीन के अधिकारियों के बीच बनी सहमति की जानकारी दी है। दोनों राष्ट्रपतियों की वार्ता से आगे कौन-से ठोस फैसले निकलते हैं, यह अलग विषय है।
‘बुसान समझौता’ बढ़ाने का क्या मतलब है?
दोनों देशों के बीच चल रही व्यापारिक व्यवस्था को अमेरिकी पक्ष ‘बुसान समझौता’ कह रहा है। इसकी मौजूदा अवधि 10 नवंबर को समाप्त होने वाली थी। यदि इसे आगे नहीं बढ़ाया जाता, तो उस तारीख के बाद व्यापार संबंधी तनाव और शुल्क नीति को लेकर नई अनिश्चितता पैदा हो सकती थी। अवधि बढ़ने से फिलहाल बातचीत जारी रखने का रास्ता खुला रहेगा। बेसेंट ने भी विस्तार का उद्देश्य आर्थिक मुद्दों पर और समय लेकर चर्चा करना बताया है।
यह फैसला व्यापारिक रिश्तों में संवाद जारी रहने का संकेत है, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि सभी मतभेद दूर हो गए हैं। व्यापारिक युद्धविराम एक तय अवधि के लिए बनी व्यवस्था है। स्थायी समझौते में किन विषयों पर सहमति होगी और उसकी शर्तें क्या होंगी, इसकी जानकारी अभी सामने आनी बाकी है।
आगे किस पर रहेगी नजर?
शी जिनपिंग की राजकीय यात्रा के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप के साथ होने वाली बातचीत पर अब ध्यान रहेगा। व्यापारिक युद्धविराम के विस्तार से तत्काल समयसीमा बदल गई है, लेकिन आर्थिक संबंधों का अगला चरण दोनों पक्षों की आगे की घोषणाओं से स्पष्ट होगा। विशेष रूप से यह देखना होगा कि शुल्क संबंधी मुद्दों पर कोई नया निर्णय होता है या दोनों देश फिलहाल बातचीत को ही आगे बढ़ाते हैं।
इस खबर का पुष्ट निष्कर्ष यह है कि अमेरिकी वित्त मंत्री ने व्यापारिक युद्धविराम 10 जनवरी 2027 तक बढ़ाने की सहमति की घोषणा की है। इसे चीन को एकतरफा ‘तोहफा’ या सभी व्यापारिक विवादों का समाधान बताना घोषणा से आगे का दावा होगा।
