2 अक्टूबर को ‘नो यूपीआई डे’ का आह्वान, व्यापारी संगठनों ने MDR शुल्क का किया विरोध
गांधी जयंती पर UPI भुगतान स्वीकार न करने की अपील; देशभर में UPI सेवा बंद होने की कोई घोषणा नहीं
नई दिल्ली। मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) की नई व्यवस्था के विरोध में कुछ व्यापारी संगठनों ने 2 अक्टूबर को ‘नो यूपीआई डे’ मनाने का आह्वान किया है। इस अभियान के तहत भाग लेने वाले व्यापारियों से उस दिन ग्राहकों के UPI भुगतान स्वीकार न करने को कहा गया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल (FAIVM) और कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) सहित व्यापारी संगठनों को इस आह्वान से जोड़ा गया है। हालांकि, ‘नो यूपीआई डे’ का अर्थ देशभर में UPI सेवा बंद होना नहीं है। यह व्यापारियों के विरोध का आह्वान है और किसी दुकान पर भुगतान का विकल्प उसके भाग लेने पर निर्भर करेगा।
व्यापारी क्यों कर रहे हैं विरोध?
व्यापारियों की आपत्ति चुनिंदा UPI भुगतान पर लागू होने वाले MDR शुल्क को लेकर है। MDR वह शुल्क है जो भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी के लेन-देन से संबंधित होता है। विरोध कर रहे कारोबारियों का कहना है कि कम लाभ पर सामान बेचने वाले व्यवसायों पर अतिरिक्त भुगतान लागत का असर पड़ सकता है। इसी मुद्दे पर व्यापारी संगठन 2 अक्टूबर को UPI भुगतान न लेने की अपील कर रहे हैं।
एबीपी लाइव की 24 सितंबर की रिपोर्ट में कहा गया है कि नई व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होनी है और उसके पहले व्यापारी संगठन अपना विरोध दर्ज कराना चाहते हैं। उसी रिपोर्ट में 23 सितंबर को मध्य प्रदेश के कुछ शहरों में व्यापारियों द्वारा UPI भुगतान के बहिष्कार का भी उल्लेख है। ये विरोध संबंधी विवरण उस मीडिया रिपोर्ट पर आधारित हैं; प्रत्येक संगठन और दुकान की भागीदारी को एक समान नहीं माना जा सकता।
नई MDR व्यवस्था में किन भुगतानों पर शुल्क?
वित्त मंत्रालय की 15 सितंबर की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले UPI भुगतान निःशुल्क रहेंगे, चाहे भेजी गई राशि कितनी भी हो। व्यापारियों को ₹2,000 तक के UPI भुगतान पर भी MDR नहीं लगेगा। मंत्रालय का कहना है कि छोटे व्यापारियों के लिए शून्य MDR के अंतर्गत आने वाले भुगतान पहले की तरह निःशुल्क रहेंगे और लगभग 96 प्रतिशत व्यापारी लेन-देन इस बदलाव से अप्रभावित रहेंगे।
सरकारी विवरण के अनुसार, ₹2,000 से अधिक के निर्दिष्ट व्यापारी भुगतान पर सामान्यतः 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के लेन-देन में इसकी अधिकतम सीमा ₹300 प्रति लेन-देन बताई गई है। कुछ क्षेत्रों के लिए अलग दरें निर्धारित हैं। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि MDR ग्राहक से लिया जाने वाला शुल्क नहीं है और इसे सरकारी टैक्स कहना सही नहीं होगा।
2 अक्टूबर को ग्राहकों पर क्या असर हो सकता है?
यदि कोई दुकानदार ‘नो यूपीआई डे’ में भाग लेता है, तो वह 2 अक्टूबर को UPI से भुगतान लेने से मना कर सकता है। ऐसे में ग्राहक को उस दुकान पर उपलब्ध दूसरा भुगतान तरीका पूछना होगा। किसी दुकान में नकद या कार्ड भुगतान स्वीकार किया जाएगा या नहीं, यह उसकी व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
इस आह्वान से UPI ऐप या बैंकिंग नेटवर्क के देशभर में बंद होने का निष्कर्ष नहीं निकलता। जो व्यापारी अभियान में शामिल नहीं होंगे, वे UPI भुगतान स्वीकार कर सकते हैं। इसलिए ‘2 अक्टूबर को देश में UPI नहीं चलेगा’ जैसी बात ग्राहकों को गलत संदेश दे सकती है। अधिक सटीक जानकारी यह है कि कुछ व्यापारी संगठनों ने उस दिन UPI भुगतान स्वीकार न करने का आह्वान किया है।
आगे क्या रहेगा महत्वपूर्ण?
व्यापारी संगठनों का विरोध MDR से जुड़े कारोबारी खर्च पर केंद्रित है, जबकि सरकार का कहना है कि आम व्यक्तियों के आपसी भुगतान और अधिकतर व्यापारी भुगतान निःशुल्क बने रहेंगे। अब यह देखना होगा कि 2 अक्टूबर के आह्वान में कितने व्यापारी शामिल होते हैं और विरोध के बाद शुल्क व्यवस्था पर कोई नया निर्णय या स्पष्टीकरण आता है या नहीं।
फिलहाल ग्राहकों के लिए जरूरी बात यही है कि किसी दुकान पर भुगतान करने से पहले वहां स्वीकार किए जा रहे विकल्प की जानकारी ले लें। ‘नो यूपीआई डे’ व्यापारियों का प्रस्तावित विरोध कार्यक्रम है; इसे UPI सेवा की आधिकारिक बंदी के रूप में प्रकाशित नहीं किया जाना चाहिए।
