यूपीआई पर एमडीआर के विरोध में नागदा में ‘नो यूपीआई डे’, व्यापारियों ने काली पट्टी बांधी
दैनिक स्वराज वाणी
संवाददाता: प्रमोद कुमार जैन
दुकानों पर लगाए जागरूकता पोस्टर, किराना व्यापारियों ने काले कपड़े से ढके क्यूआर कोड
नागदा। दो हजार रुपये से अधिक के चुनिंदा यूपीआई मर्चेंट भुगतान पर लागू होने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) के विरोध में बुधवार को नागदा के व्यापारी ‘नो यूपीआई डे’ मना रहे हैं। व्यापारी महासंघ और किराना व्यापारी संघ ने अभियान चलाकर व्यापारियों से एक दिन यूपीआई भुगतान स्वीकार नहीं करने की अपील की।
विरोध अभियान की शुरुआत मंगलवार सुबह एप्रोच रोड स्थित सकलेचा सुपर बाजार से की गई। व्यापारी महासंघ के पदाधिकारियों ने काली पट्टी बांधकर जागरूकता पोस्टर का विमोचन किया। इसके बाद शहर के विभिन्न व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर पोस्टर लगाए गए। पोस्टरों के माध्यम से व्यापारियों और ग्राहकों को एमडीआर व्यवस्था की जानकारी देते हुए ‘नो यूपीआई डे’ में सहयोग करने का आह्वान किया गया।
व्यापारी महासंघ अध्यक्ष दिनेश अग्रवाल ने कहा कि नई व्यवस्था से व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ने की आशंका है। उनका कहना है कि इससे कारोबार की लागत बढ़ सकती है और इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव ग्राहकों पर भी पड़ सकता है। व्यापारियों ने एमडीआर वापस लेने की मांग करते हुए इसे छोटे एवं मध्यम कारोबारियों के लिए नुकसानदायक बताया।
अभियान के अंतर्गत कपड़ा, किराना, तेल, हार्डवेयर, मेडिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल, ऑटोमोबाइल, स्टेशनरी, बर्तन, नमकीन, मिठाई और जूते-चप्पल की दुकानों सहित रेस्टोरेंट, पेट्रोल पंप, सुपर बाजार, शैक्षणिक संस्थानों एवं अन्य प्रतिष्ठानों पर पोस्टर लगाए गए।
इस दौरान महासंघ सचिव रमेश मेहता, कोषाध्यक्ष अंकित सेठिया, अमित ओझा, रमेशचंद्र पाल, गोपाल सलूजा, बृजमोहन टांक, आशीष कोठारी, विकास सिंदल, सज्जन सिंह शेखावत, वीरेंद्र जैन, दुर्गेश नागर, सुशील सकलेचा, नवीन पोरवाल, शिवनारायण सोलंकी, दिलीप ओरा, अनिल पोरवाल, रणछोड़ राठी और बद्रीलाल पोरवाल सहित व्यापारी मौजूद रहे।
काले कपड़े से ढके यूपीआई क्यूआर कोड
किराना व्यापारी संघ ने मंगलवार देर शाम विभिन्न दुकानों पर पहुंचकर यूपीआई क्यूआर कोड पर काला कपड़ा बांधा। व्यापारियों ने ‘यूपीआई शुल्क वापस लो’ के नारे लगाते हुए अपना विरोध दर्ज कराया। संघ पदाधिकारियों ने बताया कि यह अभियान व्यापारियों की एकजुटता प्रदर्शित करने और उनकी मांग शासन तक पहुंचाने का शांतिपूर्ण एवं सांकेतिक माध्यम है।
संशोधित एमडीआर व्यवस्था 15 अक्टूबर से प्रभावी होनी है। इसके तहत ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा व्यक्ति-से-व्यापारी भुगतान पर अधिकतम 0.4 प्रतिशत एमडीआर व्यापारी द्वारा चुकाया जाएगा; सामान्य व्यक्ति-से-व्यक्ति लेन-देन इससे बाहर रहेगा। छोटे व्यापारियों सहित अधिकांश यूपीआई भुगतान प्रभावित नहीं होने की बात एनपीसीआई ने कही है।

