चिचोली में अपराधों पर अंकुश लगाने की मांग को लेकर जयस ने निकाली रैली, प्रशासन को सौंपे ज्ञापन
नसीराबाद में दो आदिवासी युवकों से कथित मारपीट की जांच की मांग; चिचोली नगर परिषद के गठन पर भी उठाए सवाल
रिपोर्ट: राकेश सिंह, दैनिक स्वराज वाणी
बैतूल। नसीराबाद में दो आदिवासी युवकों के साथ कथित मारपीट और चिचोली-भीमपुर क्षेत्र में शराब, जुआ, सट्टा तथा चोरी की घटनाओं को लेकर जयस समस्त आदिवासी संगठन ने विरोध जताया। संगठन के पदाधिकारियों और सदस्यों ने रैली निकालकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपे। उन्होंने कथित मारपीट की निष्पक्ष जांच, आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश और जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की।
संगठन ने राज्यपाल और पुलिस प्रशासन के नाम अलग-अलग ज्ञापन दिए। कानून-व्यवस्था से जुड़ी मांगों के साथ जयस ने चिचोली नगर परिषद के गठन और संचालन पर भी सवाल उठाए। संगठन का दावा है कि चिचोली में अनुसूचित क्षेत्र से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों तथा ग्राम सभाओं के अधिकारों की अनदेखी हुई है। जयस ने नगर परिषद को निरस्त कर क्षेत्र में ग्राम पंचायत व्यवस्था लागू करने की मांग की है।
नसीराबाद की घटना की जांच की मांग
जयस पदाधिकारियों ने कहा कि नसीराबाद में दो आदिवासी युवकों के साथ हुई कथित मारपीट की जांच कर तथ्य सार्वजनिक किए जाएं। संगठन ने मांग की कि मामले में दोषी पाए जाने वाले लोगों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई हो और पीड़ितों को न्याय मिले। ज्ञापन में चिचोली और भीमपुर क्षेत्र में आपराधिक गतिविधियों को लेकर भी चिंता जताई गई है।
जयस जिलाध्यक्ष सोनू धुर्वे ने कहा कि आदिवासी समाज के लोगों के साथ होने वाली घटनाओं में प्रशासन की जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि शराब, जुआ, सट्टा और चोरी से जुड़े मामलों में प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है। संगठन ने पुलिस प्रशासन से क्षेत्र की शिकायतों को गंभीरता से लेने और कानून के अनुसार कदम उठाने की मांग की।
ग्राम सभा की भूमिका पर जयस ने उठाए सवाल
सोनू धुर्वे ने पेसा कानून और पांचवीं अनुसूची का हवाला देते हुए कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं की भूमिका को महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय मामलों में ग्राम सभा की भागीदारी अपेक्षित स्तर पर नहीं हो रही है।
हालांकि, पेसा कानून का उल्लेख अपने आप में यह स्थापित नहीं करता कि पुलिस किसी गांव में ग्राम सभा की अनुमति के बिना प्रवेश नहीं कर सकती। यह संगठन के पदाधिकारी का दावा है; संबंधित घटना और उस पर लागू कानूनी प्रक्रिया की जांच अलग से आवश्यक होगी। जयस ने प्रशासन से ग्राम सभाओं के अधिकारों को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
नगर परिषद के गठन को लेकर अलग ज्ञापन
जयस के प्रदेश संयोजक जामवंत सिंह कुमरे ने चिचोली नगर परिषद का मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि अनुसूचित क्षेत्र में नगर परिषद के गठन की संवैधानिक वैधता की जांच होनी चाहिए। संगठन के ज्ञापन में संविधान के अनुच्छेद 243ZC(1) का हवाला दिया गया है, जो अनुसूचित क्षेत्रों में नगरपालिकाओं संबंधी संवैधानिक प्रावधानों से जुड़ा है।
संगठन ने आरोप लगाया कि वर्ष 2009-10 में ग्राम पंचायत चिचोली को नगर परिषद में बदलने की प्रक्रिया के दौरान ग्राम सभाओं की सहमति नहीं ली गई और आदिवासी सदस्यों पर दबाव बनाया गया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि ज्ञापन में दी गई जानकारी से नहीं होती। जयस ने राज्यपाल और संबंधित अधिकारियों से गठन प्रक्रिया के अभिलेखों की जांच कराने की मांग की है।
जल, जंगल और जमीन के अधिकारों का मुद्दा
ज्ञापन में जयस ने कहा कि नगर परिषद व्यवस्था के कारण ग्राम सभाओं की स्वायत्तता तथा आदिवासी समाज के पारंपरिक जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकार प्रभावित हुए हैं। संगठन ने स्थानीय करों के बोझ और पारंपरिक सांस्कृतिक व्यवस्था पर प्रभाव पड़ने का आरोप भी लगाया।
जयस की मांग है कि सक्षम प्राधिकारी चिचोली की कानूनी स्थिति, नगर परिषद के गठन की प्रक्रिया और अनुसूचित क्षेत्र से संबंधित प्रावधानों की जांच करे। संगठन ने नगर परिषद को निरस्त कर क्षेत्र को पुनः पंचायती राज और पेसा कानून के दायरे में लाने तथा ग्राम सभाओं के अधिकार बहाल करने की मांग की है। इस मांग पर अंतिम निर्णय संबंधित अभिलेखों और लागू कानून की समीक्षा के आधार पर ही हो सकता है।
अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय ने प्राप्त किया ज्ञापन
ज्ञापन में जयस जिलाध्यक्ष सोनू धुर्वे, जामवंत सिंह कुमरे, जिला संरक्षक शेषराव उइके, जिला प्रभारी दिलीप सलामे और कार्यकारी अध्यक्ष लोकेश करोचे सहित जिला पदाधिकारियों के नाम दर्ज हैं। संगठन के अनुसार, ज्ञापन अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय में प्राप्त किया गया।
जयस ने प्रशासन से नसीराबाद के कथित मारपीट मामले, क्षेत्र में अपराधों की शिकायतों और चिचोली नगर परिषद से जुड़े सवालों पर कार्रवाई की मांग की है। प्रशासन और पुलिस का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना चाहिए।
