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कार का इंजन ऑयल बदलने में कर रहे हैं देरी? छोटी-सी लापरवाही बढ़ा सकती है हजारों रुपये का खर्च

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Published On: 19 September 2026

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कार का इंजन ऑयल बदलने में कर रहे हैं देरी? छोटी-सी लापरवाही बढ़ा सकती है हजारों रुपये का खर्च

जानिए इंजन ऑयल कब बदलना चाहिए, खराब ऑयल के क्या संकेत हैं और देरी से कार को कितना नुकसान हो सकता है

कार की नियमित सर्विसिंग में इंजन ऑयल बदलना सबसे महत्वपूर्ण कामों में शामिल है। इसके बावजूद कई वाहन मालिक इस जरूरी प्रक्रिया को तब तक टालते रहते हैं, जब तक कार के इंजन से आवाज नहीं आने लगती या उसके प्रदर्शन में गिरावट महसूस नहीं होती। यदि कार सामान्य रूप से चल रही हो, तब भी निर्धारित समय पर इंजन ऑयल बदलना जरूरी है। इसमें की गई देरी आगे चलकर इंजन की महंगी मरम्मत का कारण बन सकती है।

इंजन ऑयल वाहन के इंजन में मौजूद पिस्टन, क्रैंकशाफ्ट, बेयरिंग और अन्य चलने वाले हिस्सों के बीच चिकनाई बनाए रखता है। इससे पुर्जों के बीच घर्षण कम होता है और वे समय से पहले खराब नहीं होते। इंजन ऑयल गर्मी नियंत्रित करने, गंदगी जमा होने से रोकने और अंदरूनी हिस्सों को जंग से बचाने में भी मदद करता है।

पुराना इंजन ऑयल क्यों बनता है नुकसानदायक?

लगातार इस्तेमाल के कारण इंजन ऑयल की चिकनाई और गर्मी सहने की क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है। इसमें धूल, धातु के बेहद बारीक कण और कार्बन जमा हो सकते हैं। ज्यादा पुराना होने पर ऑयल गाढ़ा होकर कीचड़ जैसी परत यानी स्लज बनाने लगता है।

स्लज के कारण इंजन के अंदर ऑयल का प्रवाह प्रभावित हो सकता है। इससे जरूरी पुर्जों तक पर्याप्त चिकनाई नहीं पहुंचती और उनके बीच घर्षण बढ़ जाता है। इंजन अधिक गर्म होने लगता है तथा उसके महत्वपूर्ण हिस्से तेजी से घिस सकते हैं। गंभीर स्थिति में इंजन जाम होने या पूरी तरह खराब होने का खतरा भी रहता है।

कितने किलोमीटर पर बदलें इंजन ऑयल?

इंजन ऑयल बदलने की सही अवधि कार के मॉडल, इंजन, ऑयल के प्रकार और वाहन चलाने की परिस्थितियों पर निर्भर करती है। सामान्य तौर पर मिनरल इंजन ऑयल को लगभग 5,000 से 7,500 किलोमीटर के बीच बदलने की सलाह दी जाती है। सेमी-सिंथेटिक ऑयल करीब 7,500 से 10,000 किलोमीटर और फुल-सिंथेटिक ऑयल 10,000 से 15,000 किलोमीटर तक चल सकता है।

हालांकि, यह एक सामान्य अनुमान है। वाहन निर्माता की ओर से दिए गए ओनर मैनुअल और सर्विस शेड्यूल को ही अंतिम मानना चाहिए। यदि कार बहुत कम चलती है, तब भी इंजन ऑयल को निर्धारित समय—आमतौर पर छह महीने या एक वर्ष—के अनुसार बदलना जरूरी हो सकता है।

इन परिस्थितियों में जल्दी बदलना पड़ सकता है ऑयल

यदि आपकी कार रोजाना भारी ट्रैफिक में चलती है, बार-बार थोड़ी दूरी तय करती है या धूल भरे क्षेत्रों में इस्तेमाल होती है, तो इंजन ऑयल जल्दी खराब हो सकता है। अत्यधिक गर्मी, पहाड़ी रास्ते, भारी सामान और लंबे समय तक इंजन चालू रखना भी ऑयल की आयु कम कर सकता है।

ऐसी परिस्थितियों को वाहन निर्माता ‘सीवियर ड्राइविंग कंडीशन’ मान सकते हैं। इनमें सामान्य सर्विस अंतराल का इंतजार करने के बजाय ऑयल की स्थिति नियमित रूप से जांचना बेहतर होता है।

खराब इंजन ऑयल के प्रमुख संकेत

कार से असामान्य आवाज आना, इंजन का ज्यादा गर्म होना, माइलेज कम होना और एक्सीलरेशन में सुस्ती खराब ऑयल के संकेत हो सकते हैं। डैशबोर्ड पर ऑयल प्रेशर या चेक इंजन लाइट दिखाई दे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

डिपस्टिक से जांच करते समय ऑयल का स्तर न्यूनतम निशान से नीचे मिले, उसमें जले होने की गंध आए या वह बहुत गाढ़ा और गंदा दिखाई दे तो सर्विस सेंटर से जांच कराएं। केवल ऑयल का काला होना हमेशा उसके खराब होने का प्रमाण नहीं है, क्योंकि सफाई करने वाले तत्वों के कारण उसका रंग जल्दी बदल सकता है।

ऑयल फिल्टर बदलना भी जरूरी

इंजन ऑयल बदलते समय ऑयल फिल्टर बदलवाना भी महत्वपूर्ण है। पुराना फिल्टर गंदगी से भर जाने पर नए ऑयल का प्रवाह प्रभावित कर सकता है। इससे ताजा ऑयल डालने के बावजूद इंजन को पूरा लाभ नहीं मिलता।

कार में हमेशा कंपनी द्वारा सुझाए गए ग्रेड और स्पेसिफिकेशन का इंजन ऑयल ही इस्तेमाल करें। गलत चिपचिपाहट वाला ऑयल इंजन की कार्यक्षमता और माइलेज को प्रभावित कर सकता है। समय पर ऑयल और फिल्टर बदलवाने का छोटा खर्च भविष्य में इंजन की मरम्मत पर आने वाले हजारों या लाखों रुपये बचा सकता है।

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