इंदौर में Alzheimer की समय से पहले पहचान की दिशा में नई पहल, संपूर्ण ने लॉन्च किया ब्लड बायोमार्कर टेस्ट
इंदौर, 19 सितंबर 2026। मध्य प्रदेश में Alzheimer बीमारी की शुरुआती पहचान और समय पर मेडिकल जांच की दिशा में एक नई पहल की गई है। संपूर्ण सोडानी डायग्नोस्टिक क्लिनिक ने Alzheimer की शुरुआती पहचान के लिए नया ब्लड बायोमार्कर टेस्ट लॉन्च किया है। दावा है कि यह एडवांस टेस्ट अल्जाइमर से जुड़े मस्तिष्कीय बदलावों का पता याददाश्त कमजोर होने जैसे स्पष्ट लक्षण सामने आने से 10 से 15 साल पहले तक लगाने में मदद कर सकता है।
अल्जाइमर बीमारी दुनिया भर में डिमेंशिया के प्रमुख कारणों में शामिल है। आमतौर पर इसकी पहचान तब होती है, जब व्यक्ति की याददाश्त, सोचने-समझने और रोजमर्रा की गतिविधियों पर बीमारी का असर दिखाई देने लगता है। ऐसे में शुरुआती स्तर पर बीमारी से जुड़े बदलावों की पहचान करना मरीज और परिवार के लिए आगे की मेडिकल जांच तथा उपचार की योजना बनाने में उपयोगी हो सकता है।
अब तक अल्जाइमर से जुड़े बदलावों की जांच के लिए सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड (CSF) टेस्ट और एमिलॉयड PET स्कैन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता रहा है। CSF जांच के लिए स्पाइनल टैप जैसी प्रक्रिया की आवश्यकता होती है, जबकि PET स्कैन और CSF जांच अपेक्षाकृत महंगी होने के साथ हर स्थान पर आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। संपूर्ण हेल्थकेयर के अनुसार, इंदौर में फिलहाल अल्जाइमर के लिए एमिलॉयड PET स्कैन की सुविधा उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण मरीजों को जांच के लिए अन्य बड़े शहरों का रुख करना पड़ सकता है।
संपूर्ण हेल्थकेयर के प्रवक्ता ने कहा कि नया ब्लड टेस्ट अल्जाइमर की जांच को अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उनके मुताबिक, इंदौर में ही कम तकलीफ वाली जांच उपलब्ध होने से मरीजों और उनके परिवारों को बीमारी से जुड़े मेडिकल फैसले लेने तथा आगे की जांच और उपचार की योजना बनाने में मदद मिल सकती है।
यह ऑटोमेटेड ब्लड टेस्ट अल्जाइमर से जुड़े दो प्रमुख बायोमार्कर्स pTau217 (पीटाउ217) और Aβ42 (एमिलॉयड बीटा 42) की जांच करता है। ये बायोमार्कर्स अल्जाइमर से संबंधित मस्तिष्कीय बदलावों के आकलन में महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
किन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है टेस्ट?
संपूर्ण हेल्थकेयर के अनुसार, अल्जाइमर ब्लड बायोमार्कर टेस्ट विशेष रूप से इन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है:
- 50 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोग।
- ऐसे लोग जिन्हें शुरुआती स्तर पर याददाश्त या संज्ञानात्मक क्षमता में कमी महसूस हो रही हो।
- जिनके परिवार में अल्जाइमर या डिमेंशिया का इतिहास रहा हो।
- ऐसे मरीज जिन्हें न्यूरोलॉजिस्ट या फिजिशियन ने कॉग्निटिव असेसमेंट की सलाह दी हो।
टेस्ट के लिए K2 EDTA प्लाज्मा सैंपल की आवश्यकता होती है और कंपनी के अनुसार इसके परिणाम 24 घंटे के भीतर उपलब्ध हो सकते हैं।
संपूर्ण हेल्थकेयर का कहना है कि डायग्नोस्टिक्स के क्षेत्र में 34 से अधिक वर्षों के अनुभव के साथ संस्थान सेंट्रल इंडिया में नई पीढ़ी की डायग्नोस्टिक तकनीकों को उपलब्ध कराने पर काम कर रहा है। कंपनी के मुताबिक, इस तरह की आधुनिक जांच सुविधाओं का उद्देश्य बीमारी की शुरुआती पहचान, बेहतर मेडिकल निर्णय और प्रिवेंटिव हेल्थकेयर को बढ़ावा देना है।
हालांकि, किसी भी ब्लड बायोमार्कर टेस्ट का उपयोग डॉक्टर की सलाह और मरीज की क्लिनिकल स्थिति के संदर्भ में किया जाना चाहिए। टेस्ट का परिणाम मिलने के बाद जरूरत के अनुसार न्यूरोलॉजिकल मूल्यांकन और अन्य जांचों की सलाह दी जा सकती है।
