इंदौर में अहिल्या पथ के विरोध में किसानों का धरना जारी, जमीन की बिक्री पर लगी रोक हटाने की मांग
आईडीए कार्यालय के सामने तीसरे दिन भी डटे रहे किसान; अर्धनग्न प्रदर्शन कर जताया विरोध, योजना निरस्त नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी
इंदौर। अहिल्या पथ परियोजना के विरोध में प्रभावित किसानों का आंदोलन लगातार जारी है। इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) कार्यालय के बाहर चल रहा किसानों का अनिश्चितकालीन धरना शुक्रवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। शासन और प्रशासन का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित करने के लिए किसानों ने सड़क पर अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार और आईडीए के विरुद्ध नारेबाजी करते हुए योजना को निरस्त करने तथा प्रभावित जमीनों की खरीद-बिक्री पर लगाई गई रोक तत्काल हटाने की मांग की।
किसान नेताओं का कहना है कि अहिल्या पथ परियोजना की घोषणा और प्रस्तावित योजना के कारण उनकी जमीनों से जुड़े निर्णय प्रभावित हो रहे हैं। जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगने से किसान आवश्यकता के समय अपनी संपत्ति का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। परिवार में विवाह, बच्चों की शिक्षा, बीमारी और अन्य आर्थिक जरूरतों के बावजूद जमीन बेचने की अनुमति नहीं मिलने से किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
शांतिपूर्ण आंदोलन के बाद अर्धनग्न प्रदर्शन
धरने पर बैठे किसानों ने बताया कि वे कई दिनों से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें शासन-प्रशासन के सामने रख रहे हैं। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। किसानों का आरोप है कि अधिकारियों की ओर से उन्हें केवल आश्वासन मिल रहे हैं, जबकि जमीन से जुड़ी पाबंदियां यथावत बनी हुई हैं।
समस्या का समाधान नहीं होने से नाराज किसानों ने आंदोलन के तीसरे दिन अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया। किसानों ने कहा कि यह प्रदर्शन शासन तक अपनी पीड़ा पहुंचाने का प्रयास है। उनका उद्देश्य कानून-व्यवस्था बिगाड़ना नहीं, बल्कि अपनी जमीन और अधिकारों की रक्षा करना है।
योजना निरस्त करने की मांग
प्रदर्शनकारी किसानों की प्रमुख मांग है कि अहिल्या पथ परियोजना को मौजूदा स्वरूप में निरस्त किया जाए। किसानों का कहना है कि परियोजना से कृषि भूमि और उस पर निर्भर परिवारों की आजीविका प्रभावित होने की आशंका है। कोई भी अंतिम निर्णय लेने से पहले प्रभावित किसानों की सहमति ली जानी चाहिए और परियोजना के सामाजिक एवं आर्थिक प्रभावों का विस्तृत अध्ययन किया जाना चाहिए।
किसानों ने यह भी मांग की कि जिन क्षेत्रों की जमीनों की खरीद-बिक्री पर रोक लगाई गई है, वहां से प्रतिबंध तत्काल हटाया जाए। उनका कहना है कि परियोजना को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण जमीन मालिक अनिश्चितता में हैं। न तो वे अपनी भूमि बेच पा रहे हैं और न ही भविष्य की कोई आर्थिक योजना तैयार कर पा रहे हैं।
वार्ता से समाधान निकालने की अपील
धरने में शामिल प्रतिनिधियों ने शासन और आईडीए अधिकारियों से किसानों के साथ औपचारिक बैठक करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि बातचीत के माध्यम से ऐसा समाधान निकाला जाना चाहिए, जिसमें विकास योजनाओं के साथ किसानों के अधिकार और आजीविका भी सुरक्षित रहें।
किसानों का कहना है कि यदि प्रशासन योजना को आगे बढ़ाना चाहता है तो उससे संबंधित सभी जानकारियां सार्वजनिक की जाएं। परियोजना का नक्शा, प्रभावित गांवों और जमीनों का विवरण, भूमि प्राप्त करने की प्रक्रिया तथा किसानों को दिए जाने वाले विकल्प स्पष्ट किए जाने चाहिए। किसानों ने दावा किया कि पर्याप्त जानकारी नहीं मिलने के कारण उनके बीच भ्रम और चिंता बनी हुई है।
आंदोलन के अगले चरण की चेतावनी
किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित गांवों में बैठकें आयोजित कर बड़ी संख्या में किसानों को आंदोलन से जोड़ा जाएगा। आंदोलन के अगले चरण में रैली, चक्काजाम अथवा अन्य लोकतांत्रिक प्रदर्शन की घोषणा भी की जा सकती है।
किसानों ने कहा कि वे अपनी मांगों का समाधान होने तक आईडीए कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना जारी रखेंगे। उन्होंने प्रशासन से संवेदनशीलता के साथ मामले पर विचार करने और जमीन की बिक्री पर लगी रोक हटाने का निर्णय लेने की मांग की है। फिलहाल किसानों और आईडीए के बीच गतिरोध बना हुआ है तथा आंदोलनकारी प्रशासन की ओर से ठोस पहल का इंतजार कर रहे हैं।
