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इंदौर में भूजल के अत्यधिक दोहन पर होगी निगरानी, नियम तोड़ने पर लगाया जा सकता है जुर्माना

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Published On: 19 September 2026

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इंदौर में भूजल के अत्यधिक दोहन पर होगी निगरानी, नियम तोड़ने पर लगाया जा सकता है जुर्माना

अस्पताल, होटल, मॉल, उद्योग और पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर यूनिट को लेना होगी आवश्यक अनुमति; भूजल संरक्षण को लेकर आयोजित हुई प्रशिक्षण कार्यशाला

इंदौर। शहर में बोरिंग और ट्यूबवेल के माध्यम से आवश्यकता से अधिक भूजल निकालने वाले संस्थानों एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर अब निगरानी बढ़ाई जाएगी। भूजल का बड़े स्तर पर उपयोग करने वाली परियोजनाओं और संस्थाओं को निर्धारित नियमों का पालन करने के साथ संबंधित विभाग से आवश्यक अनुमति भी लेनी होगी। नियमों का उल्लंघन करने अथवा बिना अनुमति भूजल निकालने की स्थिति में संबंधित संस्थान के विरुद्ध जुर्माने सहित अन्य कार्रवाई की जा सकती है।

भूजल के बढ़ते दोहन, इसके नियमन और संरक्षण को लेकर शुक्रवार को जिला पंचायत सभाकक्ष में केंद्रीय भूजल प्राधिकरण की जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें अधिकारियों और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिनिधियों को भूजल उपयोग से संबंधित नियमों, अनापत्ति प्रमाण-पत्र यानी एनओसी प्राप्त करने की प्रक्रिया, ऑनलाइन आवेदन तथा दंडात्मक प्रावधानों की जानकारी दी गई।

बड़े संस्थानों पर रहेगा विशेष ध्यान

कार्यशाला में उन संस्थानों और परियोजनाओं पर विशेष रूप से चर्चा की गई, जहां प्रतिदिन बड़ी मात्रा में भूजल का उपयोग होता है। इनमें अस्पताल, होटल, मॉल, औद्योगिक इकाइयां, निर्माण परियोजनाएं और पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर तैयार करने वाली इकाइयां शामिल हैं। इन संस्थानों को भूजल निकालने से पहले नियमानुसार अनुमति प्राप्त करनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि पानी का उपयोग स्वीकृत सीमा के भीतर ही किया जा रहा है।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि केवल बोरिंग करवाना ही पर्याप्त नहीं है। व्यावसायिक गतिविधियों के लिए भूजल का उपयोग करने वाले संस्थानों को पानी की खपत का रिकॉर्ड रखने, आवश्यक उपकरण लगाने और निर्धारित शर्तों का पालन करने की जरूरत है। अनुमति से अधिक पानी निकालने अथवा नियमों की अनदेखी करने पर दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है।

एनओसी के लिए ऑनलाइन आवेदन

कार्यशाला में केंद्रीय भूजल प्राधिकरण से एनओसी प्राप्त करने की ऑनलाइन प्रक्रिया भी समझाई गई। संबंधित संस्थानों को पोर्टल पर अपनी परियोजना, पानी की अनुमानित आवश्यकता, बोरवेल की संख्या और भूजल संरक्षण के लिए किए जाने वाले उपायों की जानकारी देनी होगी। आवेदन की जांच के बाद निर्धारित नियमों और संबंधित क्षेत्र में भूजल की स्थिति के आधार पर अनुमति जारी की जाएगी।

प्रतिनिधियों को बताया गया कि आवेदन करते समय सही जानकारी देना जरूरी है। गलत अथवा अधूरी जानकारी मिलने पर आवेदन निरस्त किया जा सकता है। अनुमति मिलने के बाद भी संस्थान को निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा। अधिकारी समय-समय पर रिकॉर्ड, जल खपत और संरक्षण के उपायों की जांच कर सकते हैं।

जल संरक्षण के उपाय भी जरूरी

व्यावसायिक और औद्योगिक संस्थानों को भूजल निकालने के साथ उसके संरक्षण और पुनर्भरण की जिम्मेदारी भी निभानी होगी। इसके लिए वर्षा जल संचयन प्रणाली, रिचार्ज पिट और जल बचत से जुड़ी तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया गया। संस्थानों को पानी के अनावश्यक उपयोग को रोकने और जहां संभव हो, उपयोग किए गए पानी को उपचारित कर दोबारा इस्तेमाल करने की सलाह दी गई।

विशेषज्ञों ने कहा कि तेजी से बढ़ती जनसंख्या, शहरी विस्तार, बड़े निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों के कारण भूजल पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। यदि समय रहते पानी के उपयोग को नियंत्रित नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में पेयजल संकट और गंभीर हो सकता है। इसलिए सरकारी विभागों के साथ नागरिकों और व्यावसायिक संस्थानों की भागीदारी भी जरूरी है।

विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि हुए शामिल

कार्यशाला में नगर निगम के अधिकारियों, इंजीनियरों, पर्यावरण विशेषज्ञों, क्रेडाई और विभिन्न औद्योगिक एवं व्यावसायिक क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। उपस्थित लोगों ने एनओसी, भूजल उपयोग की सीमा, निगरानी व्यवस्था और जुर्माने से संबंधित सवाल भी पूछे।

अधिकारियों ने सभी संस्थानों से अपने भूजल उपयोग की स्थिति की समीक्षा करने और आवश्यक होने पर जल्द ऑनलाइन आवेदन करने को कहा। प्रशासन का उद्देश्य अनियंत्रित भूजल दोहन को रोकने के साथ उपलब्ध जल संसाधनों का संतुलित और जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित करना है।

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