Betul Medical Waste: बैतूल में मेडिकल कचरे के निष्पादन पर उठे सवाल, आम आदमी पार्टी ने खोला मोर्चा
निजी अस्पतालों, क्लीनिक और पैथोलॉजी लैब से निकलने वाले बायोमेडिकल वेस्ट की जांच की मांग; अजय सोनी बोले—नियमों का पालन नहीं हुआ तो स्वास्थ्य और पर्यावरण को खतरा
रिपोर्ट: राकेश सिंह
बैतूल। जिले में संचालित निजी अस्पतालों, क्लीनिकों और पैथोलॉजी लैब से निकलने वाले बायोमेडिकल कचरे के निष्पादन को लेकर आम आदमी पार्टी ने सवाल उठाए हैं। पार्टी ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि चिकित्सा संस्थानों से प्रतिदिन निकलने वाले मेडिकल अपशिष्ट को कहां और किस प्रक्रिया के तहत नष्ट किया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि इस संवेदनशील विषय की विस्तृत जांच कर नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों की पहचान की जानी चाहिए।
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय परिषद सदस्य, प्रदेश उपाध्यक्ष एवं नर्मदापुरम जोन प्रभारी अजय सोनी ने निजी चिकित्सा संस्थानों की अनुमति और मेडिकल कचरा प्रबंधन व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मरीजों के उपचार के बाद निकलने वाली संक्रमित सामग्री का निर्धारित मानकों के अनुसार निष्पादन होना आवश्यक है।
क्या सभी संस्थानों के पास है वैध अनुमति?
अजय सोनी ने सवाल किया कि क्या बैतूल जिले में संचालित सभी निजी अस्पतालों, क्लीनिकों और पैथोलॉजी लैब ने संबंधित प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण से बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन की अनुमति प्राप्त की है। उन्होंने पूछा कि इन संस्थानों द्वारा बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स-2016 का पालन किया जा रहा है या नहीं।
उन्होंने कहा कि प्रशासन को जिले में संचालित सभी चिकित्सा संस्थानों की सूची सार्वजनिक करनी चाहिए। इसके साथ यह भी बताया जाना चाहिए कि किन संस्थानों के पास बायोमेडिकल वेस्ट ऑथराइजेशन है और किन संस्थानों द्वारा अधिकृत एजेंसी के माध्यम से मेडिकल कचरे का उठाव एवं निष्पादन कराया जा रहा है।
बिना अनुमति चल रहे क्लीनिकों पर उठाए सवाल
आम आदमी पार्टी ने जिले में कथित रूप से बिना वैध अनुमति संचालित हो रहे क्लीनिकों को लेकर भी चिंता व्यक्त की है। अजय सोनी ने कहा कि जिन संस्थानों के पास क्लीनिक अथवा चिकित्सा केंद्र संचालित करने की वैधानिक अनुमति नहीं है, उनके मेडिकल कचरा प्रबंधन की व्यवस्था पर स्वाभाविक रूप से प्रश्न खड़े होते हैं।
उन्होंने पूछा कि ऐसे संस्थानों से निकलने वाली उपयोग की गई सिरिंज, सुई, दवाइयों की शीशियां, संक्रमित पट्टियां, दस्ताने और जांच से संबंधित अन्य सामग्री का निष्पादन कहां किया जाता है। यदि यह कचरा सामान्य घरेलू कचरे में मिलाया जाता है अथवा खुले स्थान पर फेंका जाता है तो इससे सफाई कर्मचारियों, कचरा बीनने वाले लोगों, आम नागरिकों और पशुओं के स्वास्थ्य को खतरा हो सकता है।
स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए गंभीर विषय
अजय सोनी ने कहा कि बायोमेडिकल कचरा सामान्य कचरे से अलग होता है और इसके संग्रह, परिवहन एवं निष्पादन के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन आवश्यक है। इसमें लापरवाही होने पर संक्रमण फैलने, जल एवं मिट्टी प्रदूषित होने और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रभावित होने की आशंका पैदा हो सकती है।
उन्होंने कहा कि मेडिकल कचरे को खुले में फेंकना या सामान्य कचरे के साथ मिलाना गंभीर लापरवाही मानी जानी चाहिए। संबंधित विभागों को नियमित निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रत्येक अस्पताल, क्लीनिक और पैथोलॉजी लैब में अलग-अलग श्रेणी के कचरे के लिए निर्धारित व्यवस्था मौजूद हो।
रिकॉर्ड और निष्पादन व्यवस्था की जांच की मांग
आम आदमी पार्टी ने मांग की है कि जिले के निजी चिकित्सा संस्थानों में मेडिकल कचरे से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की जाए। जांच में यह देखा जाना चाहिए कि संस्थानों से प्रतिदिन कितना बायोमेडिकल वेस्ट निकल रहा है, उसका उठाव कौन कर रहा है और अंतिम निष्पादन किस अधिकृत केंद्र पर किया जा रहा है।
पार्टी ने यह भी मांग की कि स्वास्थ्य विभाग, नगर पालिका और प्रदूषण नियंत्रण विभाग संयुक्त रूप से निरीक्षण अभियान चलाएं। जिन संस्थानों के पास आवश्यक अनुमति नहीं है या जो निर्धारित नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं, उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
कलेक्टर और स्वास्थ्य अधिकारियों से मिलेंगे अजय सोनी
अजय सोनी ने कहा कि इस मामले की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच की मांग को लेकर वे जल्द जिला कलेक्टर और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। इस दौरान निजी अस्पतालों, क्लीनिकों और पैथोलॉजी लैब के संचालन तथा मेडिकल कचरा प्रबंधन से जुड़े विषयों पर लिखित शिकायत प्रस्तुत की जाएगी।
उन्होंने कहा कि यह मुद्दा किसी एक संस्था या राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है, बल्कि आमजन के स्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। प्रशासन को जांच कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखनी चाहिए। नियमों का पालन करने वाले संस्थानों को प्रोत्साहित करने और उल्लंघन करने वालों की जवाबदेही तय करने की आवश्यकता है।
