गौ हद धाम में बीमार गाय की मौत पर फूटा आक्रोश, शव लेकर नगर पालिका पहुंचे गौ सेवक
दो-तीन दिन पहले सूचना देने के बावजूद सहायता नहीं मिलने का आरोप; सीएमओ कार्यालय में मृत गाय रखकर किया प्रदर्शन, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
गौ हद धाम। गौ हद धाम क्षेत्र में एक बीमार गाय की मौत के बाद गौ सेवकों का गुस्सा फूट पड़ा। गाय को समय पर उपचार और सहायता नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए गौ सेवक मृत गाय को नगर पालिका कार्यालय लेकर पहुंचे और प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सीएमओ कार्यालय में मृत गाय को रख दिया तथा नगर पालिका प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान नगर पालिका परिसर में काफी देर तक हंगामे और विरोध की स्थिति बनी रही।
गौ सेवकों का आरोप है कि गाय पिछले दो-तीन दिनों से बीमार थी और एक गड्ढे में फंसी हुई थी। उसकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। इस संबंध में संबंधित अधिकारियों और नगर पालिका के कर्मचारियों को सूचना देने का दावा किया गया, लेकिन समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। सहायता नहीं मिलने के कारण गौ सेवकों को स्वयं मौके पर पहुंचकर गाय को बाहर निकालना पड़ा।
गौ सेवकों ने गाय को गड्ढे से बाहर निकाला
गौ सेवकों के अनुसार, बीमार गाय गड्ढे में फंसी होने के कारण बाहर नहीं निकल पा रही थी। उसकी हालत देखकर आसपास के लोगों ने संबंधित व्यवस्था से मदद मिलने की उम्मीद की, लेकिन कथित रूप से कोई टीम समय पर मौके पर नहीं पहुंची। इसके बाद गौ सेवकों ने अपने स्तर पर बचाव कार्य शुरू किया।
गौ सेवक गड्ढे में उतरे और कड़ी मशक्कत के बाद गाय को बाहर निकाला। उन्होंने गाय की देखभाल करने के साथ घटनास्थल के आसपास सफाई भी की। गाय को बचाने के लिए उपलब्ध साधनों से प्रयास किए गए, लेकिन उसकी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि गड्ढे से बाहर निकालने के बाद भी गाय की हालत गंभीर बनी हुई थी। उसे तत्काल उचित पशु चिकित्सा सहायता और सुरक्षित स्थान पर देखरेख की आवश्यकता थी। आरोप है कि सूचना दिए जाने के बावजूद अगले दो दिनों तक गाय की स्थिति पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। अंततः बीमार गाय ने दम तोड़ दिया।
मृत गाय को नगर पालिका कार्यालय लेकर पहुंचे
गाय की मौत की जानकारी मिलने के बाद गौ सेवकों में आक्रोश फैल गया। उन्होंने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मृत गाय के शव को नगर पालिका कार्यालय ले जाने का निर्णय लिया। गौ सेवक शव लेकर कार्यालय पहुंचे और उसे सीएमओ कार्यालय में रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।
प्रदर्शन के दौरान गौ सेवकों ने “गौ हद धाम जिंदाबाद” और “नगर पालिका मुर्दाबाद” जैसे नारे लगाए। उनका कहना था कि जब गाय जीवित थी और उसे सहायता की आवश्यकता थी, तब उसकी पुकार पर ध्यान नहीं दिया गया। मौत के बाद अधिकारियों और व्यवस्था की सक्रियता का कोई अर्थ नहीं रह जाता।
गौ सेवकों ने आरोप लगाया कि यदि समय पर गाय को गड्ढे से निकालकर उपचार उपलब्ध कराया जाता, तो संभवतः उसकी जान बचाई जा सकती थी। हालांकि गाय की मौत के वास्तविक कारण की आधिकारिक या चिकित्सकीय पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है।
शिकायत और सहायता व्यवस्था पर उठे सवाल
घटना के बाद नगर पालिका की शिकायत निवारण और बेसहारा पशुओं की सहायता से जुड़ी व्यवस्था पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। गौ सेवकों ने पूछा कि यदि नगर पालिका को पहले से सूचना दी गई थी तो मौके पर बचाव दल क्यों नहीं भेजा गया। यदि संबंधित अधिकारियों तक शिकायत नहीं पहुंची तो शिकायत दर्ज करने और उसे जिम्मेदार कर्मचारियों तक पहुंचाने वाली व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बेसहारा या दुर्घटनाग्रस्त पशुओं की सहायता के लिए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिसमें सूचना मिलते ही पशु चिकित्सा विभाग और स्थानीय निकाय की टीम मौके पर पहुंचे। गंभीर रूप से बीमार या घायल पशु के मामले में कुछ घंटों की देरी भी जानलेवा साबित हो सकती है।
स्थानीय लोगों ने भी मांग की कि क्षेत्र में बेसहारा पशुओं को गड्ढों, नालियों और अन्य खतरनाक स्थानों से बचाने के लिए नियमित निगरानी की जाए। दुर्घटना या बीमारी की स्थिति में तत्काल उपचार के लिए हेल्पलाइन और बचाव वाहन की व्यवस्था प्रभावी रूप से संचालित होनी चाहिए।
जिम्मेदारी तय करने की मांग
गौ सेवकों ने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने तथा लापरवाही सामने आने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि केवल जांच का आश्वासन पर्याप्त नहीं होगा। भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए ठोस और स्थायी व्यवस्था बनाना आवश्यक है।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि नगर पालिका शिकायत प्राप्त होने से लेकर कार्रवाई किए जाने तक की पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक करे। यह भी स्पष्ट किया जाए कि गाय के बीमार होने और गड्ढे में फंसे होने की सूचना कब मिली, सूचना किस कर्मचारी या अधिकारी को दी गई तथा उसके बाद क्या कार्रवाई की गई।
नगर पालिका का पक्ष सामने आना बाकी
मामले में नगर पालिका प्रशासन का विस्तृत आधिकारिक पक्ष समाचार लिखे जाने तक सामने नहीं आया है। नगर पालिका का पक्ष मिलने पर यह स्पष्ट हो सकेगा कि उसे गाय की स्थिति की जानकारी कब मिली और सहायता के लिए क्या कदम उठाए गए थे।
फिलहाल घटना को लेकर गौ सेवकों और स्थानीय लोगों में नाराजगी बनी हुई है। उनका कहना है कि बेसहारा और बीमार पशुओं की सुरक्षा केवल सामाजिक संगठनों की जिम्मेदारी नहीं हो सकती। स्थानीय प्रशासन, पशु चिकित्सा विभाग और नगर पालिका को समन्वय के साथ ऐसी व्यवस्था तैयार करनी चाहिए, जिसमें शिकायत का उत्तर पशु की मौत के बाद नहीं, उसके जीवित रहते मिले।
