Yuva Dharm Sansad: उज्जैन में युवाओं को संबोधित करेंगे RSS प्रमुख मोहन भागवत, 25 राज्यों से पहुंचे 1700 विद्यार्थी
तीन दिवसीय युवा धर्म संसद में मनोज मुंतशिर और स्वामी अवधेशानंद गिरि भी होंगे शामिल, भारतीय संस्कृति एवं राष्ट्रीय चेतना पर होगा मंथन
उज्जैन। धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी उज्जैन में आयोजित तीन दिवसीय ‘युवा धर्म संसद’ में देश के विभिन्न हिस्सों से आए विद्यार्थियों का संगम देखने को मिल रहा है। 17 से 19 सितंबर तक आयोजित इस कार्यक्रम में 25 राज्यों के करीब 1700 विद्यार्थी हिस्सा ले रहे हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत गुरुवार को कार्यक्रम को संबोधित करेंगे।
देवास रोड स्थित गीता भवन में आयोजित युवा धर्म संसद में विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, धर्म, अध्यात्म, राष्ट्रीय चेतना, सामाजिक दायित्व और नेतृत्व से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन दिया जा रहा है। कार्यक्रम में गीतकार एवं लेखक मनोज मुंतशिर शुक्ला और जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि सहित अनेक संत, विचारक एवं प्रबुद्धजन शामिल होंगे।
आयोजन का उद्देश्य युवाओं को भारत की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने के साथ उन्हें समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्व समझने के लिए प्रेरित करना बताया गया है।
मोहन भागवत का संबोधन होगा प्रमुख आकर्षण
युवा धर्म संसद के दूसरे दिन आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का संबोधन कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहेगा। वह देश के अलग-अलग राज्यों से आए विद्यार्थियों के समक्ष भारतीय संस्कृति, सामाजिक एकता, राष्ट्रीय चरित्र और युवाओं की भूमिका से जुड़े विषयों पर अपने विचार रखेंगे।
कार्यक्रम में उनका औपचारिक संबोधन होगा, लेकिन विद्यार्थियों के साथ सीधा प्रश्नोत्तर अथवा संवाद सत्र प्रस्तावित नहीं बताया गया है। उनके संबोधन को सुनने के लिए विद्यार्थियों के साथ शिक्षाविदों, संतों और आयोजन से जुड़े प्रतिनिधियों में उत्साह है।
मोहन भागवत तीन दिवसीय मध्यप्रदेश प्रवास पर हैं। उज्जैन में आयोजित युवा धर्म संसद में भाग लेने के साथ उनके अन्य कार्यक्रम भी निर्धारित बताए गए हैं। कार्यक्रम स्थल पर उनके आगमन को देखते हुए सुरक्षा और व्यवस्थाओं के विशेष इंतजाम किए गए हैं।
25 राज्यों के 1700 विद्यार्थियों की सहभागिता
युवा धर्म संसद में भारत के 25 राज्यों से करीब 1700 विद्यार्थी उज्जैन पहुंचे हैं। विभिन्न भाषा, संस्कृति और सामाजिक पृष्ठभूमि से आने वाले विद्यार्थियों की मौजूदगी ने आयोजन को राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया है। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को अलग-अलग सत्रों के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक विविधता और उसमें निहित एकता का संदेश दिया जा रहा है।
आयोजन में विद्यार्थियों को केवल धार्मिक विषयों की जानकारी देने तक सीमित नहीं रखा गया है। उनके व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व क्षमता, सामाजिक सहभागिता, पर्यावरण संरक्षण, पारिवारिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण में योगदान जैसे विषयों पर भी चर्चा की जा रही है।
आयोजकों का मानना है कि युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक पहचान की जानकारी होना आवश्यक है। आधुनिक शिक्षा और तकनीकी विकास के साथ युवाओं में नैतिक मूल्यों, सामाजिक संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी जरूरी है।
मनोज मुंतशिर रखेंगे संस्कृति और साहित्य पर विचार
प्रसिद्ध गीतकार, लेखक और संवाद लेखक मनोज मुंतशिर शुक्ला भी युवा धर्म संसद में शामिल होंगे। वह अपने संबोधन में भारतीय इतिहास, साहित्य, भाषा, संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना से जुड़े विषयों पर विचार रख सकते हैं। युवाओं के बीच अपने प्रेरक वक्तव्यों और सांस्कृतिक विषयों पर बेबाक विचारों के कारण मनोज मुंतशिर की विशेष पहचान है।
कार्यक्रम में उनकी सहभागिता को लेकर विद्यार्थियों में उत्साह देखा जा रहा है। उनके सत्र के माध्यम से युवाओं को साहित्य और रचनात्मक अभिव्यक्ति के साथ देश की सांस्कृतिक विरासत को समझने का अवसर मिलेगा।
स्वामी अवधेशानंद गिरि देंगे आध्यात्मिक मार्गदर्शन
जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि की उपस्थिति भी आयोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। वह विद्यार्थियों को धर्म, अध्यात्म, सेवा, अनुशासन और जीवन मूल्यों के संबंध में मार्गदर्शन देंगे।
स्वामी अवधेशानंद गिरि अपने संबोधनों में युवाओं को आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और समाज सेवा के लिए प्रेरित करते रहे हैं। युवा धर्म संसद में उनके विचार विद्यार्थियों को आधुनिक जीवन की चुनौतियों के बीच संतुलन बनाते हुए नैतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देंगे।
भारतीय संस्कृति और युवाओं की भूमिका पर मंथन
तीन दिवसीय आयोजन के अलग-अलग सत्रों में भारतीय ज्ञान परंपरा, सनातन संस्कृति, सामाजिक समरसता, राष्ट्र निर्माण और युवाओं के दायित्व जैसे विषयों पर विमर्श किया जा रहा है। वक्ताओं द्वारा विद्यार्थियों को बताया जा रहा है कि देश का भविष्य केवल शैक्षणिक योग्यता से नहीं, बल्कि चरित्र, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी से भी निर्मित होता है।
युवा धर्म संसद के माध्यम से विद्यार्थियों को देश की विविध धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को समझने और उनके संरक्षण में योगदान देने का संदेश दिया जा रहा है। युवाओं से समाज में सद्भाव, सहयोग और सेवा की भावना को मजबूत करने की अपेक्षा भी की गई है।
कार्यक्रम स्थल पर व्यापक व्यवस्थाएं
देशभर से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के पहुंचने के कारण गीता भवन में आवास, भोजन, परिवहन और सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाएं की गई हैं। प्रतिभागियों के पंजीयन से लेकर विभिन्न सत्रों में उनकी सहभागिता तक के लिए स्वयंसेवकों की टीमें तैनात की गई हैं।
विशिष्ट अतिथियों के आगमन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत की गई है। कार्यक्रम स्थल और आसपास के क्षेत्रों में निगरानी रखी जा रही है। प्रवेश व्यवस्था को नियंत्रित करने के साथ आमंत्रित प्रतिभागियों और प्रतिनिधियों के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं की गई हैं।
19 सितंबर तक चलेगी युवा धर्म संसद
तीन दिवसीय युवा धर्म संसद का समापन 19 सितंबर को होगा। समापन से पहले विद्यार्थियों के लिए विभिन्न बौद्धिक, धार्मिक और प्रेरणात्मक सत्र आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम से लौटने वाले विद्यार्थियों से अपेक्षा की गई है कि वे यहां प्राप्त विचारों और अनुभवों को अपने शिक्षण संस्थानों एवं समाज के बीच साझा करेंगे।
महाकाल की नगरी उज्जैन में आयोजित यह युवा धर्म संसद देश के विभिन्न राज्यों से आए विद्यार्थियों के लिए संवाद, चिंतन और सांस्कृतिक अध्ययन का महत्वपूर्ण मंच बन गई है। आयोजन के माध्यम से युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
