Tata Sons Leadership: एन. चंद्रशेखरन को फिर कमान सौंपने का फैसला, पांच साल के नए कार्यकाल पर नोएल टाटा ने जताई असहमति
टाटा संस बोर्ड ने कार्यकारी चेयरमैन के रूप में पुनर्नियुक्ति का प्रस्ताव किया मंजूर, अंतिम अमल के लिए शेयरधारकों की स्वीकृति अहम
नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित कारोबारी समूहों में शामिल टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस में नेतृत्व को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। टाटा संस के निदेशक मंडल ने एन. चंद्रशेखरन को कार्यकारी चेयरमैन के रूप में पांच साल का एक और कार्यकाल देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। हालांकि, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने इस फैसले पर असहमति जताई है। इसके बाद टाटा समूह के नेतृत्व, उत्तराधिकार योजना और कंपनी की संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग को लेकर आंतरिक मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक, टाटा संस बोर्ड के कई सदस्यों ने चंद्रशेखरन के नेतृत्व और उनके कार्यकाल के दौरान समूह के प्रदर्शन को देखते हुए पुनर्नियुक्ति का समर्थन किया। दूसरी ओर, नोएल टाटा ने उनकी नियुक्ति आगे बढ़ाने की प्रक्रिया और वैधानिक स्थिति को लेकर सवाल उठाए हैं। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि टाटा ट्रस्ट्स की टाटा संस में लगभग 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है और कंपनी के प्रमुख निर्णयों में उसकी भूमिका निर्णायक मानी जाती है।
पांच साल के नए कार्यकाल का प्रस्ताव
एन. चंद्रशेखरन वर्तमान में टाटा संस के कार्यकारी चेयरमैन हैं। उनका मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होना है। अब बोर्ड ने उन्हें अगले पांच वर्षों के लिए दोबारा जिम्मेदारी सौंपने का प्रस्ताव मंजूर किया है। इससे पहले ऐसी खबरें सामने आई थीं कि चंद्रशेखरन वर्ष 2027 के बाद पुनर्नियुक्ति नहीं चाहते और पद छोड़ सकते हैं।
बोर्ड के फैसले के बाद परिस्थितियां बदलती दिखाई दे रही हैं। बताया जा रहा है कि कंपनी की नामांकन और पारिश्रमिक समिति ने भी सितंबर की शुरुआत में चंद्रशेखरन को नया कार्यकाल देने की अनुशंसा की थी। बोर्ड के अधिकांश सदस्यों का मानना है कि समूह की दीर्घकालीन परियोजनाओं, डिजिटल कारोबार, विमानन क्षेत्र, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन और वैश्विक विस्तार के लिए नेतृत्व में निरंतरता आवश्यक है।
नोएल टाटा ने क्यों जताई असहमति?
टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन को दोबारा नियुक्त किए जाने के फैसले का विरोध किया है। उनका तर्क है कि टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन और आंतरिक प्रशासनिक नियमों के अनुसार इस तरह के महत्वपूर्ण निर्णय में टाटा ट्रस्ट्स द्वारा नामित निदेशकों की सहमति आवश्यक है।
नोएल टाटा का यह भी कहना बताया गया है कि चंद्रशेखरन के पद छोड़ने के पूर्व निर्णय को टाटा ट्रस्ट्स स्वीकार कर चुका था। ऐसे में उस फैसले को बदलने से प्रशासनिक और कानूनी प्रश्न खड़े हो सकते हैं। उन्होंने नए चेयरमैन के चयन के लिए औपचारिक उत्तराधिकार प्रक्रिया प्रारंभ करने पर जोर दिया है।
इस मतभेद के कारण टाटा संस बोर्ड की मंजूरी के बावजूद चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को पूरी तरह अंतिम नहीं माना जा रहा है। प्रस्ताव को कंपनी की वार्षिक आम बैठक और शेयरधारकों की स्वीकृति सहित आगे की आवश्यक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ सकता है। की रिपोर्ट के अनुसार, नोएल टाटा ने नेतृत्व संबंधी निर्णय पर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई है।
टाटा संस की लिस्टिंग पर भी मतभेद
नेतृत्व परिवर्तन के साथ टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने का मुद्दा भी चर्चा के केंद्र में है। रिपोर्टों के अनुसार, बोर्ड ने कंपनी की संभावित लिस्टिंग की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ाने का समर्थन किया है। भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के अंतर्गत टाटा संस की नियामकीय स्थिति को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही है।
नोएल टाटा कथित रूप से टाटा संस की लिस्टिंग के पक्ष में नहीं हैं। उनका मानना है कि सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध होने से कंपनी की मूल प्रकृति और टाटा समूह की दीर्घकालीन सामाजिक एवं परोपकारी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। टाटा ट्रस्ट्स समूह की सबसे बड़ी शेयरधारक इकाई है और उसकी आय का बड़ा हिस्सा सामाजिक कार्यों पर खर्च किया जाता है।
वहीं, टाटा संस की लगभग 18.4 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला शापूरजी पालोनजी समूह लिस्टिंग के पक्ष में बताया जा रहा है। यह मामला केवल कंपनी की पूंजी जुटाने की व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य में टाटा संस के स्वामित्व, नियंत्रण और निर्णय लेने की संरचना से भी जुड़ा हुआ है।
चंद्रशेखरन के नेतृत्व में बदला टाटा समूह
एन. चंद्रशेखरन ने वर्ष 2017 में टाटा संस के चेयरमैन का पद संभाला था। इससे पहले वह टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक रह चुके थे। उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने डिजिटल तकनीक, विमानन, इलेक्ट्रिक वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश किए।
एयर इंडिया का टाटा समूह में वापस आना भी उनके कार्यकाल के सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में गिना जाता है। इसके अलावा समूह की विभिन्न कंपनियों के बीच बेहतर समन्वय, नए क्षेत्रों में निवेश और वैश्विक बाजार में विस्तार की रणनीति पर भी काम हुआ। इन्हीं उपलब्धियों को देखते हुए बोर्ड के कई सदस्य नेतृत्व में निरंतरता बनाए रखने के पक्ष में हैं।
अंतिम निर्णय पर रहेगी उद्योग जगत की नजर
टाटा संस बोर्ड द्वारा चंद्रशेखरन का कार्यकाल पांच साल बढ़ाने का प्रस्ताव महत्वपूर्ण है, लेकिन नोएल टाटा की असहमति ने मामले को जटिल बना दिया है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि बोर्ड के प्रस्ताव को शेयरधारकों की स्वीकृति मिलती है या टाटा ट्रस्ट्स उत्तराधिकार की नई प्रक्रिया शुरू करने पर जोर देता है।
टाटा समूह भारतीय उद्योग जगत में विश्वास, स्थिरता और संस्थागत प्रशासन के लिए जाना जाता है। ऐसे में नेतृत्व और लिस्टिंग से जुड़े मतभेदों का समाधान किस प्रकार किया जाता है, इस पर निवेशकों, बाजार विशेषज्ञों और उद्योग जगत की नजर बनी रहेगी। समाचार एजेंसी ने भी बताया है कि नेतृत्व और लिस्टिंग विवाद का असर टाटा समूह की सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों पर दिखाई दिया।
