पद्मश्री डॉ. नेमनाथ जैन लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित
कृषि, उद्योग, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में छह दशकों से अधिक के योगदान को मिला सम्मान
इंदौर। कृषि, उद्योग, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में छह दशकों से अधिक समय तक उल्लेखनीय योगदान देने वाले 95 वर्षीय पद्मश्री डॉ. नेमनाथ जैन को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। स्वर्णिम बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की ओर से प्रदान किया गया यह सम्मान उनके दीर्घकालीन, बहुआयामी और प्रेरणादायी योगदान को समर्पित रहा।
सम्मान समारोह में स्वर्णिम बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के संस्थापक वीरेन्द्र कुमार जैन, कपिल जैन और पूजा जैन ने डॉ. नेमनाथ जैन को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड प्रदान किया। इस अवसर पर डॉ. डेविश जैन, मोनिका जैन, डिपिन जैन और रेणु जैन सहित परिवार के सदस्य एवं अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। उपस्थित लोगों ने डॉ. जैन की उपलब्धियों की सराहना करते हुए उनके स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की।
प्रथम पीढ़ी के उद्योगपति और टेक्नोक्रेट के रूप में बनाई पहचान
डॉ. नेमनाथ जैन देश के प्रथम पीढ़ी के उद्योगपतियों, टेक्नोक्रेट और शिक्षाविदों में अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं। उन्होंने सीमित संसाधनों से अपनी व्यावसायिक यात्रा की शुरुआत की और अपनी दूरदर्शिता, मेहनत तथा नवाचार के माध्यम से कृषि आधारित उद्योगों को नई दिशा देने का प्रयास किया।
उन्होंने उद्योग को केवल व्यावसायिक गतिविधि तक सीमित न रखते हुए उसे किसानों, रोजगार और देश की आर्थिक प्रगति से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया। औद्योगिक क्षेत्र में उनकी यात्रा नई संभावनाओं की तलाश, आधुनिक तकनीक के प्रयोग और कृषि उत्पादों के बेहतर उपयोग पर केंद्रित रही। उनके नेतृत्व में स्थापित औद्योगिक गतिविधियों ने कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सोयाबीन की खेती और आधुनिक प्रसंस्करण को दिया बढ़ावा
डॉ. नेमनाथ जैन ने भारत, विशेषकर मध्य प्रदेश में सोयाबीन की खेती को प्रोत्साहित करने तथा उसके आधुनिक प्रसंस्करण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उस समय सोयाबीन की खेती और उससे बनने वाले उत्पादों को लेकर किसानों एवं उद्योग जगत में सीमित जागरूकता थी। उन्होंने इसकी व्यावसायिक संभावनाओं को पहचाना और कृषि एवं उद्योग के बीच मजबूत संबंध स्थापित करने की दिशा में कार्य किया।
खाद्य प्रसंस्करण, खाद्य तेल और पशु पोषण से जुड़े उद्योगों के विकास में भी उनका उल्लेखनीय योगदान रहा। सोयाबीन से तैयार होने वाले विभिन्न उत्पादों के वैज्ञानिक एवं औद्योगिक उपयोग को प्रोत्साहित करके उन्होंने कृषि उपज को अधिक मूल्यवान बनाने की दिशा में पहल की।
इन प्रयासों से सोयाबीन आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिला और किसानों के लिए अपनी उपज को व्यापक बाजार तक पहुंचाने की संभावनाएं विकसित हुईं। कृषि आधारित उद्योगों में आधुनिक तकनीक के प्रयोग ने उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता सुधारने में भी योगदान दिया।
भारतीय कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाया
डॉ. जैन के दूरदर्शी नेतृत्व में प्रेस्टिज समूह ने कृषि आधारित उद्योगों के साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार के क्षेत्र में भी विस्तार किया। समूह के माध्यम से सोया मील और अन्य मूल्यवर्धित कृषि उत्पादों का विभिन्न देशों में निर्यात किया गया।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार के क्षेत्र में किए गए इन प्रयासों ने भारतीय कृषि आधारित उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने में योगदान दिया। इससे न केवल भारतीय उत्पादों की पहचान मजबूत हुई, बल्कि देश के कृषि प्रसंस्करण उद्योग के लिए भी नए अवसर विकसित हुए।
उन्होंने गुणवत्ता, तकनीक और बाजार की जरूरतों के अनुरूप उत्पादन को प्राथमिकता दी। उनके नेतृत्व ने यह संदेश दिया कि कृषि उत्पादों का वैज्ञानिक प्रसंस्करण और अंतरराष्ट्रीय स्तर की गुणवत्ता भारतीय उद्योग को विश्व बाजार में प्रतिस्पर्धी बना सकती है।
उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में भी योगदान
डॉ. नेमनाथ जैन का कार्यक्षेत्र केवल कृषि, उद्योग और व्यापार तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण संस्थानों के विकास में भूमिका निभाई। उनका मानना रहा कि देश की प्रगति के लिए उद्योगों के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कुशल मानव संसाधन भी आवश्यक हैं।
इंदौर, ग्वालियर और देवास में प्रेस्टिज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च तथा प्रेस्टिज यूनिवर्सिटी जैसे शिक्षण संस्थानों के विकास के माध्यम से उन्होंने विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक और करियर उन्मुख शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने में योगदान दिया।
इन संस्थानों के माध्यम से प्रबंधन, तकनीक, अनुसंधान, उद्यमिता और अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों में शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के अवसर मिले। डॉ. जैन ने शिक्षा को रोजगार प्राप्त करने का माध्यम मात्र न मानकर समाज और राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण आधार माना।
छह दशकों की उपलब्धियों का सम्मान
स्वर्णिम बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने डॉ. नेमनाथ जैन के कृषि, औद्योगिक विकास, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में किए गए दीर्घकालीन योगदान को देखते हुए उन्हें लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड प्रदान किया। संस्था के प्रतिनिधियों ने कहा कि उनका जीवन परिश्रम, दूरदर्शिता, अनुशासन और उद्यमशीलता का प्रेरक उदाहरण है।
95 वर्ष की आयु में भी डॉ. जैन की कर्मठता और समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को सम्मान समारोह में विशेष रूप से रेखांकित किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने कहा कि उनकी उपलब्धियां नई पीढ़ी के उद्योगपतियों, शिक्षाविदों, विद्यार्थियों और उद्यमियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
यह लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड डॉ. नेमनाथ जैन के लंबे सार्वजनिक, औद्योगिक और शैक्षणिक जीवन की उपलब्धियों के प्रति सम्मानपूर्ण अभिनंदन है। सम्मान के माध्यम से उनके उस योगदान को रेखांकित किया गया, जिसने कृषि आधारित उद्योग, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के विकास को नई दिशा प्रदान की।
