अमरपुरा आंगनवाड़ी केंद्र की व्यवस्थाओं पर उठे सवाल, सहायिका के खिलाफ कार्यकर्ता ने की शिकायत
बच्चों को केंद्र लाने और घर छोड़ने में सहयोग नहीं करने का आरोप, सीडीपीओ को शिकायत देने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का दावा
नटेरन (विदिशा)। नटेरन क्षेत्र के ग्राम अमरपुरा, पीपलधार के पास संचालित आंगनवाड़ी केंद्र की व्यवस्थाओं को लेकर विवाद सामने आया है। केंद्र की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भूरी मैना ने सहायिका सरोज शर्मा पर बच्चों को उनके घरों से केंद्र तक लाने और वापस छोड़ने में सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया है। कार्यकर्ता का दावा है कि इस संबंध में बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ), नटेरन को कई बार लिखित शिकायत दी गई, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर आंगनवाड़ी केंद्र की कार्यप्रणाली तथा विभागीय अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि केंद्र की व्यवस्थाओं में किसी प्रकार की कमी का सीधा प्रभाव छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को मिलने वाली सरकारी सेवाओं पर पड़ सकता है। इसलिए विभाग को शिकायत की निष्पक्ष जांच कर जल्द स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
बच्चों को केंद्र लाने से इनकार करने का आरोप
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अमरपुरा आंगनवाड़ी केंद्र की कार्यकर्ता भूरी मैना ने आरोप लगाया है कि सहायिका सरोज शर्मा बच्चों को केंद्र तक लाने और कार्यक्रम समाप्त होने के बाद उन्हें घर वापस छोड़ने नहीं जाती हैं। कार्यकर्ता के मुताबिक, जब सहायिका से इस संबंध में बात की गई तो उन्होंने बच्चों के घर दूर होने का हवाला देते हुए उन्हें बुलाने जाने से इनकार कर दिया।
कार्यकर्ता का कहना है कि सहायिका के सहयोग नहीं करने के कारण केंद्र पर बच्चों की नियमित उपस्थिति प्रभावित हो रही है। गांव में कई परिवार आंगनवाड़ी केंद्र से दूरी पर रहते हैं। ऐसे परिवारों के छोटे बच्चों को केंद्र तक पहुंचने में परेशानी होती है। यदि अभिभावक स्वयं बच्चों को छोड़ने नहीं आ पाते हैं तो उनकी उपस्थिति कम होने की आशंका बनी रहती है।
हालांकि, इन आरोपों के संबंध में सहायिका सरोज शर्मा का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। उनका पक्ष प्राप्त होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बच्चों को केंद्र लाने और छोड़ने की मौजूदा व्यवस्था क्या है तथा इस मामले में उनका क्या कहना है।
बच्चों की उपस्थिति और पोषण सेवाओं पर असर का दावा
आंगनवाड़ी केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। केंद्रों के माध्यम से पात्र बच्चों को पूरक पोषण आहार, नियमित वजन और स्वास्थ्य निगरानी जैसी सुविधाएं मिलती हैं। इसके साथ ही बच्चों को शाला-पूर्व शिक्षा से जोड़ने का भी प्रयास किया जाता है।
कार्यकर्ता का दावा है कि सहायिका द्वारा अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने के कारण बच्चों की नियमित उपस्थिति प्रभावित हो सकती है। यदि बच्चे केंद्र तक नहीं पहुंचेंगे तो उन्हें केंद्र पर संचालित गतिविधियों और योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि ऐसी स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो बच्चों के पोषण और प्रारंभिक शिक्षा संबंधी कार्यक्रमों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
हालांकि, केंद्र पर बच्चों की वास्तविक उपस्थिति, पोषण आहार वितरण और अन्य सेवाओं के आधिकारिक रिकॉर्ड की जानकारी अभी सामने नहीं आई है। इन तथ्यों की पुष्टि विभागीय निरीक्षण और अभिलेखों की जांच के बाद ही हो सकती है।
सीडीपीओ को कई बार शिकायत देने का दावा
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भूरी मैना का कहना है कि उन्होंने मामले की जानकारी लिखित रूप से बाल विकास परियोजना अधिकारी, नटेरन को कई बार दी है। शिकायत में सहायिका की कथित लापरवाही और केंद्र संचालन में आ रही परेशानियों का उल्लेख किया गया है। कार्यकर्ता का आरोप है कि बार-बार शिकायत देने के बावजूद संबंधित अधिकारी ने अभी तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की।
कार्यकर्ता और स्थानीय लोगों का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद अधिकारियों को केंद्र का निरीक्षण करना चाहिए था। साथ ही कार्यकर्ता, सहायिका, अभिभावकों और ग्रामीणों के बयान लेकर वास्तविक स्थिति का पता लगाया जाना चाहिए था। शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने के दावे के कारण सीडीपीओ कार्यालय की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
इस विषय में सीडीपीओ अथवा महिला एवं बाल विकास विभाग का आधिकारिक पक्ष फिलहाल उपलब्ध नहीं है। विभागीय पक्ष सामने आने के बाद ही पता चलेगा कि शिकायत कब प्राप्त हुई, उसकी जांच कराई गई या नहीं और मामले में अब तक क्या कार्रवाई की गई है।
ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच की मांग की
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि आंगनवाड़ी केंद्र छोटे बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और प्रारंभिक शिक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण संस्थान है। ऐसे केंद्रों पर पदस्थ प्रत्येक कर्मचारी को जिम्मेदारी से अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए। यदि किसी कर्मचारी के खिलाफ शिकायत मिलती है तो उसका समयबद्ध और निष्पक्ष निराकरण जरूरी है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मामले का संज्ञान लेने की मांग की है। उनका कहना है कि विभाग की टीम को अमरपुरा आंगनवाड़ी केंद्र का आकस्मिक निरीक्षण करना चाहिए। केंद्र का उपस्थिति रजिस्टर, पोषण आहार वितरण रिकॉर्ड और अन्य संबंधित दस्तावेज भी जांचे जाने चाहिए।
इसके अतिरिक्त कार्यकर्ता और सहायिका के बयान दर्ज करने के साथ बच्चों के अभिभावकों से भी जानकारी ली जानी चाहिए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि केंद्र पर वास्तव में क्या समस्याएं हैं और बच्चों की उपस्थिति प्रभावित होने का कारण क्या है।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
यह पूरा मामला फिलहाल आंगनवाड़ी कार्यकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों और शिकायत के आधार पर सामने आया है। सहायिका तथा संबंधित अधिकारियों का विस्तृत पक्ष मिलना अभी बाकी है। इसलिए आरोपों को अंतिम रूप से प्रमाणित नहीं माना जा सकता।
ग्रामीणों ने मांग की है कि जांच में शिकायत सही मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। यदि केंद्र के संचालन में कर्मचारियों के बीच समन्वय की समस्या है तो विभागीय अधिकारियों को हस्तक्षेप करके व्यवस्था सुधारनी चाहिए। बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्र की सभी सेवाएं नियमित रूप से मिलें, इसके लिए आवश्यक निर्देश जारी करने और लगातार निगरानी की भी जरूरत है।
