वन विभाग में निर्माण कार्य दिलाने के नाम पर वसूली का आरोप, वनरक्षक ने किया इनकार
भोपाली बीट में करीब 22 लाख रुपये के निर्माण कार्य का मामला; शिकायतकर्ताओं का दावा—काम दिलाने का भरोसा देकर लिए गए 15 हजार रुपये
रिपोर्ट: संदीप तायड़े, स्वराज वाणी, सारनी/घोड़ाडोंगरी
सारनी/घोड़ाडोंगरी। उत्तर वन मंडल की रानीपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत भोपाली बीट में हुए निर्माण कार्यों को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। डांगवा बीट में पदस्थ बताए जा रहे वनरक्षक कन्हैयालाल डोंगरे पर कुछ ठेकेदारों ने निर्माण कार्य दिलाने का आश्वासन देकर 15 हजार रुपये लेने का आरोप लगाया है। हालांकि, वनरक्षक ने इन आरोपों से स्पष्ट रूप से इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने किसी भी ठेकेदार से कार्य दिलाने के बदले कोई राशि नहीं ली है।
मामला दिसंबर 2025 में भोपाली बीट में प्रस्तावित रपटा, कुआं और विश्राम भवन के निर्माण से जुड़ा बताया जा रहा है। इन कार्यों की अनुमानित लागत करीब 22 लाख रुपये बताई गई है। आरोप है कि वनरक्षक ने इसी निर्माण कार्य को दिलाने का भरोसा देकर संबंधित लोगों से अलग-अलग समय पर रुपये लिए। दूसरी ओर विभागीय अधिकारी का कहना है कि निर्माण कार्य वन विभाग ने स्वयं कराया था और किसी निजी ठेकेदार को नहीं दिया गया था।
22 लाख रुपये के निर्माण कार्य का दिया गया कथित आश्वासन
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रानीपुर वन परिक्षेत्र की भोपाली बीट में रपटा, कुआं और विश्राम भवन का निर्माण कराया जाना था। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि वनरक्षक कन्हैयालाल डोंगरे ने उन्हें बताया कि इन कार्यों की कुल लागत करीब 22 लाख रुपये है और वह विभागीय स्तर पर बात करके उन्हें यह काम दिला सकता है।
आरोप लगाने वाले पक्ष का कहना है कि काम मिलने की उम्मीद में उन्होंने वनरक्षक की बात पर विश्वास किया। इसके बाद उनसे कथित रूप से 15 हजार रुपये लिए गए। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि राशि देने के बावजूद उन्हें न तो कोई कार्यादेश मिला और न ही संबंधित निर्माण कार्य करने का अवसर दिया गया।
इस मामले में यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि यदि संबंधित वनरक्षक की पदस्थापना दूसरी बीट में थी तो उसने भोपाली बीट में निर्माण कार्य दिलाने का आश्वासन किस आधार पर दिया। हालांकि, इस संबंध में विभागीय जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
वन कार्यालय बुलाकर भरोसा दिलाने का आरोप
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि उन्हें पहले रानीपुर वन कार्यालय के पास बुलाया गया। वहां विभागीय वातावरण और अधिकारियों से संपर्क होने का आभास देकर उनका विश्वास जीतने का प्रयास किया गया। आरोपों के मुताबिक, वनरक्षक कार्यालय में अधिकारियों के कक्ष में जाकर किसी अन्य विषय पर बातचीत करता था और बाहर आने के बाद ठेकेदारों से कहता था कि अधिकारियों ने निर्माण कार्य देने पर सहमति जता दी है।
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि उन्हें निर्माण स्थल देखने के लिए भी भेजा गया था। उनसे कथित तौर पर कहा गया कि वे केवल स्थल का निरीक्षण करके लौट आएं और वहां किसी अन्य व्यक्ति से इस संबंध में चर्चा न करें। साइट देखने के बाद उन्हें काम मिलना लगभग तय होने का विश्वास दिलाया गया। इसी भरोसे के आधार पर शेष राशि लिए जाने का आरोप लगाया गया है।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। यह भी स्पष्ट नहीं हुआ है कि कथित राशि किस तारीख को, किस माध्यम से और किन लोगों की मौजूदगी में दी गई थी। किसी लिखित समझौते, रसीद अथवा बैंक लेन-देन का विवरण भी उपलब्ध नहीं कराया गया है।
काम नहीं मिलने पर दूसरी जगह काम दिलाने का दावा
आरोप लगाने वाले पक्ष के अनुसार, जब काफी समय बीतने के बाद भी उन्हें निर्माण कार्य नहीं मिला तो उन्होंने वनरक्षक से संपर्क कर जवाब मांगा। इस पर कथित रूप से कहा गया कि भोपाली बीट के निर्माण कार्य को लेकर उच्च स्तर पर शिकायत हो गई है, इसलिए फिलहाल वह काम नहीं दिया जा सकता।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इसके बाद उन्हें किसी अन्य स्थान पर काम दिलाने का भरोसा दिया गया, लेकिन वह वादा भी पूरा नहीं हुआ। लगातार आश्वासन मिलने के बाद जब कोई काम नहीं मिला, तब उन्हें अपने साथ कथित ठगी होने का संदेह हुआ।
मामला सामने आने के बाद वन विभाग की निर्माण कार्य आवंटन प्रक्रिया, निगरानी व्यवस्था और कर्मचारियों की जवाबदेही को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। यदि विभागीय निर्माण कार्य किसी ठेकेदार को दिया ही नहीं जाना था, तो शिकायतकर्ताओं को काम दिलाने का आश्वासन किसने और क्यों दिया—यह जांच का विषय है।
विभाग ने स्वयं कराया निर्माण कार्य
भोपाली बीट के उपवन क्षेत्रपाल एच.एस. काजदे ने बताया कि उन्हें यहां पदस्थ हुए करीब एक वर्ष हुआ है। भोपाली बीट में रपटा, कुआं और विश्राम भवन का निर्माण हुआ है, जिसकी लागत लगभग 22 लाख रुपये हो सकती है। उनके अनुसार, यह निर्माण कार्य वन विभाग द्वारा कराया गया था और किसी निजी ठेकेदार को नहीं दिया गया था।
अधिकारी के इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि संबंधित निर्माण कार्य विभागीय स्तर पर कराया गया। ऐसे में ठेकेदारों को काम दिलाने के कथित आश्वासन और पैसे लेने के आरोपों की जांच आवश्यक मानी जा रही है।
वनरक्षक ने आरोपों को बताया निराधार
वनरक्षक कन्हैयालाल डोंगरे ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि उन्होंने कार्य दिलाने के बदले किसी भी ठेकेदार से कोई पैसा नहीं लिया। इस प्रकार मामले में आरोप लगाने वाले पक्ष और संबंधित वनरक्षक के बयान एक-दूसरे से अलग हैं।
फिलहाल वन विभाग की ओर से किसी औपचारिक जांच अथवा अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। निष्पक्ष जांच में कथित भुगतान से जुड़े साक्ष्य, संबंधित व्यक्तियों के बयान, कॉल विवरण, उपलब्ध दस्तावेज और निर्माण कार्य की विभागीय प्रक्रिया की जांच की जा सकती है।
निष्पक्ष जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई
यह मामला फिलहाल आरोप और प्रत्यारोप के स्तर पर है। वनरक्षक के खिलाफ लगाए गए आरोप जांच में प्रमाणित नहीं हुए हैं और संबंधित कर्मचारी ने उनसे इनकार किया है। ऐसे में बिना विभागीय जांच के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
अब निगाहें वन विभाग के उच्च अधिकारियों पर हैं। यदि शिकायत औपचारिक रूप से प्राप्त होती है तो पारदर्शी जांच कर वास्तविक तथ्यों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए। आरोप सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई और निराधार मिलने पर संबंधित कर्मचारी की स्थिति स्पष्ट करना आवश्यक होगा।
इनका कहना है
“मुझे यहां आए एक वर्ष हुआ है। भोपाली बीट में रपटा, कुआं और विश्राम भवन का निर्माण हुआ है, जिसकी लागत लगभग 22 लाख रुपये होगी। निर्माण कार्य वन विभाग द्वारा कराया गया है और किसी ठेकेदार को नहीं दिया गया था।”
— एच.एस. काजदे, उपवन क्षेत्रपाल, भोपाली बीट, उत्तर वन मंडल परिक्षेत्र रानीपुर
“मेरे द्वारा कार्य दिलाने के एवज में किसी भी ठेकेदार से पैसे नहीं लिए गए हैं।”
— कन्हैयालाल डोंगरे, वनरक्षक, उत्तर वन मंडल परिक्षेत्र रानीपुर
