आर्यिका संगममति माताजी के ससंघ सानिध्य में सिहोनियां महोत्सव पत्रिका का विमोचन
28 सितंबर को वार्षिक मेला एवं महामस्तकाभिषेक महोत्सव, श्रद्धालुओं से अधिकाधिक सहभागिता का आह्वान
संवाददाता; मनोज जैन नायक
मुरैना/अम्बाह। जैन समाज के प्रमुख तीर्थ एवं ऐतिहासिक अतिशय क्षेत्र सिहोनियां में आगामी 28 सितंबर, सोमवार को आयोजित होने वाले वार्षिक मेले एवं महामस्तकाभिषेक महोत्सव की तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में महोत्सव की मांगलिक कार्यक्रम पत्रिका का विमोचन बुधवार को जैन बगीची, अम्बाह में किया गया।
पत्रिका का विमोचन आचार्यश्री सिद्धांत सागर महाराज की शिष्या गुरुमां आर्यिका रत्न 105 श्री संगममति माताजी ससंघ के पावन सानिध्य में हुआ। कार्यक्रम में अतिशय क्षेत्र सिहोनियां कमेटी के पदाधिकारी एवं सदस्य सहित अम्बाह जैन समाज के बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
माताजी से प्राप्त किया मंगल आशीर्वाद
महोत्सव पत्रिका के विमोचन अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने आर्यिका संगममति माताजी के दर्शन कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। धार्मिक वातावरण में आयोजित कार्यक्रम के दौरान भगवान के जयकारे लगाए गए और आगामी आयोजन की सफलता की कामना की गई।
इस दौरान 28 सितंबर को होने वाले वार्षिक मेले एवं महामस्तकाभिषेक महोत्सव की तैयारियों को लेकर भी चर्चा की गई। कमेटी के सदस्यों ने आयोजन के विभिन्न पक्षों पर विचार करते हुए इसे व्यवस्थित और भव्य तरीके से संपन्न कराने का संकल्प लिया। समाज के लोगों ने महोत्सव की जानकारी अधिक से अधिक श्रद्धालुओं तक पहुंचाने और आयोजन में व्यापक सहभागिता सुनिश्चित करने का निर्णय लिया।
प्राचीन प्रतिमाओं का होगा महामस्तकाभिषेक
वार्षिक मेले के दौरान भगवान शांतिनाथ, कुंथुनाथ एवं अरहनाथ स्वामी की प्राचीन प्रतिमाओं का विधि-विधान के साथ महामस्तकाभिषेक किया जाएगा। यह धार्मिक आयोजन आर्यिका रत्न 105 श्री संगममति माताजी ससंघ के पावन सानिध्य में संपन्न होगा।
महामस्तकाभिषेक के साथ विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, पूजन और मांगलिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आयोजन में स्थानीय क्षेत्र के साथ देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। कमेटी द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधाओं और धार्मिक कार्यक्रमों के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं।
जैन समाज का प्रमुख तीर्थ है सिहोनियां
अतिशय क्षेत्र सिहोनियां मुरैना जिला मुख्यालय से करीब 33 किलोमीटर दूर स्थित है। यह जैन समाज का प्रमुख धार्मिक तीर्थ और ऐतिहासिक अतिशय क्षेत्र माना जाता है। यहां भगवान शांतिनाथ, भगवान कुंथुनाथ और भगवान अरहनाथ स्वामी की अति प्राचीन पाषाण प्रतिमाएं विराजमान हैं।
उपलब्ध ऐतिहासिक और पुरातात्विक विवरणों के अनुसार इन प्रतिमाओं का इतिहास कई शताब्दियों पुराना माना जाता है। अपनी प्राचीनता, भव्यता और धार्मिक महत्व के कारण यह क्षेत्र जैन श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है। प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन, पूजन और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने के लिए पहुंचते हैं।
16 फुट ऊंची है भगवान शांतिनाथ की प्रतिमा
अतिशय क्षेत्र के मुख्य मंदिर में भगवान शांतिनाथ स्वामी की लगभग 16 फुट ऊंची भव्य प्रतिमा विराजमान है, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण और आस्था का प्रमुख केंद्र है। इसके अतिरिक्त भगवान कुंथुनाथ एवं भगवान अरहनाथ स्वामी की लगभग 11-11 फुट ऊंची विशाल पाषाण प्रतिमाएं भी यहां विराजित हैं।
इन प्राचीन प्रतिमाओं की कलात्मकता और विशाल स्वरूप श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित करते हैं। क्षेत्र में प्रतिमाओं के प्राकट्य से जुड़ी विभिन्न धार्मिक मान्यताएं भी प्रचलित हैं। इन्हीं मान्यताओं और मंदिर के धार्मिक महत्व के कारण सिहोनियां को अतिशय क्षेत्र के रूप में विशेष पहचान प्राप्त है।
तैयारियों में जुटी आयोजन कमेटी
अतिशय क्षेत्र सिहोनियां कमेटी वार्षिक मेले और महामस्तकाभिषेक महोत्सव को व्यवस्थित रूप से संपन्न कराने की तैयारियों में जुटी हुई है। आयोजन के दौरान धार्मिक कार्यक्रमों के साथ श्रद्धालुओं के आगमन, दर्शन और पूजन से संबंधित व्यवस्थाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
पत्रिका विमोचन कार्यक्रम में टिल्लू जैन, विवेक जैन, नीलेश जैन, संजय जैन, रवि जैन, उमेश जैन, संजू जैन, पिंटू जैन, मुकेश जैन, अनिल जैन, कुशांक जैन और राजीव जैन सिहोनियां सहित कमेटी के सदस्य तथा अम्बाह जैन समाज के श्रद्धालु उपस्थित रहे।
श्रद्धालुओं से धर्मलाभ लेने की अपील
कमेटी ने अम्बाह, मुरैना सहित देशभर के जैन समाज और श्रद्धालुओं से 28 सितंबर को आयोजित वार्षिक मेले एवं महामस्तकाभिषेक महोत्सव में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने की अपील की है। कमेटी ने कहा कि श्रद्धालु धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेकर पुण्यार्जन एवं धर्मलाभ प्राप्त करें और आयोजन को सफल बनाने में सहयोग प्रदान करें।
