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नुकीले दांत से गाल में बार-बार घाव हो तो न करें नजरअंदाज, संक्रमण से बढ़ सकती हैं स्वास्थ्य समस्याएं

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Published On: 17 September 2026

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नुकीले दांत से गाल में बार-बार घाव हो तो न करें नजरअंदाज, संक्रमण से बढ़ सकती हैं स्वास्थ्य समस्याएं

मुंह का घाव तीन सप्ताह में ठीक न हो तो दंत चिकित्सक से कराएं जांच, कुछ लोगों में रक्त के रास्ते हृदय तक पहुंच सकते हैं बैक्टीरिया

भोपाल। दांतों की सेहत का संबंध केवल मुंह तक सीमित नहीं है। नुकीला या टूटा हुआ दांत यदि बार-बार गाल अथवा जीभ को छील रहा है तो इससे लगातार घाव बन सकता है। ऐसे घाव को सामान्य समझकर लंबे समय तक नजरअंदाज करना उचित नहीं है। दंत चिकित्सक से जांच कराकर घाव का कारण दूर कराना जरूरी है।

अधिकांश सामान्य मुंह के छाले एक से दो सप्ताह में ठीक हो जाते हैं। यदि कोई घाव तीन सप्ताह तक बना रहे, बार-बार उसी स्थान पर हो, उसका आकार बढ़ने लगे या उसमें रक्तस्राव होने लगे तो डॉक्टर अथवा दंत चिकित्सक से जांच करानी चाहिए। लंबे समय तक ठीक न होने वाला घाव कभी-कभी किसी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकता है।

नुकीला दांत कैसे बनाता है घाव?

दांत का किनारा टूटने, घिसने, टेढ़ा होने या फिलिंग खराब होने से वह नुकीला हो सकता है। बोलते, चबाते या मुंह की सामान्य गतिविधि के दौरान ऐसा दांत गाल की अंदरूनी त्वचा अथवा जीभ से बार-बार टकराता है।

लगातार रगड़ लगने से प्रभावित स्थान पर लालिमा, सूजन, दर्द और छाला बन सकता है। घाव भरना शुरू होने के बाद भी यदि दांत उसे दोबारा छीलता रहे तो वह पूरी तरह ठीक नहीं हो पाता। यही कारण है कि केवल जेल या घरेलू उपचार लगाने से कुछ समय के लिए राहत मिलने के बावजूद समस्या लौट सकती है।

दंत चिकित्सक दांत के नुकीले हिस्से को चिकना करने, टूटी फिलिंग ठीक करने या जरूरत के अनुसार अन्य उपचार की सलाह दे सकता है।

क्या ऐसा घाव कैंसर बन सकता है?

नुकीले दांत से होने वाला प्रत्येक घाव कैंसर नहीं होता और अधिकांश घाव सामान्य उपचार के बाद ठीक हो जाते हैं। यह कहना भी सही नहीं होगा कि हर पुराना घाव निश्चित रूप से कैंसर में बदल जाएगा। फिर भी किसी घाव का लंबे समय तक ठीक न होना मुंह के कैंसर सहित दूसरी बीमारियों का संभावित संकेत हो सकता है, इसलिए समय पर जांच महत्वपूर्ण है।

ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा के अनुसार, मुंह का कोई छाला तीन सप्ताह से अधिक समय तक बना रहे, सामान्य छालों से अलग दिखाई दे, लाल और अधिक दर्दनाक हो जाए अथवा उसमें रक्तस्राव हो तो डॉक्टर या दंत चिकित्सक को दिखाना चाहिए।

तंबाकू, गुटखा, सुपारी, धूम्रपान और अत्यधिक शराब का सेवन मुंह के कैंसर के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल है। इनका सेवन करने वाले व्यक्ति में लगातार बने घाव की जांच और भी जरूरी हो जाती है।

किन संकेतों को गंभीरता से लें?

मुंह के भीतर होने वाले इन बदलावों को नजरअंदाज न करें—

  • तीन सप्ताह से अधिक समय से बना घाव
  • बार-बार एक ही स्थान पर छाला होना
  • घाव का आकार बढ़ना या किनारे सख्त होना
  • लाल या सफेद रंग का ऐसा धब्बा जो ठीक न हो
  • घाव से खून आना
  • मुंह खोलने, बोलने या निगलने में कठिनाई
  • जीभ या गाल में सुन्नपन
  • गर्दन में गांठ अथवा सूजन
  • बिना कारण दांत का हिलना
  • लगातार बना रहने वाला दर्द

इन लक्षणों का होना कैंसर की पुष्टि नहीं करता, लेकिन कारण जानने के लिए चिकित्सकीय जांच आवश्यक होती है।

मुंह के बैक्टीरिया और हृदय का क्या संबंध है?

मुंह में कई प्रकार के बैक्टीरिया स्वाभाविक रूप से पाए जाते हैं। खराब दंत स्वच्छता, मसूड़ों के गंभीर संक्रमण या कुछ दंत प्रक्रियाओं के दौरान ये बैक्टीरिया कभी-कभी रक्त में प्रवेश कर सकते हैं।

विशेष रूप से कृत्रिम हृदय वाल्व, पहले हो चुके इन्फेक्टिव एंडोकार्डाइटिस या कुछ गंभीर जन्मजात हृदय रोगों वाले मरीजों में बैक्टीरिया से हृदय की अंदरूनी परत या वाल्व में संक्रमण होने का जोखिम अधिक हो सकता है। इस स्थिति को इन्फेक्टिव एंडोकार्डाइटिस कहा जाता है।

हालांकि, सामान्य स्वस्थ व्यक्ति में नुकीले दांत से हुआ हर छोटा घाव सीधे हृदय संक्रमण का कारण नहीं बनता। इसलिए शीर्षक से घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन मुंह में लंबे समय से मौजूद संक्रमण को नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए।

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, अच्छी मौखिक स्वच्छता और नियमित दंत चिकित्सा देखभाल हृदय संक्रमण के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण हैं। कुछ उच्च जोखिम वाले हृदय रोगियों को विशेष दंत प्रक्रिया से पहले डॉक्टर की सलाह पर एंटीबायोटिक दिया जा सकता है।

अपनी मर्जी से एंटीबायोटिक न लें

मुंह के घाव या दांत के संक्रमण में बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक नहीं लेना चाहिए। हर छाले में एंटीबायोटिक की आवश्यकता नहीं होती। गलत दवा लेने से दुष्प्रभाव और एंटीबायोटिक प्रतिरोध की समस्या हो सकती है।

हृदय रोगी भी दंत उपचार से पहले अपनी मर्जी से एंटीबायोटिक न लें। दंत चिकित्सक को अपनी हृदय संबंधी बीमारी, इस्तेमाल की जा रही दवाओं और पूर्व उपचार की जानकारी दें। आवश्यकता होने पर दंत चिकित्सक हृदय रोग विशेषज्ञ से परामर्श कर सकता है।

सही तरीके से चबाना भी जरूरी

स्वस्थ दांत भोजन को छोटे हिस्सों में तोड़ने और अच्छी तरह चबाने में मदद करते हैं। पर्याप्त चबाया हुआ भोजन निगलने और पचाने में अपेक्षाकृत आसान रहता है। दांतों में दर्द, खाली स्थान या ढीले दांत होने से व्यक्ति एक ओर से चबाने लगता है, जिससे दूसरी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

दोनों ओर के दांतों से आराम से चबाना, भोजन के बाद कुल्ला करना और नियमित ब्रश करना मौखिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।

मुंह और दांतों की देखभाल कैसे करें?

दिन में दो बार फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट से ब्रश करें और दांतों के बीच फंसे भोजन को फ्लॉस या चिकित्सक द्वारा सुझाए साधन से साफ करें। अत्यधिक गर्म, तीखे और कठोर भोजन से घाव में जलन बढ़ सकती है।

टूटा या नुकीला दांत, खराब फिलिंग और ठीक से फिट न होने वाला नकली दांत जल्द ठीक कराएं। छह से बारह महीने के अंतराल पर दंत जांच कराना उपयोगी हो सकता है। मधुमेह के मरीजों को रक्त शर्करा नियंत्रित रखने और मसूड़ों की नियमित जांच कराने की विशेष जरूरत होती है।

 

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