Fake IAS Trupti Singh Case: जांच कर रहे ASI और हवलदार लाइन अटैच, रिश्वत मांगने की शिकायत के बाद कार्रवाई
बागसेवनिया थाने के ASI मनोज शर्मा और हवलदार सुनील राठौर को जांच से हटाया, विभागीय स्तर पर शिकायत की जांच शुरू
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में कथित रूप से फर्जी आईएएस अधिकारी बनकर लोगों से धोखाधड़ी करने की आरोपी तृप्ति सिंह से जुड़े मामले में नया मोड़ सामने आया है। इस प्रकरण की जांच कर रहे बागसेवनिया थाने के सहायक उपनिरीक्षक मनोज शर्मा और हवलदार सुनील राठौर को पुलिस लाइन अटैच कर दिया गया है। दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ रिश्वत मांगने की शिकायत मिलने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने यह प्रशासनिक कार्रवाई की है।
इस कार्रवाई के बाद दोनों पुलिसकर्मियों को मामले की जांच से भी हटा दिया गया है। अब प्रकरण की विवेचना दूसरे पुलिस अधिकारी को सौंपे जाने की संभावना है। वहीं, रिश्वत मांगने से संबंधित शिकायत की विभागीय स्तर पर जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट होगी।
रिश्वत मांगने की शिकायत के बाद कार्रवाई
जानकारी के अनुसार फर्जी आईएएस तृप्ति सिंह से जुड़े मामले की विवेचना बागसेवनिया थाने में पदस्थ ASI मनोज शर्मा कर रहे थे। हवलदार सुनील राठौर भी जांच प्रक्रिया में उनके साथ जुड़े हुए थे। इसी दौरान दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ रिश्वत मांगने से संबंधित शिकायत वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंची।
मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों को तत्काल प्रभाव से लाइन अटैच करने का निर्णय लिया गया। लाइन अटैच किए जाने के बाद अब वे थाने में नियमित जिम्मेदारी और इस प्रकरण की जांच से अलग रहेंगे।
हालांकि, रिश्वत मांगने के आरोप अभी जांच के अधीन हैं। शिकायत की पुष्टि होने से पहले दोनों पुलिसकर्मियों को दोषी नहीं माना जा सकता। पुलिस विभाग द्वारा की गई लाइन अटैच की कार्रवाई प्रशासनिक प्रकृति की है, ताकि आरोपों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके।
क्या होता है लाइन अटैच?
पुलिस विभाग में किसी कर्मचारी को लाइन अटैच किए जाने का अर्थ है कि उसे उसके वर्तमान थाने या पदस्थापना से हटाकर पुलिस लाइन में भेज दिया गया है। यह कार्रवाई अक्सर किसी शिकायत, विवाद अथवा विभागीय जांच के दौरान की जाती है।
लाइन अटैच किया जाना निलंबन या आरोप सिद्ध होना नहीं है। संबंधित पुलिसकर्मी सेवा में बने रहते हैं, लेकिन उनसे थाने की जिम्मेदारी अथवा किसी संवेदनशील मामले की जांच वापस ली जा सकती है। शिकायत की जांच पूरी होने के बाद विभाग उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करता है।
तृप्ति सिंह पर क्या हैं आरोप?
तृप्ति सिंह पर कथित रूप से स्वयं को भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी बताकर लोगों को प्रभावित करने और उनसे धोखाधड़ी करने के आरोप हैं। पुलिस के अनुसार वह कथित तौर पर स्वयं को मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग में पदस्थ आईएएस अधिकारी के रूप में प्रस्तुत करती थी।
उससे संबंधित वीडियो और तस्वीरों में सरकारी कार्यालयों तथा महत्वपूर्ण स्थानों की मौजूदगी का दावा किया गया। आरोप है कि इन माध्यमों से वह लोगों के बीच अपनी पहचान एक वरिष्ठ अधिकारी के रूप में स्थापित करने का प्रयास करती थी। हालांकि, इन सभी आरोपों की जांच पुलिस और संबंधित एजेंसियों द्वारा की जा रही है।
मामला सामने आने के बाद तृप्ति सिंह से जुड़े कथित आर्थिक लेनदेन, दस्तावेज, संपर्क और अन्य गतिविधियां जांच के दायरे में लाई गईं। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित फर्जी पहचान का उपयोग किन-किन लोगों को प्रभावित करने और किन उद्देश्यों के लिए किया गया था। मामले में पहले कई शिकायतें और प्रकरण सामने आने की बात भी रिपोर्ट की गई है। में भी पुलिस के हवाले से महिला द्वारा कथित फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर लोगों से पैसे लेने का उल्लेख किया गया था।
जांच अधिकारियों पर आरोप से बढ़ी मामले की गंभीरता
पहले से ही चर्चित इस प्रकरण की जांच कर रहे पुलिसकर्मियों पर रिश्वत मांगने की शिकायत सामने आने से मामला और गंभीर हो गया है। किसी आपराधिक प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए विवेचना अधिकारी की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में जांच से जुड़े अधिकारी पर शिकायत आने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा उन्हें जांच से अलग करना प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने का प्रयास माना जा रहा है।
अब विभागीय जांच में यह देखा जाएगा कि शिकायत किसने की, उसमें लगाए गए आरोपों का आधार क्या है और क्या शिकायत से संबंधित कोई रिकॉर्ड, बातचीत, दस्तावेज अथवा अन्य साक्ष्य उपलब्ध हैं। दोनों पुलिसकर्मियों का पक्ष भी जांच के दौरान लिया जाएगा।
नए अधिकारी को सौंपी जा सकती है जांच
ASI मनोज शर्मा और हवलदार सुनील राठौर को लाइन अटैच किए जाने के बाद तृप्ति सिंह से जुड़े मामले की जांच किसी अन्य अधिकारी को सौंपी जा सकती है। नए विवेचना अधिकारी द्वारा अब तक की जांच, दर्ज बयान, जब्त दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण किया जाएगा।
पुलिस के सामने कथित फर्जी पहचान से जुड़े पूरे नेटवर्क का पता लगाने की चुनौती भी है। जांच में यह देखा जाना है कि आरोपी ने किन लोगों से संपर्क किया, किस प्रकार का लाभ प्राप्त किया और क्या इस मामले में अन्य लोग भी शामिल थे।
विभागीय जांच के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई
लाइन अटैच किए गए पुलिसकर्मियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई शिकायत की जांच के परिणाम पर निर्भर करेगी। यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो विभागीय नियमों और कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है। यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं तो विभाग उस आधार पर निर्णय लेगा।
फिलहाल इस मामले में दो अलग-अलग जांच महत्वपूर्ण हो गई हैं। पहली जांच तृप्ति सिंह के खिलाफ कथित फर्जी आईएएस पहचान और धोखाधड़ी के आरोपों की है। दूसरी जांच उन पुलिसकर्मियों के खिलाफ शिकायत की है, जो इस प्रकरण की विवेचना से जुड़े हुए थे।
पुलिस विभाग की ओर से अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद ही रिश्वत मांगने के आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। तब तक पूरे मामले को शिकायत और जांच के स्तर पर ही देखा जाना चाहिए।
