Ladli Behna Yojana: क्या मध्यप्रदेश में बंद होगी लाड़ली बहना योजना? हाईकोर्ट ने सरकार से 30 दिन में मांगा जवाब
ग्वालियर खंडपीठ ने राज्य सरकार को जारी किया नोटिस, योजना से संबंधित रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश; फिलहाल योजना बंद करने का कोई आदेश नहीं
ग्वालियर। मध्यप्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने योजना से संबंधित मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने सरकार को चार सप्ताह यानी करीब 30 दिन के भीतर जवाब प्रस्तुत करने और योजना से संबंधित आवश्यक रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के लिए कहा है।
हाईकोर्ट के नोटिस के बाद सोशल मीडिया पर लाड़ली बहना योजना के बंद होने को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अदालत ने अभी योजना बंद करने का कोई आदेश नहीं दिया है। हाईकोर्ट ने फिलहाल राज्य सरकार से जवाब और रिकॉर्ड मांगा है। मामले पर अगला निर्णय सरकार का पक्ष सामने आने और आगे की सुनवाई के बाद ही हो सकता है।
हाईकोर्ट ने सरकार से क्या मांगा?
प्राप्त जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने लाड़ली बहना योजना से जुड़े मामले में राज्य सरकार को अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं। सरकार को चार सप्ताह का समय देते हुए योजना से संबंधित पूरा रिकॉर्ड न्यायालय के सामने प्रस्तुत करने को कहा गया है।
अदालत द्वारा नोटिस जारी किए जाने का अर्थ यह है कि वह मामले में सरकार का पक्ष और संबंधित दस्तावेज देखना चाहती है। सरकार की ओर से जवाब दाखिल होने के बाद याचिकाकर्ता के तर्कों और शासकीय रिकॉर्ड के आधार पर आगे की सुनवाई होगी। इसके बाद ही अदालत कोई टिप्पणी या आदेश जारी कर सकती है।
क्या बंद होने वाली है लाड़ली बहना योजना?
फिलहाल लाड़ली बहना योजना बंद होने की बात सही नहीं है। हाईकोर्ट ने योजना पर रोक नहीं लगाई है और न ही इसे समाप्त करने का आदेश दिया है। केवल नोटिस जारी होने और रिकॉर्ड मांगे जाने को योजना बंद होने का निर्णय नहीं माना जा सकता।
जब किसी सरकारी नीति या योजना से संबंधित मामला अदालत के सामने आता है, तो न्यायालय संबंधित विभाग अथवा सरकार से जवाब मांग सकता है। यह न्यायिक प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है। सरकार द्वारा जवाब प्रस्तुत किए जाने के बाद ही अदालत तय करती है कि मामले में आगे किसी प्रकार के हस्तक्षेप की आवश्यकता है या नहीं।
इसलिए योजना का लाभ प्राप्त कर रही महिलाओं को भ्रामक सोशल मीडिया संदेशों से सावधान रहना चाहिए। उन्हें योजना की किस्त, पात्रता या भविष्य से संबंधित जानकारी केवल मध्यप्रदेश सरकार के अधिकृत पोर्टल और आधिकारिक घोषणाओं से ही प्राप्त करनी चाहिए।
सरकार को 30 दिन में देना होगा जवाब
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को करीब 30 दिन का समय दिया है। इस अवधि में सरकार को योजना से संबंधित रिकॉर्ड और अपना जवाब अदालत में प्रस्तुत करना होगा। सरकार के जवाब से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि योजना का संचालन किन नियमों के तहत किया जा रहा है, लाभार्थियों की पात्रता किस आधार पर तय की गई और योजना से जुड़े प्रशासनिक निर्णय कैसे लिए गए।
रिकॉर्ड प्रस्तुत होने के बाद न्यायालय मामले के तथ्यों की समीक्षा करेगा। अगली सुनवाई में सरकार और याचिकाकर्ता, दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जा सकती हैं। इसलिए इस चरण पर अदालत के संभावित अंतिम फैसले को लेकर कोई निश्चित दावा करना उचित नहीं होगा।
महिलाओं को आर्थिक सहायता देना योजना का उद्देश्य
मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना मध्यप्रदेश की महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। योजना का प्रमुख लक्ष्य महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना, परिवार के महत्वपूर्ण निर्णयों में उनकी भूमिका बढ़ाना और दैनिक आवश्यकताओं के लिए उन्हें वित्तीय सहयोग प्रदान करना है।
योजना के अंतर्गत पात्र महिलाओं के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी डीबीटी के माध्यम से राशि भेजी जाती है। प्रदेश की बड़ी संख्या में महिलाएं इस योजना का लाभ प्राप्त कर रही हैं। घरेलू खर्च, बच्चों की जरूरत, स्वास्थ्य, पोषण और छोटी बचत जैसे कार्यों में इस सहायता राशि का उपयोग किया जाता है।
प्रदेश की राजनीति में भी यह योजना काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। सरकार समय-समय पर योजना की किस्त और लाभार्थियों से संबंधित जानकारी जारी करती रही है।
पहले भी हाईकोर्ट पहुंच चुका है मामला
लाड़ली बहना योजना को लेकर पहले भी मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की जा चुकी है। फरवरी 2026 में योजना के अंतर्गत नए पंजीयन शुरू कराने की मांग से संबंधित एक याचिका पर अदालत ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। न्यायालय ने सरकारी योजनाओं की पात्रता और उनके संचालन से जुड़े नीतिगत निर्णयों को सरकार के अधिकार क्षेत्र का विषय माना था।
वर्तमान मामला उस पूर्व मामले से अलग बताया जा रहा है। इस बार ग्वालियर खंडपीठ ने सरकार से जवाब और योजना से संबंधित रिकॉर्ड मांगा है। इसलिए दोनों मामलों को आपस में जोड़कर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
नोटिस जारी होने का क्या अर्थ है?
कानूनी प्रक्रिया में नोटिस जारी होने का अर्थ किसी पक्ष को दोषी ठहराना या योजना को अवैध घोषित करना नहीं होता। नोटिस के माध्यम से संबंधित पक्ष को अपना जवाब और तथ्य न्यायालय के सामने रखने का अवसर दिया जाता है।
इस मामले में भी हाईकोर्ट ने अभी कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। योजना जारी रहेगी या उसके नियमों में किसी प्रकार का बदलाव होगा, यह आने वाली सुनवाई और सरकार के जवाब पर निर्भर करेगा। जब तक अदालत अथवा राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं होता, तब तक योजना बंद होने की खबरों पर विश्वास नहीं किया जाना चाहिए।
लाभार्थी महिलाएं अफवाहों से रहें सावधान
हाईकोर्ट के नोटिस के बाद सोशल मीडिया पर अधूरी या भ्रामक जानकारी प्रसारित होने की आशंका है। लाभार्थी महिलाओं को किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने, बैंक खाते की जानकारी साझा करने या किस्त जारी कराने के नाम पर पैसे देने से बचना चाहिए।
योजना से संबंधित भुगतान और आवेदन की स्थिति आधिकारिक सरकारी माध्यम से ही जांची जानी चाहिए। किसी भी बदलाव की स्थिति में महिला एवं बाल विकास विभाग अथवा मध्यप्रदेश सरकार द्वारा अधिकृत सूचना जारी की जाएगी।
फिलहाल लाड़ली बहना योजना को बंद करने का कोई न्यायिक आदेश सामने नहीं आया है। हाईकोर्ट ने केवल राज्य सरकार से 30 दिन के भीतर जवाब और संबंधित रिकॉर्ड मांगा है। सरकार का पक्ष आने के बाद मामले की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
