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Shajapur की कृतिका शाहा ने पूर्ण किया कठिन सिद्धि तप, जैन समाज ने की अनुमोदना

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Published On: 17 September 2026
Shajapur
— Jain Community in Shajapur Commends Kritika Shaha for Completing Siddhi Tap

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Shajapur की कृतिका शाहा ने पूर्ण किया सिद्धि तप, जैन समाज ने की अनुमोदना

धर्म, संयम और आत्मसाधना का प्रेरणादायी प्रसंग

Shajapur । धर्म, तप, संयम और आत्मसाधना से जुड़ा एक प्रेरणादायी प्रसंग सामने आया है। शाजापुर की धर्मनिष्ठ सुपुत्री एवं श्री विनोद कुमार जी श्रीमाल की सुपुत्री श्रीमती कृतिका शाहा (डिम्पी जी) ने जैन धर्म की उत्कृष्ट एवं कठिन तप आराधना सिद्धि तप को पूर्ण किया है। उनकी इस तपस्या को लेकर जैन समाज में हर्ष और आध्यात्मिक उत्साह का वातावरण है।

श्रद्धा और संयम के साथ पूर्ण की तप आराधना

सिद्धि तप जैसी कठिन आराधना को श्रद्धा, संयम, त्याग और साधना भाव के साथ पूर्ण करना धर्मनिष्ठा एवं आत्मसाधना का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है। कृतिका शाहा ने इस तप आराधना के माध्यम से आत्मकल्याण, संयम और कर्मनिर्जरा के पावन मार्ग पर आगे बढ़ने का पुरुषार्थ किया।

उनकी इस साधना को शाजापुर जैन समाज सहित स्वराज वाणी न्यूज़, शाजापुर ब्यूरो परिवार की ओर से हृदयपूर्वक अनुमोदित किया गया है। समाजजनों ने उनके तप, त्याग और संयम की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल आध्यात्मिक जीवन के लिए मंगलकामनाएं व्यक्त कीं।

आत्मसाधना और कर्मनिर्जरा की भावना

जैन धर्म में तप का उद्देश्य केवल शारीरिक कष्ट सहना नहीं, बल्कि आत्मसंयम, त्याग, आत्मचिंतन और कर्मनिर्जरा की भावना को दृढ़ करना माना जाता है। तपस्या के माध्यम से साधक सांसारिक सुख-सुविधाओं एवं विषयों के प्रति आसक्ति को कम करते हुए आत्मिक उन्नति की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास करता है।

सिद्धि तप को भी इसी आध्यात्मिक भावना से जुड़ी महत्वपूर्ण तप आराधना माना जाता है। इसके माध्यम से साधक अपने जीवन में अनुशासन, धैर्य, संयम और धर्म के प्रति समर्पण को मजबूत करने का प्रयास करता है।

सिद्धि तप का आध्यात्मिक महत्व

जैन दर्शन में तप को आत्मकल्याण और मोक्षमार्ग की साधना का महत्वपूर्ण अंग माना गया है। तपस्या से संबंधित प्रमुख आध्यात्मिक भावनाओं में कर्मनिर्जरा, संयम एवं त्याग, आत्मशुद्धि, धर्म के प्रति दृढ़ता और आत्मकल्याण शामिल हैं।

सरल शब्दों में कहा जाए तो सिद्धि तप साधक को बाहरी सुख-सुविधाओं से ऊपर उठकर संयम, त्याग, तप और आत्मचिंतन के माध्यम से आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में पुरुषार्थ करने की प्रेरणा देता है।

समाज की ओर से मंगलकामनाएं

कृतिका शाहा की तप आराधना की अनुमोदना करते हुए समाजजनों ने मंगल भावना व्यक्त की कि उनके जीवन में सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चारित्र की भावना निरंतर दृढ़ होती रहे। आत्मसाधना के पथ पर उनका पुरुषार्थ निरंतर बढ़े तथा जिनवाणी और जिनशासन के प्रति उनकी श्रद्धा एवं भक्ति सदैव बनी रहे।

तपस्या की अनुमोदना, धर्माराधना की अनुमोदना, संयम एवं त्याग की अनुमोदना तथा आत्मकल्याण की मंगल भावना के साथ समाजजनों ने उन्हें हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

जय जिनेन्द्र।
जय अहो जिणाणं।
जय जिनशासन।

स्वराज वाणी न्यूज़ | शाजापुर
चंद्रेश जैन — ब्यूरो चीफ, स्वराज वाणी शाजापुर

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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