एक बिखरा परिवार, बदला एक औरत का संसार; ‘Haq’ का वर्ल्ड टेलीविज़न प्रीमियर 20 सितंबर को
इमरान हाशमी और यामी गौतम धर स्टारर ‘हक़’ अब टेलीविज़न पर, शनिवार रात 8 बजे एंड पिक्चर्स पर होगा प्रसारण
मुंबई, सितंबर 2026। रिश्तों, परिवार, विश्वास और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने की कहानी कहने वाली फिल्म ‘Haq’ अब टेलीविज़न दर्शकों तक पहुंचने जा रही है। इमरान हाशमी और यामी गौतम धर अभिनीत इस इमोशनल ड्रामा का वर्ल्ड टेलीविज़न प्रीमियर शनिवार, 20 सितंबर को रात 8 बजे एंड पिक्चर्स पर किया जाएगा।
सुपर्ण एस. वर्मा के निर्देशन में बनी यह फिल्म एक ऐसे परिवार की कहानी सामने रखती है, जिसकी पूरी दुनिया तब बदल जाती है जब पति अपने जीवन में दूसरी पत्नी को लेकर आता है। पति-पत्नी के रिश्ते में आए इस बदलाव का असर केवल उनके वैवाहिक जीवन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे परिवार और बच्चों की जिंदगी को प्रभावित करता है।
फिल्म की कहानी उस महिला के सफर को केंद्र में रखती है, जो अचानक बदली परिस्थितियों के बीच खुद को एक ऐसे मोड़ पर पाती है, जहां उसे अपने अस्तित्व, अधिकारों और भविष्य के बारे में नए सिरे से सोचना पड़ता है। परिस्थितियां चाहे जितनी कठिन हों, वह अपने और अपने बच्चों के लिए आवाज उठाने का फैसला करती है।
परिवार के बिखरने के बाद शुरू होती है खुद को तलाशने की कहानी
‘हक़’ की कहानी सिर्फ एक परिवार में पैदा हुए तनाव या रिश्तों के टूटने तक सीमित नहीं है। यह उस मानसिक और भावनात्मक सफर को भी सामने लाती है, जिसमें एक महिला अपने जीवन के फैसलों को लेकर दोबारा सोचती है।
फिल्म में एक घर, एक शादी और एक परिवार के बदलते समीकरणों के बीच मुख्य किरदार की सोच भी बदलती दिखाई देती है। शुरुआत में जिस महिला की दुनिया परिवार और रिश्तों के इर्द-गिर्द घूमती है, वह परिस्थितियों के बदलने के बाद अपने लिए खड़े होने का फैसला करती है।
कहानी का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जब उसे लगता है कि उसके सामने सभी रास्ते बंद हो चुके हैं, तब वह खुद नए रास्ते तलाशने की कोशिश करती है। यही बदलाव फिल्म के भावनात्मक पक्ष को मजबूत करता है।
यामी गौतम धर निभा रहीं केंद्रीय भूमिका
फिल्म में यामी गौतम धर मुख्य भूमिका में हैं। कहानी का बड़ा हिस्सा उनके किरदार के संघर्ष, भावनाओं और फैसलों के इर्द-गिर्द आगे बढ़ता है। फिल्म में उनका किरदार एक ऐसी महिला का है, जो परिस्थितियों के सामने टूटने के बजाय धीरे-धीरे अपनी आवाज तलाशती है।
यामी के मुताबिक, जब उन्होंने पहली बार फिल्म की कहानी पढ़ी तो मुख्य किरदार की ताकत और हिम्मत उनके साथ लंबे समय तक बनी रही। उनके लिए यह किरदार केवल मुश्किल परिस्थितियों से जूझने वाली महिला का नहीं, बल्कि अपने विश्वास और फैसलों के लिए खड़े होने वाली महिला का भी है।
यामी ने कहा कि यह कहानी अपनी आवाज तलाशने, अपने विश्वास के लिए खड़े होने और तमाम मुश्किलों के बावजूद अपने फैसले खुद लेने की हिम्मत के बारे में है। उन्होंने उम्मीद जताई कि टेलीविज़न प्रीमियर के जरिए फिल्म की कहानी ज्यादा से ज्यादा दर्शकों तक पहुंचेगी।
इमरान हाशमी के लिए चुनौतीपूर्ण रहा किरदार
फिल्म में इमरान हाशमी एक ऐसे किरदार में दिखाई देते हैं, जिसके फैसले परिवार के भीतर गहरी उथल-पुथल पैदा करते हैं। अभिनेता के अनुसार, उन्हें फिल्म की ओर आकर्षित करने वाली बात केवल इसका कोर्टरूम ड्रामा नहीं थी, बल्कि एक घर के भीतर चलने वाली खामोश तबाही थी।
इमरान ने अपने किरदार को चुनौतीपूर्ण बताते हुए कहा कि ऐसे व्यक्ति की भूमिका निभाना उनके लिए असहज अनुभव था, जो अपने सबसे करीबी लोगों का भरोसा तोड़ देता है, लेकिन खुद भी पूरी तरह अपने किए को स्वीकार नहीं कर पाता।
अभिनेता के मुताबिक, कुछ कहानियों को बड़े पर्दे के शोर की जरूरत होती है, जबकि कुछ कहानियां दर्शकों के घर और परिवार के माहौल में ज्यादा प्रभाव छोड़ती हैं। उन्होंने ‘हक़’ को इसी तरह की कहानी बताया और टेलीविज़न के जरिए इसे परिवारों तक पहुंचने को लेकर खुशी जताई।
रिश्तों और अधिकारों के बीच खड़ी महिला
‘हक़’ की कहानी का केंद्रीय बिंदु एक महिला की बदलती दुनिया है। पति के दूसरी पत्नी को जिंदगी में शामिल करने के बाद उसके सामने कई तरह के सवाल खड़े होते हैं। ऐसे समय में उसे न केवल अपने परिवार के भविष्य के बारे में सोचना पड़ता है, बल्कि खुद की पहचान और अधिकारों को लेकर भी निर्णय लेना पड़ता है।
फिल्म इसी संघर्ष को भावनात्मक तरीके से प्रस्तुत करने की कोशिश करती है। मुख्य किरदार अपने बच्चों के लिए भी खड़ी होती है और अपने जीवन को लेकर फैसले लेने की कोशिश करती है।
कहानी में यह दिखाने का प्रयास किया गया है कि किसी व्यक्ति की जिंदगी में परिस्थितियां चाहे जितना बड़ा बदलाव लेकर आएं, उसके बाद भी आगे बढ़ने के रास्ते तलाशे जा सकते हैं।
महिलाओं से जुड़ी कहानी ने खींचा ध्यान
सिनेमाघरों में रिलीज के बाद ‘हक़’ की कहानी ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। फिल्म की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, विशेष रूप से महिला दर्शकों ने मुख्य किरदार के संघर्ष और उसके भीतर दिखाई गई शांत दृढ़ता को महसूस किया।
फिल्म का उद्देश्य किसी एक रिश्ते या परिवार की कहानी तक सीमित रहने के बजाय उन भावनाओं को सामने लाना है, जिनसे कठिन पारिवारिक परिस्थितियों में गुजरने वाला व्यक्ति सामना करता है।
यामी गौतम धर का किरदार इसी भावनात्मक यात्रा का केंद्र है। वह शुरुआत में परिस्थितियों के बीच उलझी दिखाई देती है, लेकिन कहानी आगे बढ़ने के साथ अपने फैसलों को लेकर अधिक स्पष्ट होती जाती है।
सुपर्ण एस. वर्मा का निर्देशन
‘हक़’ का निर्देशन सुपर्ण एस. वर्मा ने किया है। फिल्म में पारिवारिक रिश्तों के साथ भावनात्मक संघर्ष को कहानी का आधार बनाया गया है। निर्देशन में कहानी के व्यक्तिगत और पारिवारिक दोनों पहलुओं को जगह दी गई है।
फिल्म की कथा एक महिला के जीवन में आए बदलाव के जरिए परिवार, रिश्ते, भरोसा और व्यक्तिगत निर्णय जैसे विषयों को सामने रखती है। यही वजह है कि इसे केवल पारिवारिक ड्रामा के बजाय एक महिला के अपने अस्तित्व और आवाज को दोबारा तलाशने की कहानी के रूप में भी देखा जा सकता है।
टेलीविज़न प्रीमियर से बढ़ेगा दर्शक वर्ग
सिनेमाघरों में रिलीज के बाद अब फिल्म टेलीविज़न के माध्यम से बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचने जा रही है। टीवी प्रीमियर का खास महत्व इसलिए भी है क्योंकि इससे वे दर्शक भी फिल्म देख सकेंगे, जो इसे थिएटर में नहीं देख पाए थे।
‘हक़’ की कहानी परिवार और रिश्तों से जुड़े ऐसे विषयों को सामने लाती है, जिन पर दर्शक अपने स्तर पर अलग-अलग तरह से प्रतिक्रिया दे सकते हैं। टेलीविज़न पर प्रसारण के जरिए फिल्म की पहुंच महानगरों के साथ छोटे शहरों और कस्बों तक भी होने की संभावना है।
एंड पिक्चर्स की ओर से फिल्म को लेकर दर्शकों को इसके टेलीविज़न प्रीमियर के लिए आमंत्रित किया गया है।
इमरान और यामी की जोड़ी पहली बार अलग अंदाज में
इमरान हाशमी और यामी गौतम धर दोनों ही हिंदी सिनेमा में अलग-अलग तरह के किरदारों के लिए जाने जाते हैं। ‘हक़’ में दोनों कलाकारों को एक ऐसे पारिवारिक और भावनात्मक ड्रामा का हिस्सा बनाया गया है, जहां उनके किरदारों के बीच का संबंध कहानी की दिशा तय करता है।
फिल्म में रिश्ते की जटिलता और उससे पैदा होने वाले भावनात्मक संघर्ष को प्रमुखता दी गई है। यही वजह है कि दोनों कलाकारों के किरदार फिल्म की कहानी के केंद्र में बने रहते हैं।
यामी का किरदार जहां अपने जीवन में आए बदलाव के बाद खुद को संभालने और अपने लिए फैसले लेने की कोशिश करता है, वहीं इमरान का किरदार परिवार के भीतर पैदा हुए संकट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनता है।
‘Haq’ की कहानी का मूल संदेश
फिल्म की कहानी का मूल भाव एक ऐसी महिला के संघर्ष से जुड़ा है, जो अपने जीवन में आए बड़े बदलाव के बाद अपनी आवाज और अधिकारों को फिर से हासिल करने की कोशिश करती है।
यह सफर आसान नहीं है। उसे परिवार, रिश्तों और परिस्थितियों से जुड़े कई सवालों का सामना करना पड़ता है। लेकिन कहानी आगे बढ़ते हुए यह दिखाती है कि किसी भी कठिन परिस्थिति में अपने लिए निर्णय लेने का साहस व्यक्ति की जिंदगी की दिशा बदल सकता है।
फिल्म के निर्माताओं के अनुसार, ‘हक़’ का उद्देश्य दर्शकों को केवल एक भावनात्मक कहानी दिखाना नहीं, बल्कि उन्हें इसके किरदारों और उनके संघर्षों से जोड़ना भी है।
20 सितंबर को होगा वर्ल्ड टेलीविज़न प्रीमियर
अब ‘हक़’ का वर्ल्ड टेलीविज़न प्रीमियर शनिवार, 20 सितंबर को रात 8 बजे एंड पिक्चर्स पर होगा। दर्शक इमरान हाशमी और यामी गौतम धर अभिनीत इस भावनात्मक पारिवारिक कहानी को अपने घरों में देख सकेंगे।
एक बिखरते परिवार के बीच अपनी आवाज तलाशने वाली महिला की कहानी के रूप में ‘हक़’ टेलीविज़न दर्शकों के सामने आने जा रही है। फिल्म का केंद्रीय किरदार परिस्थितियों से जूझते हुए अपने और अपने बच्चों के लिए खड़े होने का फैसला करता है और यहीं से उसकी जिंदगी में एक नए सफर की शुरुआत होती है।
देखना न भूलें ‘हक़’ का वर्ल्ड टेलीविज़न प्रीमियर — शनिवार, 20 सितंबर, रात 8 बजे, सिर्फ एंड पिक्चर्स पर।
