*वास्तविक पर्व वही है जो आत्मा को पवित्र करे – पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी*
*नई दिल्ली, 16 सितंबर 2026 | ऋषभोदय तीर्थ*
राजेश जैन दद्दू
पर्वराज पर्युषण महापर्व के पावन अवसर पर “श्रावक संस्कार संयम शिविर” में क्षमा धर्म पर संबोधन करते हुए दिगंबर जैन धर्म के पट्टाचार्य *श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज* ने कहा कि -वास्तविक पर्व वही है जो आत्मा को पवित्र करे। जो कल्याण का मार्ग दिखाए, पुण्य कार्य में प्रेरित करे, वही पुण्य-वर्धक पर्व कहलाता है। पर्व हमें नवीन ऊर्जा प्रदान करते हैं।
महाराज श्री ने कहा – *क्षमा अमृत है, क्षमा शांति का परम द्वार है। क्षमा नीर है, क्रोध महा-अग्नि है।* अग्नि में कोई झुलसना नहीं चाहता। क्रोधी व्यक्ति के सगे-संबंधी भी उसे छोड़ देते हैं। इसलिए क्रोध से बचो, क्षमा धारण करो।
उन्होंने कहा कि क्रोधी, मानी, मायाचारी और लोभी व्यक्ति मृतक सड़े पशु के समान होता है, उसके पास कोई खड़ा नहीं होना चाहता।
*गुरु आशीष की छत्रछाया*
महाराज जी ने कहा – सिर पर टोपी होती है तो वह धूप से बचा लेती है, ऐसे ही *जिसके सिर पर गुरु का आशीष होता है, वह पापों से बच जाता है।* वे ही परिणाम श्रेष्ठ हैं, जो हमें अन्याय से, क्रोध से और पाप से बचा लें।
अर्थ ही अनर्थ की जड़*
महाराज श्री ने चेताया – *क्रोध चंड है, मान चंड है, उनके पास श्वान भी खड़ा नहीं होता।* अर्थ ही अनर्थ कराता है। जो जितना जोड़ेगा, उतना ही अशांति में रहेगा। जितने भी अनर्थ हो रहे हैं, हुए हैं और होंगे, वे सब अर्थ (धन) के कारण ही हुए हैं।
*धर्म में दया क्यों?*
जो दया, करुणा से युक्त है, वही सच्चा धर्म होता है। किसी जीव को मारो मत, दया से मुक्त होकर आत्मा का कल्याण नहीं हो सकता। जो दयाशील होते हैं, वही करुणा को जानकर सच्चा जीवन जीते हैं। *क्षमा महान है, क्षमा ही धर्म है, क्षमा ही स्वभाव है।*
*क्षमा वीरस्य भूषणम्*
*क्षमा वीरों का आभूषण है।* जो क्षमा धारण करता है, वही सच्चा वीर कहलाता है। क्षमा करने में भी विनय और क्षमा भाव होना चाहिए। क्षमा ही शत्रुओं का नाश करती है।
महाराज जी ने पंचाचार धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि पंचेन्द्रियों सहित जो धर्म है, वही सच्चा धर्म है। जो सर्वथा हितोपदेश देता है, शील-संयम और तपस्या में सहायक हो और परस्पर प्रेम बढ़ाता है, वही सच्चा धर्म है। धर्म में पाप होता ही नहीं।
शिविर में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने क्षमा धर्म धारण करने का संकल्प लिया। नमोस्तु शासन जयवंत हो
*- प्रेषक : राजेश जैन दद्दू, प्रचार प्रमुख, ऋषभोदय, दिल्ली*
