पेयजल टंकियों की सफाई पर उठे सवाल, दूषित पानी से बीमारियों का खतरा
नागरिकों ने की नियमित सफाई, सैनिटाइजेशन और पानी की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग
संवाददाता: संदीप तायड़े, दैनिक स्वराज वाणी
घोड़ाडोंगरी। नगर में पेयजल आपूर्ति के लिए उपयोग की जा रही पानी की टंकियों की साफ-सफाई को लेकर स्थानीय नागरिकों ने सवाल उठाए हैं। नागरिकों का कहना है कि टंकियों की नियमित सफाई नहीं होने से उनके भीतर गंदगी जमा होने की आशंका बनी रहती है। इसका सीधा असर पेयजल की गुणवत्ता और नगरवासियों के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। लोगों ने नगर परिषद से सभी पेयजल टंकियों की स्थिति की जांच कराकर उनकी नियमित सफाई और सैनिटाइजेशन कराने की मांग की है।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार नगर के अलग-अलग क्षेत्रों में पानी पहुंचाने वाली टंकियों के माध्यम से बड़ी संख्या में परिवारों को प्रतिदिन पेयजल उपलब्ध कराया जाता है। ऐसे में इन टंकियों की स्वच्छता सुनिश्चित करना संबंधित विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। यदि पेयजल भंडारण करने वाली टंकियों की निर्धारित समय पर सफाई नहीं की जाती है, तो उनमें मिट्टी, धूल, काई और अन्य प्रकार की गंदगी जमा होने की आशंका रहती है।
दूषित पानी से स्वास्थ्य पर पड़ सकता है असर
नागरिकों का कहना है कि पेयजल का सीधा संबंध लोगों के स्वास्थ्य से है। यदि टंकियों में लंबे समय से जमा गंदगी पानी में मिलती है, तो उसके दूषित होने का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे पानी का सेवन करने से पेट संबंधी बीमारियां, उल्टी-दस्त और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं होने की आशंका बनी रहती है। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों पर दूषित पानी का प्रभाव अधिक गंभीर हो सकता है।
स्थानीय लोगों ने कहा कि केवल पानी की आपूर्ति कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों तक पहुंचने वाले पानी की स्वच्छता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। नगर परिषद और पेयजल आपूर्ति से जुड़े विभाग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जिस पानी का उपयोग लोग पीने और भोजन बनाने में कर रहे हैं, वह निर्धारित मानकों के अनुरूप स्वच्छ एवं सुरक्षित हो।
सभी टंकियों की स्थिति की जांच कराने की मांग
नगरवासियों ने नगर परिषद से मांग की है कि नगर में स्थित सभी पेयजल टंकियों की वर्तमान स्थिति की जांच कराई जाए। यह पता लगाया जाए कि टंकियों की अंतिम बार सफाई कब हुई थी तथा उनकी सफाई के लिए क्या नियमित कार्ययोजना बनाई गई है। नागरिकों ने मांग की कि प्रत्येक टंकी की सफाई की तारीख, अगली निर्धारित सफाई और पानी की जांच से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक की जाए।
लोगों का कहना है कि पेयजल टंकियों की सफाई केवल शिकायत मिलने के बाद नहीं, बल्कि एक निश्चित समय-सारिणी के अनुसार होनी चाहिए। इसके लिए संबंधित विभाग को नियमित निगरानी व्यवस्था तैयार करनी चाहिए। सफाई के बाद टंकियों का आवश्यकतानुसार सैनिटाइजेशन भी कराया जाना चाहिए, ताकि उनमें किसी प्रकार के हानिकारक जीवाणु अथवा संक्रमण की आशंका न रहे।
पेयजल के नमूनों की प्रयोगशाला में हो जांच
नागरिकों ने टंकियों की सफाई के साथ-साथ पानी की गुणवत्ता की जांच कराने की भी मांग की है। उनका कहना है कि अलग-अलग क्षेत्रों से पेयजल के नमूने एकत्र कर मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में जांच कराई जानी चाहिए। जांच के माध्यम से पानी की गुणवत्ता, स्वच्छता और उपयोग की उपयुक्तता की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।
स्थानीय लोगों ने कहा कि पानी में दुर्गंध, बदला हुआ स्वाद अथवा किसी प्रकार की गंदगी दिखाई देने पर संबंधित विभाग को तत्काल नमूने लेकर जांच करनी चाहिए। जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने से लोगों का विश्वास भी बढ़ेगा और किसी प्रकार की समस्या पाए जाने पर समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए जा सकेंगे।
सफाई का रिकॉर्ड रखने की आवश्यकता
नगरवासियों ने मांग की है कि पेयजल टंकियों की सफाई का पूरा रिकॉर्ड नगर परिषद द्वारा सुरक्षित रखा जाए। प्रत्येक टंकी पर पिछली और अगली सफाई की तारीख अंकित की जा सकती है। इससे नागरिकों को भी जानकारी मिल सकेगी कि उनके क्षेत्र की टंकी की सफाई कब की गई थी।
लोगों ने यह भी कहा कि पेयजल आपूर्ति व्यवस्था की निगरानी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। टंकियों के आसपास साफ-सफाई रखने, ढक्कन और पाइपलाइन की स्थिति जांचने तथा किसी प्रकार के रिसाव को समय रहते ठीक करने की व्यवस्था होनी चाहिए।
नागरिकों ने नगर परिषद से पेयजल टंकियों की जांच, सफाई, सैनिटाइजेशन और पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते आवश्यक कार्रवाई किए जाने से संभावित स्वास्थ्य समस्याओं को रोका जा सकता है और नगरवासियों को स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जा सकता है।
