सिलवानी में धूमधाम से मनाई गई लव-कुश जयंती, भव्य चल समारोह और आकर्षक झांकी ने मोहा मन
जगह-जगह सामाजिक संगठनों ने किया स्वागत, कुशवाहा समाज के साथ सभी वर्गों ने दिया भाईचारे और एकता का संदेश
रिपोर्ट: वैभव जैन मस्ताना
दैनिक स्वराज वाणी, सिलवानी। नगर में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के पुत्र भगवान लव-कुश की जयंती कुशवाहा समाज द्वारा श्रद्धा, उत्साह और धूमधाम के साथ मनाई गई। इस अवसर पर नगर में भव्य चल समारोह निकाला गया, जिसका विभिन्न सामाजिक संगठनों और सभी वर्गों के नागरिकों ने जगह-जगह स्वागत किया। समारोह के माध्यम से सामाजिक समरसता, भाईचारे और एकता का संदेश दिया गया।
लव-कुश जयंती को लेकर कुशवाहा समाज के लोगों में सुबह से ही विशेष उत्साह दिखाई दिया। समाज के महिला-पुरुष, युवा और बच्चे पारंपरिक वेशभूषा में कार्यक्रम में शामिल हुए। धार्मिक जयकारों और भक्ति गीतों के बीच निकले चल समारोह ने पूरे नगर को भक्तिमय बना दिया।
श्री कठिया मंदिर से शुरू हुआ चल समारोह
भव्य चल समारोह तहसील रोड स्थित श्री कठिया मंदिर से प्रारंभ हुआ। यहां समाज के लोगों ने भगवान लव-कुश की विधिवत पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। इसके बाद धार्मिक ध्वज, बैंड-बाजों और जयकारों के साथ चल समारोह नगर भ्रमण के लिए रवाना हुआ।
चल समारोह गांधी आश्रम, नगर पंचायत क्षेत्र और छोटी पुलिया सहित नगर के प्रमुख मार्गों से होकर गांधी चौक पहुंचा। यात्रा मार्ग पर जगह-जगह लोगों ने पुष्पवर्षा कर श्रद्धालुओं का स्वागत किया। विभिन्न सामाजिक संगठनों ने स्वागत मंच लगाकर चल समारोह में शामिल लोगों के लिए पेयजल और अन्य व्यवस्थाएं कीं।
आकर्षक झांकी बनी लोगों के आकर्षण का केंद्र
चल समारोह में भगवान लव-कुश के जीवन और उनके आदर्शों पर आधारित आकर्षक झांकी सजाई गई। झांकी में भगवान लव-कुश के साहस, संस्कार, वीरता और मातृभक्ति को प्रदर्शित किया गया। नगर भ्रमण के दौरान श्रद्धालुओं ने झांकी के दर्शन कर पूजा-अर्चना की।
बच्चों और युवाओं में झांकी को देखने के लिए विशेष उत्साह दिखाई दिया। लोगों ने मोबाइल फोन से तस्वीरें और वीडियो बनाकर आयोजन की स्मृतियों को संजोया। आयोजकों ने बताया कि झांकी के माध्यम से नई पीढ़ी को भगवान लव-कुश के जीवन, पराक्रम और संस्कारों से परिचित कराने का प्रयास किया गया।
सामाजिक संगठनों ने किया जोरदार स्वागत
चल समारोह का नगर के विभिन्न स्थानों पर नगर पंचायत, क्षेत्रीय विकास परिषद, सामाजिक संस्थाओं, धार्मिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने स्वागत किया। लोगों ने भगवान लव-कुश की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए और समारोह में शामिल समाजजनों का अभिनंदन किया।
स्वागत के दौरान नगर में सौहार्दपूर्ण वातावरण दिखाई दिया। कुशवाहा समाज के साथ अन्य समाजों के लोगों ने भी कार्यक्रम में भाग लेकर सामाजिक एकता का परिचय दिया। आयोजन में शामिल लोगों ने कहा कि धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम समाज को जोड़ने का काम करते हैं।
भगवान लव-कुश के आदर्श अपनाने का आह्वान
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने भगवान लव-कुश के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका जीवन वीरता, त्याग, अनुशासन, मातृभक्ति और संस्कारों का प्रतीक है। माता सीता से मिले संस्कारों और महर्षि वाल्मीकि से प्राप्त शिक्षा के आधार पर लव-कुश ने सत्य तथा धर्म के मार्ग पर चलते हुए आदर्श प्रस्तुत किया।
वक्ताओं ने समाज के युवाओं से भगवान लव-कुश के जीवन से प्रेरणा लेकर माता-पिता, गुरु और समाज के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति और महापुरुषों के जीवन से जोड़ना बेहद आवश्यक है।
भाईचारे और सामाजिक एकता का दिया संदेश
लव-कुश जयंती के अवसर पर निकाले गए चल समारोह की विशेषता यह रही कि इसमें कुशवाहा समाज के साथ अन्य समाजों और संगठनों ने भी सक्रिय भागीदारी की। सभी ने कंधे से कंधा मिलाकर नगर में सामाजिक सद्भाव, एकता और भाईचारे का संदेश दिया।
आयोजकों ने कहा कि कुशवाहा समाज हमेशा सामाजिक समरसता और जनसेवा को प्राथमिकता देता आया है। समाज के महापुरुषों की जयंती मनाने का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन करना नहीं, बल्कि उनके आदर्शों और विचारों को जन-जन तक पहुंचाना भी है।
ये गणमान्य नागरिक रहे उपस्थित
कार्यक्रम में युवा नेता विभोरकांत जैन, नगर कांग्रेस अध्यक्ष दिनेश कुशवाहा, हिंदू उत्सव समिति अध्यक्ष रानू सोनी, नारायण यादव, राघवेंद्र कुशवाहा, प्रदीप कुशवाहा, लोकेश कुशवाहा, क्षेत्रीय विकास परिषद के सचिव सुनील वैद्यराज, पप्पू नेमा और ओके जैन मस्ताना सहित कुशवाहा समाज के पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नगरवासी उपस्थित रहे।
समारोह के सफल आयोजन पर कुशवाहा समाज ने सभी सामाजिक संगठनों, स्वागतकर्ताओं, प्रशासन और नगरवासियों के प्रति आभार व्यक्त किया। आयोजन का समापन भगवान लव-कुश की आरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ।
