Modi-Xi Meeting: जिनपिंग-मोदी की द्विपक्षीय वार्ता से पहले चीन का बड़ा संदेश, कहा—दोस्तों की तरह संभालें मतभेद
दैनिक स्वराज वाणी, नई दिल्ली। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सात वर्ष बाद भारत पहुंचे हैं। नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे जिनपिंग की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है। दोनों नेताओं की महत्वपूर्ण बातचीत से पहले चीन ने भारत के साथ संबंधों को लेकर सकारात्मक संदेश दिया है।
चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि दोनों देशों को अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखना चाहिए। बीजिंग ने संवाद एवं सहयोग बढ़ाने के साथ मौजूदा मतभेदों को उचित तरीके से संभालने पर जोर दिया। चीन की तरफ से कहा गया कि दोनों देश एक-दूसरे की सफलता में सहयोग करने वाले साझेदार बन सकते हैं।
सात साल बाद भारत पहुंचे शी जिनपिंग
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग शनिवार, 12 सितंबर को ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने के लिए नई दिल्ली पहुंचे। यह करीब सात वर्षों में उनका पहला भारत दौरा है। इससे पहले वह वर्ष 2019 में भारत आए थे। उनके वर्तमान दौरे को भारत और चीन के बीच संबंध सामान्य करने के प्रयासों की दिशा में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
जिनपिंग के नई दिल्ली पहुंचने पर केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद ने उनका स्वागत किया। इसके बाद वह भारत मंडपम पहुंचे, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन में भाग लेने आए अन्य नेताओं के साथ उनका भी स्वागत किया।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ब्रिक्स के माध्यम से सहयोग को आगे बढ़ाने और अधिक संतुलित, प्रतिनिधित्वपूर्ण तथा बहुध्रुवीय विश्व के निर्माण में योगदान देने वाली रचनात्मक चर्चा की उम्मीद करता है।
चीन ने कहा—रणनीतिक नजरिए से देखें रिश्ते
मोदी और जिनपिंग की बैठक से पहले चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि बीजिंग भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाना चाहता है।
उन्होंने दोनों देशों के बीच संवाद और सहयोग को मजबूत करने तथा मतभेदों को उचित तरीके से संभालने की बात कही। चीन की ओर से यह भी कहा गया कि भारत और चीन को ऐसे साझेदार बनना चाहिए, जो एक-दूसरे को सफल होने में सहायता करें।
चीन का यह बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों देशों के बीच सीमा विवाद, व्यापार असंतुलन और रणनीतिक अविश्वास जैसे कई मुद्दे बने हुए हैं। इस कारण बीजिंग का संवाद बढ़ाने वाला संदेश महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
‘अच्छे पड़ोसी और मित्र’ बनने पर जोर
भारत में चीन के राजदूत शू फेईहोंग ने भी दोनों देशों के संबंधों को लेकर संदेश जारी किया। उन्होंने अच्छे पड़ोसी की भावना, मित्रता और आपसी सहयोग पर जोर दिया। चीनी पक्ष का कहना है कि दो बड़े पड़ोसी देशों को मतभेदों को पूरे रिश्ते पर हावी नहीं होने देना चाहिए।
बीजिंग की तरफ से बार-बार यह संदेश दिया जा रहा है कि भारत और चीन के बीच सहयोग दोनों देशों के साथ एशिया तथा विश्व के हित में भी है। हालांकि भारत लगातार स्पष्ट करता रहा है कि सीमा पर शांति और स्थिरता द्विपक्षीय संबंधों के सामान्य विकास के लिए आवश्यक है।
इसलिए चीन के सकारात्मक बयान को वास्तविक प्रगति में बदलने के लिए सीमा पर बनी स्थिति, सैनिकों की तैनाती और आपसी भरोसे से जुड़े विषयों पर ठोस परिणाम जरूरी होंगे।
सीमा विवाद रह सकता है वार्ता का प्रमुख विषय
भारत और चीन के बीच करीब 3,800 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा को लेकर विवाद है। जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इसमें भारत के 20 जवान शहीद हुए थे, जबकि चीन ने अपने चार सैनिकों की मौत स्वीकार की थी।
गलवान की घटना के बाद दोनों देशों के रिश्ते गंभीर तनाव में आ गए थे। सीमा पर बड़ी संख्या में सैनिकों और सैन्य उपकरणों की तैनाती की गई। कई दौर की सैन्य तथा कूटनीतिक बातचीत के बाद कुछ क्षेत्रों से सैनिकों की वापसी पर सहमति बनी।
मोदी-जिनपिंग की प्रस्तावित बैठक में सीमा पर शांति, गश्त से जुड़ी व्यवस्था, सैन्य संवाद और तनाव कम करने के अगले कदमों पर चर्चा होने की संभावना है। भारत के लिए यह विषय द्विपक्षीय संबंधों का आधार बना हुआ है।
व्यापार असंतुलन पर भी हो सकती है बातचीत
भारत और चीन के बीच बड़े स्तर पर व्यापार होता है, लेकिन इसमें भारत का व्यापार घाटा लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। भारत चीन से इलेक्ट्रॉनिक सामान, मशीनरी, सौर उपकरण, सक्रिय औषधि सामग्री और औद्योगिक कलपुर्जों सहित बड़ी मात्रा में सामान आयात करता है।
भारत चाहता है कि चीन उसके कृषि उत्पादों, औषधियों, आईटी सेवाओं और अन्य वस्तुओं को अपने बाजार में अधिक अवसर दे। दोनों नेताओं की बैठक में व्यापारिक बाधाओं को कम करने, बाजार तक पहुंच और निवेश से संबंधित विषयों पर चर्चा हो सकती है।
आर्थिक सहयोग बढ़ाने के साथ भारत राष्ट्रीय सुरक्षा और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में चीन पर अत्यधिक निर्भरता कम करने की नीति पर भी काम कर रहा है। इसलिए व्यापार संबंधों में सुधार का रास्ता पारदर्शिता और परस्पर हितों पर निर्भर करेगा।
सीधी उड़ानों की बहाली संबंधों में सुधार का संकेत
जिनपिंग के भारत पहुंचने के बीच चीन और भारत के बीच सीधी हवाई सेवाओं को लेकर भी बड़ा अपडेट सामने आया है। China Southern Airlines ने ग्वांगझोउ और नई दिल्ली के बीच नियमित यात्री उड़ान 21 सितंबर से शुरू करने की घोषणा की है।
यह सेवा करीब छह साल बाद बहाल होने जा रही है। कोरोना महामारी और उसके बाद द्विपक्षीय तनाव के कारण दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें बाधित हुई थीं। उड़ानों की बहाली से विद्यार्थियों, व्यापारियों, पर्यटकों और दोनों देशों में रहने वाले नागरिकों को सुविधा मिलने की उम्मीद है।
वीजा और लोगों के आवागमन पर भी नजर
सीधी उड़ानों के साथ वीजा व्यवस्था और दोनों देशों के नागरिकों के आवागमन को आसान बनाना भी बातचीत का हिस्सा हो सकता है। तनाव के वर्षों में वीजा जारी करने, पत्रकारों की नियुक्ति और कारोबारी यात्राओं को लेकर कई बाधाएं सामने आई थीं।
रिश्तों में सुधार के लिए केवल सरकारों के बीच बातचीत पर्याप्त नहीं मानी जाती। विद्यार्थियों, व्यापारिक प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों और सांस्कृतिक समूहों का नियमित आदान-प्रदान भी आपसी विश्वास बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
दोनों देश यदि वीजा और हवाई संपर्क को चरणबद्ध तरीके से सामान्य करते हैं तो इससे नागरिक स्तर पर संबंध बेहतर हो सकते हैं।
लगातार तीसरे वर्ष आमने-सामने होंगे दोनों नेता
मोदी और जिनपिंग की यह लगातार तीसरे वर्ष होने वाली महत्वपूर्ण मुलाकात बताई जा रही है। पिछले उच्चस्तरीय संवादों में दोनों नेताओं ने सीमा पर शांति और द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने की आवश्यकता पर जोर दिया था।
नई दिल्ली की बैठक से किसी बड़े समझौते की तुरंत उम्मीद करना जल्दबाजी हो सकती है। हालांकि नियमित शीर्षस्तरीय संवाद से दोनों देशों को संवेदनशील मुद्दों पर अपनी स्थिति सीधे रखने और गलतफहमियां कम करने का अवसर मिलता है।
दोनों नेताओं की बातचीत के बाद जारी होने वाले आधिकारिक बयानों से स्पष्ट होगा कि सीमा, व्यापार, उड़ान, वीजा और आपसी सहयोग के मुद्दों पर कितनी प्रगति हुई है।
BRICS मंच पर भी साथ काम करने की जरूरत
भारत 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को आयोजित शिखर सम्मेलन में व्यापार, निवेश, तकनीक, ऊर्जा, वित्तीय सहयोग और ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो रही है।
भारत और चीन ब्रिक्स के दो प्रमुख सदस्य हैं। दोनों देशों के बीच मतभेद होने के बावजूद जलवायु परिवर्तन, वैश्विक आर्थिक सुधार, बहुपक्षीय संस्थाओं में बदलाव और विकासशील देशों के हितों जैसे विषयों पर सहयोग की गुंजाइश मौजूद है।
चीन ने कहा है कि वह भारत के साथ ब्रिक्स मंच पर सहयोग मजबूत करना चाहता है। लेकिन दोनों देशों के संबंधों की वास्तविक दिशा मोदी-जिनपिंग बैठक के बाद उठाए जाने वाले व्यावहारिक कदमों से तय होगी।
सकारात्मक बयान के बाद ठोस कदमों का इंतजार
चीन का ‘दोस्तों की तरह मतभेद संभालने’ और एक-दूसरे की सफलता में सहयोग करने वाला बयान कूटनीतिक रूप से सकारात्मक है। फिर भी भारत-चीन संबंधों के सामने मौजूद जटिल मुद्दे केवल बयानों से हल नहीं होंगे।
सीमा पर स्थायी शांति, सैन्य विश्वास बहाली, संतुलित व्यापार और एक-दूसरे की सुरक्षा चिंताओं का सम्मान संबंधों को सामान्य बनाने के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
फिलहाल दुनिया की नजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की द्विपक्षीय बैठक पर है। इस बातचीत के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दोनों एशियाई शक्तियां अपने मतभेदों को नियंत्रित करते हुए संबंधों को सहयोग की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए किन कदमों पर सहमत होती हैं।
English Heading
China Calls for Proper Handling of Differences Ahead of Modi-Xi Meeting, Urges India and China to Work as Friends and Partners
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