MP Higher Education News: सरकारी-प्राइवेट कॉलेजों में यूथ रेडक्रॉस अनिवार्य, विद्यार्थियों से लिया जाएगा ₹5 मासिक अंशदान
मध्यप्रदेश के सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में अब यूथ रेडक्रॉस इकाई का गठन और संचालन अनिवार्य होगा। प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग ने इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नई व्यवस्था के अंतर्गत कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों से यूथ रेडक्रॉस अंशदान के रूप में पांच रुपए प्रति माह शुल्क लिया जाएगा।
यह व्यवस्था केवल स्नातक या अंडर ग्रेजुएट विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहेगी। पोस्ट ग्रेजुएट सहित संस्थानों में संचालित सभी पाठ्यक्रमों के छात्र-छात्राओं को इसके दायरे में शामिल किया जाएगा। उच्च शिक्षा विभाग के आदेश के बाद शैक्षणिक संस्थानों को अपने परिसरों में यूथ रेडक्रॉस इकाइयों को सक्रिय रूप से संचालित करना होगा।
सभी सरकारी और निजी संस्थानों पर लागू होगा आदेश
उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देश प्रदेश के शासकीय और अशासकीय विश्वविद्यालयों तथा महाविद्यालयों पर लागू होंगे। इसका अर्थ है कि सरकारी कॉलेजों के साथ निजी शिक्षण संस्थानों को भी यूथ रेडक्रॉस का गठन करना होगा।
कॉलेजों में इकाई का केवल कागजी गठन पर्याप्त नहीं होगा। संस्थानों को इसका नियमित संचालन करने और विद्यार्थियों को सामाजिक सेवा, स्वास्थ्य जागरूकता तथा मानवीय गतिविधियों से जोड़ने की व्यवस्था भी बनानी होगी।
आदेश लागू होने के बाद विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को यूथ रेडक्रॉस से संबंधित विद्यार्थी पंजीयन, अंशदान संग्रह और गतिविधियों का रिकॉर्ड तैयार करना पड़ सकता है। हालांकि शुल्क किस अवधि तक लिया जाएगा और संग्रहित राशि का लेखा किस प्रारूप में रखा जाएगा, इसकी विस्तृत स्थिति संबंधित विभागीय आदेश से ही स्पष्ट होगी।
प्रत्येक विद्यार्थी से पांच रुपए प्रति माह
नई व्यवस्था के अंतर्गत पात्र विद्यार्थियों से यूथ रेडक्रॉस अंशदान के रूप में पांच रुपए प्रतिमाह लिए जाने का प्रावधान बताया गया है। यह राशि यूजी, पीजी और अन्य पाठ्यक्रमों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं से ली जाएगी।
राशि भले ही कम दिखाई देती है, लेकिन प्रदेश के सभी सरकारी और निजी उच्च शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों से एकत्र होने पर इसका कुल आकार काफी बड़ा हो सकता है। इसलिए शिक्षण संस्थानों के लिए अंशदान से प्राप्त राशि का पारदर्शी रिकॉर्ड रखना महत्वपूर्ण होगा।
विद्यार्थियों और अभिभावकों को प्रवेश शुल्क की रसीद या संस्थान के फीस विवरण में यूथ रेडक्रॉस अंशदान अलग से दिखाई देना चाहिए। इससे यह स्पष्ट होगा कि विद्यार्थी से किस मद में कितनी राशि ली गई है।
यदि पूरे 12 महीने शुल्क लिया जाता है तो पांच रुपए प्रतिमाह के हिसाब से राशि 60 रुपए वार्षिक बनेगी। हालांकि वास्तविक वार्षिक अंशदान शैक्षणिक सत्र और विभाग द्वारा निर्धारित संग्रह अवधि पर निर्भर करेगा। इसलिए संस्थान के आधिकारिक शुल्क विवरण को देखना आवश्यक होगा।
क्या है यूथ रेडक्रॉस?
यूथ रेडक्रॉस भारतीय रेडक्रॉस सोसाइटी से जुड़ी एक युवा इकाई है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों में सेवा, स्वास्थ्य जागरूकता और मानवीय जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। इसके माध्यम से युवाओं को सामाजिक गतिविधियों और आपदा के समय सहायता कार्यों से जुड़ने का अवसर मिलता है।
शैक्षणिक संस्थानों में यूथ रेडक्रॉस के माध्यम से रक्तदान जागरूकता, प्राथमिक उपचार प्रशिक्षण, स्वास्थ्य परीक्षण शिविर, स्वच्छता अभियान, पर्यावरण संरक्षण और सड़क सुरक्षा जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं।
इसके अलावा प्राकृतिक आपदा, महामारी या किसी अन्य आपातकालीन स्थिति में स्वयंसेवकों को आवश्यक सहायता और जागरूकता गतिविधियों के लिए तैयार किया जा सकता है। विद्यार्थियों को प्रशिक्षित स्वयंसेवक के रूप में विकसित करना इस प्रकार की इकाइयों का प्रमुख उद्देश्य माना जाता है।
कॉलेजों को बनानी होगी सक्रिय इकाई
नई व्यवस्था के बाद कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के सामने सबसे पहली जिम्मेदारी यूथ रेडक्रॉस इकाई का विधिवत गठन करने की होगी। इसके लिए संस्थान स्तर पर किसी प्राध्यापक या अधिकारी को कार्यक्रम प्रभारी बनाया जा सकता है।
इकाई में इच्छुक विद्यार्थियों को स्वयंसेवक के रूप में जोड़ा जा सकता है। उन्हें प्राथमिक उपचार, स्वास्थ्य सुरक्षा और आपदा प्रबंधन जैसे विषयों का प्रशिक्षण दिया जा सकता है। संस्थान स्थानीय रेडक्रॉस इकाई, स्वास्थ्य विभाग और अन्य संबंधित संस्थाओं के सहयोग से कार्यक्रम आयोजित कर सकते हैं।
यूथ रेडक्रॉस की गतिविधियों को प्रभावी बनाने के लिए पूरे शैक्षणिक सत्र का कैलेंडर तैयार किया जाना उपयोगी होगा। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि एकत्र किया गया अंशदान वास्तविक गतिविधियों, प्रशिक्षण और सामाजिक सेवा कार्यक्रमों में उपयोग हो।
विद्यार्थियों को मिल सकता है व्यावहारिक अनुभव
यूथ रेडक्रॉस से जुड़ने वाले विद्यार्थियों को कक्षा की पढ़ाई के साथ सामाजिक सेवा का व्यावहारिक अनुभव मिल सकता है। किसी दुर्घटना या आपात स्थिति में प्राथमिक उपचार देना, स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी का प्रचार करना और जरूरतमंद लोगों की मदद करना महत्वपूर्ण जीवन कौशल हैं।
कॉलेज स्तर पर प्रशिक्षण मिलने से विद्यार्थी अपने परिवार और समुदाय को भी जागरूक कर सकते हैं। रक्तदान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना, नियमित स्वास्थ्य जांच का महत्व बताना तथा संक्रमण से बचाव की जानकारी देना यूथ रेडक्रॉस की उपयोगी गतिविधियों में शामिल हो सकता है।
ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में टीमवर्क, नेतृत्व, अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना भी विकसित कर सकते हैं। इसलिए इकाई का उद्देश्य केवल शुल्क संग्रह तक सीमित नहीं रहना चाहिए।
अंशदान के उपयोग में पारदर्शिता जरूरी
सभी विद्यार्थियों से हर महीने अंशदान लिए जाने के कारण इसकी वसूली और उपयोग में पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक होगा। प्रत्येक कॉलेज को प्राप्त राशि, आयोजित गतिविधियों और किए गए खर्च का स्पष्ट रिकॉर्ड रखना चाहिए।
विद्यार्थियों को भी यह जानकारी उपलब्ध होनी चाहिए कि उनसे लिया गया अंशदान किन कार्यक्रमों में उपयोग किया गया। कॉलेज स्तर पर वर्षभर आयोजित गतिविधियों की रिपोर्ट तैयार करके सूचना पटल या संस्थान की वेबसाइट पर प्रकाशित की जा सकती है।
यदि किसी विद्यार्थी से निर्धारित राशि से अधिक शुल्क लिया जाता है या बिना रसीद अंशदान मांगा जाता है तो वह कॉलेज प्रशासन अथवा संबंधित विश्वविद्यालय से स्पष्टीकरण मांग सकता है।
स्वास्थ्य और सेवा से जोड़ने की पहल
उच्च शिक्षा विभाग के इस निर्णय का प्रमुख उद्देश्य प्रदेश के विद्यार्थियों को मानवीय सेवा और स्वास्थ्य जागरूकता से जोड़ना माना जा रहा है। कॉलेज जीवन युवाओं के व्यक्तित्व निर्माण का महत्वपूर्ण समय होता है। इस दौरान सामाजिक सेवा से जुड़ने पर उनमें संवेदनशीलता और जिम्मेदारी विकसित हो सकती है।
अब इस व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि विश्वविद्यालय और कॉलेज यूथ रेडक्रॉस इकाइयों को कितनी गंभीरता से संचालित करते हैं। यदि इकाइयां नियमित प्रशिक्षण और जनसेवा गतिविधियों के साथ काम करती हैं तो पांच रुपए का मासिक अंशदान विद्यार्थियों और समाज दोनों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
वहीं यदि व्यवस्था केवल शुल्क लेने और कागजी रिकॉर्ड तैयार करने तक सीमित रही तो इसका उद्देश्य पूरा नहीं होगा। इसलिए उच्च शिक्षा विभाग को समय-समय पर संस्थानों की गतिविधियों और अंशदान के उपयोग की निगरानी भी करनी होगी।
