Indore Murder Case: गाय चोरी के संदेह में युवक की पीट-पीटकर हत्या, दो आरोपी गिरफ्तार; सूरज जाट की तलाश में छापेमारी
दैनिक स्वराज वाणी, इंदौर। शहर के लसूड़िया थाना क्षेत्र में गाय चोरी के संदेह में चंदर लोहार नामक युवक की कथित रूप से पीट-पीटकर हत्या करने के मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान भुरू यादव और कुणाल यादव के रूप में बताई गई है। मामले का मुख्य आरोपी बताया जा रहा सूरज जाट अभी फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की अलग-अलग टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।
कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि आरोपियों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था और उन्होंने एक नेता के समर्थकों की मदद से थाने पहुंचकर आत्मसमर्पण किया। हालांकि लसूड़िया पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपियों को मुखबिर से मिली सूचना और मोबाइल लोकेशन के आधार पर गिरफ्तार किया गया है। राजनीतिक संरक्षण और आत्मसमर्पण से जुड़े दावों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
देवास नाका का रहने वाला था चंदर लोहार
मृतक की पहचान देवास नाका क्षेत्र में रहने वाले चंदर लोहार के रूप में हुई है। पुलिस जांच में सामने आई प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, तलावली चांदा क्षेत्र में रहने वाले भुरू यादव की गाय गायब हो गई थी। इस मामले में चंदर पर गाय चोरी करने का संदेह जताया गया।
आरोप है कि सूरज जाट, भुरू यादव और उनके साथियों ने गाय की तलाश के दौरान चंदर को पकड़ लिया। इसके बाद उससे पूछताछ करने के नाम पर कथित रूप से मारपीट की गई। चंदर को गंभीर हालत में लसूड़िया पुलिस के पास लाया गया था। गाय चोरी के आरोप में उसके खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई गई।
चंदर की हालत बिगड़ने के बाद उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और चिकित्सकीय निष्कर्षों के आधार पर पुलिस ने मामले को हत्या के रूप में दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई।
चोरी की रिपोर्ट लिखवाने पर भी उठे सवाल
इस मामले का गंभीर पहलू यह है कि जिस युवक के साथ मारपीट करने का आरोप है, उसी के खिलाफ गाय चोरी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी। अब पुलिस यह जांच कर रही है कि चोरी की शिकायत किन परिस्थितियों में दर्ज कराई गई और शिकायत में दी गई जानकारी सही थी या नहीं।
जांच के दौरान यह भी पता लगाया जा रहा है कि चंदर को किस स्थान से पकड़ा गया, उसे कहां ले जाकर पीटा गया और मारपीट के समय कितने लोग मौजूद थे। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड और लोकेशन की भी जांच कर सकती है।
मृतक के परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान इस मामले में महत्वपूर्ण होंगे। पुलिस को यह भी निर्धारित करना होगा कि घटना में प्रत्येक आरोपी की क्या भूमिका थी।
भुरू और कुणाल की गिरफ्तारी दिखाई
लसूड़िया पुलिस ने गुरुवार रात भुरू यादव और नंदा नगर निवासी कुणाल यादव को गिरफ्तार करने की जानकारी दी। पुलिस का दावा है कि दोनों को मुखबिर की सूचना और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पकड़ा गया।
इसके विपरीत कुछ मीडिया रिपोर्टों में आरोप लगाया गया है कि दोनों आरोपी राजनीतिक संपर्कों के माध्यम से थाने पहुंचे और उसके बाद उनकी गिरफ्तारी दिखाई गई। पुलिस ने इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। ऐसे में जांच पूरी होने से पहले इसे स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।
पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है। पूछताछ के आधार पर अन्य संभावित आरोपियों और घटना में शामिल लोगों की भूमिका सामने आ सकती है। आरोपियों को न्यायालय में पेश कर पुलिस रिमांड की मांग किए जाने की संभावना है।
मुख्य आरोपी सूरज जाट फरार
हत्या के मामले में मुख्य आरोपी बताया जा रहा सूरज जाट अभी पुलिस की पकड़ से बाहर है। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में दबिश दे रही है। उसके रिश्तेदारों, परिचितों और संभावित संपर्कों के संबंध में भी जानकारी जुटाई जा रही है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने पूछताछ के लिए सूरज की पत्नी को हिरासत में लिया है। हालांकि इस संबंध में पुलिस का विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। किसी व्यक्ति को पूछताछ के लिए हिरासत में लेना उसे मामले में आरोपी सिद्ध नहीं करता।
सूरज की गिरफ्तारी के बाद ही घटना के पीछे की पूरी कहानी और मारपीट में शामिल लोगों की वास्तविक भूमिका स्पष्ट होने की उम्मीद है।
सूरज के खिलाफ पहले से मामले दर्ज होने का दावा
रिपोर्टों के अनुसार, सूरज जाट के विरुद्ध इंदौर के विभिन्न थानों में कई आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। वर्ष 2024 में नंदा नगर क्षेत्र में कांग्रेस नेता के घर और कार्यालय पर हुए हमले के मामले में भी उसका नाम सामने आया था।
कुछ स्थानीय रिपोर्टों में उसके खिलाफ 30 से अधिक मामले दर्ज होने और पूर्व में जिलाबदर की कार्रवाई होने का दावा किया गया है। इन दावों की सही संख्या और वर्तमान कानूनी स्थिति की पुष्टि पुलिस रिकॉर्ड के आधार पर होना बाकी है।
पुलिस ने पूर्व में सूरज के खिलाफ जिलाबदर का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन बाद में कथित तौर पर उसे छह महीने तक थाने में नियमित हाजिरी देने का आदेश दिया गया। बताया जा रहा है कि हाजिरी की अवधि 18 अगस्त को समाप्त हुई थी। अब उसकी आपराधिक गतिविधियों और पहले की प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयों की भी समीक्षा की जा सकती है।
राजनीतिक संरक्षण के आरोपों की जांच जरूरी
घटना के बाद कुछ नेताओं और संगठनों से जुड़े लोगों द्वारा आरोपियों को संरक्षण दिए जाने के आरोप सामने आए हैं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि कथित गौ तस्करी और ‘लव जिहाद’ के मामलों की आड़ में कुछ लोग अवैध वसूली करते हैं। हालांकि पुलिस ने इन आरोपों की पुष्टि नहीं की है और न ही किसी राजनीतिक नेता को इस मामले में आरोपी बनाया गया है।
यदि जांच में आरोपियों को बचाने, पुलिस कार्रवाई प्रभावित करने या आत्मसमर्पण की व्यवस्था कराने में किसी बाहरी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल यह पुलिस जांच का विषय है।
कानून हाथ में लेने का अधिकार किसी को नहीं
किसी व्यक्ति पर चोरी या अन्य अपराध का संदेह होने पर उसकी सूचना पुलिस को देना आवश्यक है। किसी भी संगठन, समूह या व्यक्ति को संदिग्ध के साथ मारपीट करने अथवा स्वयं सजा देने का अधिकार नहीं है। भीड़ की हिंसा या निजी तौर पर दंड देने की कार्रवाई गंभीर आपराधिक मामला बन सकती है।
चंदर लोहार हत्याकांड में पुलिस के सामने अब मुख्य आरोपी को गिरफ्तार करने, घटना में शामिल सभी लोगों की पहचान करने और साक्ष्यों के आधार पर आरोप तय करने की चुनौती है। जांच पूरी होने और न्यायालय में साक्ष्य प्रस्तुत होने के बाद ही आरोपियों की आपराधिक जिम्मेदारी पर अंतिम निर्णय होगा।
