आठ महीने बाद MIC में हुई जीतू यादव की वापसी, विद्युत एवं यांत्रिकी विभाग की मिली जिम्मेदारी
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने जारी किया नियुक्ति आदेश
इंदौर। इंदौर नगर निगम की मेयर-इन-काउंसिल (MIC) में लंबे समय से खाली चल रहे महत्वपूर्ण पद पर आखिरकार जितेंद्र कुमार उर्फ जीतू यादव की वापसी हो गई है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने शुक्रवार देर रात उनकी नियुक्ति का आधिकारिक आदेश जारी किया।
आदेश के तहत जीतू यादव को MIC का सदस्य नियुक्त किया गया है और उन्हें विद्युत एवं यांत्रिकी विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनकी नियुक्ति को इंदौर की स्थानीय राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है।
जनवरी 2025 में पार्टी से हुए थे निष्कासित
जीतू यादव को इससे पहले जनवरी 2025 में भारतीय जनता पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। पार्टी से निष्कासन के बाद उन्हें MIC की जिम्मेदारी से भी हटा दिया गया था।
हालांकि, बाद में मामले में पुलिस की ओर से क्लीन चिट मिलने के बाद 18 अगस्त को उनकी भाजपा में वापसी हुई थी। पार्टी में वापसी के बावजूद उस समय उन्हें तत्काल MIC में जगह नहीं दी गई थी।
अब शीर्ष नेतृत्व की सहमति के बाद उन्हें फिर से नगर निगम की मेयर-इन-काउंसिल में शामिल किया गया है।
भोपाल में बैठक के बाद साफ हुआ रास्ता
जीतू यादव की MIC में वापसी का रास्ता भोपाल में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद साफ हुआ। जानकारी के अनुसार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के साथ हुई बैठक में विधायक रमेश मेंदोला और विधायक गोलू शुक्ला सहित प्रमुख नेता मौजूद थे।
बैठक में जीतू यादव को दोबारा MIC में शामिल किए जाने को लेकर चर्चा हुई। इसके बाद पार्टी नेतृत्व ने उनकी नियुक्ति को हरी झंडी दी।
राजनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम को इंदौर भाजपा के भीतर बने समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।
विद्युत एवं यांत्रिकी विभाग की मिली जिम्मेदारी
जीतू यादव को MIC सदस्य बनाए जाने के साथ ही उन्हें विद्युत एवं यांत्रिकी विभाग का प्रभारी बनाया गया है।
इससे पहले इस विभाग की जिम्मेदारी MIC सदस्य निरंजन सिंह उर्फ गुड्डू चौहान के पास थी। नए आदेश के बाद उन्हें इस विभाग के प्रभार से मुक्त कर दिया गया है।
नगर निगम में विद्युत व्यवस्था, तकनीकी कार्यों और यांत्रिकी से जुड़े विभिन्न कार्य इस विभाग के अंतर्गत आते हैं। ऐसे में जीतू यादव को महत्वपूर्ण विभाग सौंपा जाना राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों लिहाज से अहम माना जा रहा है।
निष्कासन के बाद भी सक्रिय रहे जीतू यादव
पार्टी से निष्कासन के दौरान भी जीतू यादव स्थानीय राजनीति में सक्रिय रहे। वे नगर निगम की बैठकों में निर्दलीय पार्षद के रूप में शामिल होते रहे।
इस दौरान उन्होंने नगर निगम से जुड़े मुद्दों पर अपनी सक्रियता बनाए रखी। कांग्रेस पार्षदों के खिलाफ भी उनका रुख कई मौकों पर आक्रामक रहा।
भाजपा में वापसी के बाद MIC में उनकी नियुक्ति को संगठन में उनकी राजनीतिक सक्रियता और स्थानीय पकड़ की वापसी के रूप में देखा जा रहा है।
क्या था पूरा विवाद?
जीतू यादव के खिलाफ कार्रवाई का मामला जनवरी 2025 में वार्ड 65 के पार्षद कमलेश कालरा के घर से जुड़े विवाद के बाद सामने आया था।
विवाद की शुरुआत एक ऑडियो के वायरल होने के बाद हुई थी। इसके बाद मामला कथित तौर पर कमलेश कालरा के घर में तोड़फोड़ और उनके परिवार के साथ अभद्रता के आरोपों तक पहुंच गया था।
घटना ने इंदौर की स्थानीय राजनीति में काफी हलचल पैदा कर दी थी। मामला प्रदेश और दिल्ली तक पहुंचा, जिसके बाद भाजपा ने जीतू यादव के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें छह वर्ष के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था।
पुलिस क्लीन चिट के बाद हुई थी भाजपा में वापसी
विवाद के बाद मामले की जांच चली। बाद में पुलिस की ओर से क्लीन चिट मिलने के बाद जीतू यादव की भाजपा में वापसी का रास्ता साफ हुआ।
18 अगस्त को उनकी पार्टी में वापसी हुई थी। हालांकि, भाजपा में दोबारा शामिल होने के बाद MIC में उनकी नियुक्ति तत्काल नहीं हुई।
करीब कुछ सप्ताह बाद अब महापौर ने उन्हें MIC में शामिल करते हुए विद्युत एवं यांत्रिकी विभाग की जिम्मेदारी भी सौंप दी है।
पुराने राजनीतिक समीकरणों की वापसी?
इंदौर की राजनीति में जीतू यादव को मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और विधायक रमेश मेंदोला के खेमे के करीब माना जाता है। ऐसे में उनकी MIC में वापसी को स्थानीय भाजपा के राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भोपाल में हुई बैठक के बाद उनकी नियुक्ति को मंजूरी मिलना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व ने इस मुद्दे पर व्यापक स्तर पर सहमति बनाई है।
नगर निगम में फिर बदले समीकरण
जीतू यादव की नियुक्ति के साथ ही इंदौर नगर निगम की MIC में विभागों का समीकरण भी बदल गया है। निरंजन सिंह गुड्डू चौहान को विद्युत एवं यांत्रिकी विभाग से मुक्त कर अब यह जिम्मेदारी जीतू यादव को दी गई है।
यह आदेश मध्य प्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 37 के तहत जारी किया गया है।
अब जीतू यादव के सामने विभाग की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ नगर निगम के कामकाज में अपनी भूमिका को मजबूत करने की चुनौती होगी।
राजनीतिक वापसी का अहम पड़ाव
आठ महीने के राजनीतिक घटनाक्रम के बाद MIC में जीतू यादव की वापसी को उनकी राजनीतिक वापसी का अहम पड़ाव माना जा रहा है। पहले पार्टी से निष्कासन, फिर पुलिस क्लीन चिट के बाद भाजपा में वापसी और अब MIC की जिम्मेदारी मिलने से उनका राजनीतिक कद एक बार फिर चर्चा में है।
आने वाले समय में यह नियुक्ति इंदौर नगर निगम के भीतर भाजपा के राजनीतिक और प्रशासनिक समीकरणों को किस तरह प्रभावित करती है, इस पर सभी की नजर रहेगी।
