मध्यप्रदेश में हर साल एक लाख युवाओं को नौकरी देने का संकल्प: मुख्यमंत्री मोहन यादव
सीएम का दावा—85 हजार से अधिक पदों पर नियुक्तियां, ढाई लाख कर्मचारियों की होगी पदोन्नति
भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य में रोजगार और सरकारी भर्ती को लेकर बड़ा बयान दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार हर साल युवाओं को एक लाख नौकरियां देने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने दावा किया कि अब तक 85 हजार से अधिक युवाओं को शासकीय नौकरियां दी जा चुकी हैं। रिक्त होने वाले पदों पर आगे भी चरणबद्ध तरीके से भर्ती की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों की पदोन्नति को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में करीब ढाई लाख अधिकारी-कर्मचारियों की पदोन्नति की जानी है। इनमें से लगभग एक लाख कर्मचारियों की पदोन्नति हो चुकी है। शेष पदोन्नतियों की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।
रिक्त पदों को लगातार भरने की तैयारी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अनुसार, शासकीय विभागों में सेवानिवृत्ति, पदोन्नति और अन्य कारणों से रिक्त होने वाले पदों को लगातार भरा जाएगा। सरकार की योजना भर्ती प्रक्रिया को नियमित रखने की है, ताकि विभागों में कर्मचारियों की कमी न हो और युवाओं को सरकारी सेवा में आने के अवसर मिलते रहें।
प्रदेश में बड़ी संख्या में युवा मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन मंडल, पुलिस, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य विभागों की भर्ती परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री की हर साल एक लाख नौकरियां देने की घोषणा को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि, अलग-अलग विभागों में निकाले जाने वाले पदों की संख्या, पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और भर्ती कार्यक्रम संबंधित विभागों तथा भर्ती एजेंसियों द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचनाओं में ही स्पष्ट होगा। अभ्यर्थियों को भर्ती से जुड़ी जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइटों पर नजर रखने की सलाह दी जाती है।
अब तक 85 हजार से ज्यादा नियुक्तियों का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार अब तक 85 हजार से अधिक युवाओं को शासकीय सेवा में नियुक्ति दे चुकी है। सरकार का लक्ष्य भर्ती प्रक्रिया को आगे भी जारी रखते हुए हर वर्ष लगभग एक लाख रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।
उन्होंने कहा कि विभिन्न सरकारी विभागों में खाली पदों की पहचान कर भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। सरकार का प्रयास है कि चयन प्रक्रिया पारदर्शी हो और पात्र अभ्यर्थियों को योग्यता के आधार पर नियुक्ति मिले। भर्ती प्रक्रिया समय पर पूरी होने से विभागों की कार्यक्षमता बढ़ने के साथ आम जनता को मिलने वाली सेवाओं में भी सुधार होने की उम्मीद है।
ढाई लाख अधिकारी-कर्मचारियों की पदोन्नति का लक्ष्य
राज्य सरकार ने कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित पदोन्नति प्रक्रिया को भी प्राथमिकता में रखा है। मुख्यमंत्री के मुताबिक प्रदेश में करीब ढाई लाख अधिकारी-कर्मचारियों की पदोन्नति होनी है। इनमें से लगभग एक लाख पदोन्नतियां पूरी की जा चुकी हैं।
पदोन्नति होने से सरकारी विभागों में उच्च पदों पर रिक्तियां भरेंगी। इसके साथ ही नीचे के पद भी खाली होंगे, जिन पर नई भर्ती की संभावनाएं बन सकती हैं। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि पदोन्नति और भर्ती की दोनों प्रक्रियाएं समानांतर रूप से आगे बढ़ाई जाएंगी।
अधिकारी-कर्मचारियों की पदोन्नति से विभागीय व्यवस्था में जिम्मेदारियों का नए सिरे से वितरण होगा। सरकार का मानना है कि इससे प्रशासनिक कार्यों में गति आएगी और लंबे समय से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे कर्मचारियों को भी लाभ मिलेगा।
‘कृषक कल्याण वर्ष’ और ‘निवेश-रोजगार वर्ष’ पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार कृषक कल्याण और निवेश के माध्यम से रोजगार बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रही है। सरकार प्रदेश में ‘कृषक कल्याण वर्ष’ और ‘निवेश एवं रोजगार वर्ष’ के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रम चला रही है।
इन पहलों का उद्देश्य केवल सरकारी क्षेत्र में भर्ती करना नहीं, बल्कि उद्योग, व्यापार, कृषि आधारित उद्यम और निजी निवेश के माध्यम से भी रोजगार के अवसर बढ़ाना है। सरकार का प्रयास है कि स्थानीय स्तर पर उद्योग स्थापित हों और युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में नहीं जाना पड़े।
निवेश आकर्षित करने में मध्यप्रदेश आगे: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दावा किया कि मध्यप्रदेश देश में तेजी से निवेश आकर्षित करने वाले राज्यों में शामिल हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार ने देश के साथ विदेशों के निवेशकों का भी विश्वास जीतने का प्रयास किया है।
प्रदेश में औद्योगिक निवेश बढ़ाने के लिए सरकार ने अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़ी 25 से अधिक नीतियां तैयार की हैं। इन नीतियों के माध्यम से निवेशकों के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने, आवश्यक अनुमतियां समय पर देने और उद्योग स्थापित करने में आने वाली बाधाओं को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
सरकार का मानना है कि निवेश बढ़ने से प्रदेश में नए उद्योग, निर्माण इकाइयां और सेवा क्षेत्र से जुड़े संस्थान स्थापित होंगे। इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। छोटे और मध्यम उद्यमों को बढ़ावा मिलने से स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।
व्यापार-व्यवसाय के लिए पारदर्शी व्यवस्था का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार पारदर्शिता के साथ व्यापार और व्यवसाय को सुगमता से आगे बढ़ाने का काम कर रही है। निवेशकों के लिए आवश्यक सरकारी प्रक्रियाओं को सरल बनाने और नीतिगत सहयोग देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
सरकार का दावा है कि उद्योगों को सुविधाएं उपलब्ध कराने से मध्यप्रदेश निवेश के लिए आकर्षक राज्य बन रहा है। इससे युवाओं को सरकारी नौकरियों के साथ निजी क्षेत्र और स्वरोजगार में भी नए विकल्प मिलेंगे।
युवाओं और कर्मचारियों को घोषणा के क्रियान्वयन का इंतजार
मुख्यमंत्री की घोषणा ने सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं और पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे कर्मचारियों की उम्मीदें बढ़ाई हैं। अब सभी की नजर आगामी भर्ती अधिसूचनाओं, विभागवार रिक्त पदों और पदोन्नति प्रक्रिया की समयसीमा पर रहेगी।
सरकार ने हर वर्ष एक लाख नौकरियां देने, रिक्त पद लगातार भरने और ढाई लाख अधिकारी-कर्मचारियों की पदोन्नति करने की प्रतिबद्धता जताई है। इन लक्ष्यों का वास्तविक प्रभाव भर्ती परीक्षाओं, नियुक्ति आदेशों और विभागीय पदोन्नति प्रक्रियाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन से सामने आएगा।
