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BRICS Summit 2026: मोदी-जिनपिंग मुलाकात से पहले चीन का बड़ा संदेश, कहा- मतभेदों को सही तरीके से संभालें

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Published On: 12 September 2026
BRICS Summit 2026: मोदी-जिनपिंग मुलाकात से पहले चीन का बड़ा संदेश, कहा- मतभेदों को सही तरीके से संभालें
— BRICS 2026: PM Modi and Xi Jinping Set for Key Bilateral Talks in New Delhi

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BRICS Summit 2026: मोदी-जिनपिंग मुलाकात से पहले चीन का बड़ा संदेश, कहा- मतभेदों को सही तरीके से संभालें

नई दिल्ली में होगी भारत-चीन के शीर्ष नेताओं की अहम बैठक

नई दिल्ली। 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अहम द्विपक्षीय मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजर है। शी जिनपिंग 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित BRICS Summit में हिस्सा लेने भारत पहुंचे हैं। चीन के विदेश मंत्रालय ने उनकी यात्रा की पुष्टि करते हुए कहा है कि बीजिंग भारत के साथ संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

भारत और चीन के बीच हाल के वर्षों में सीमा विवाद के कारण रिश्तों में तनाव रहा है। हालांकि, 2024 के बाद दोनों देशों के संबंधों में धीरे-धीरे सुधार के संकेत दिखाई दिए हैं। ऐसे में मोदी-जिनपिंग की यह मुलाकात द्विपक्षीय रिश्तों को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

चीन ने कहा- बातचीत और सहयोग बढ़ाना जरूरी

मोदी-जिनपिंग मुलाकात से पहले चीन की ओर से भारत के साथ संबंधों को लेकर सकारात्मक संदेश दिया गया है। चीन ने कहा है कि दोनों देशों को संवाद और सहयोग को बढ़ावा देना चाहिए तथा मतभेदों को उचित तरीके से संभालना चाहिए।

चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि बीजिंग भारत के साथ संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से देखता है। उन्होंने दोनों देशों के बीच संचार और सहयोग मजबूत करने तथा मतभेदों को उचित ढंग से प्रबंधित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

चीन का यह रुख ऐसे समय सामने आया है, जब दोनों देशों के शीर्ष नेता नई दिल्ली में आमने-सामने होने जा रहे हैं। इससे बैठक को लेकर कूटनीतिक उम्मीदें बढ़ी हैं।

सीमा विवाद से व्यापार तक, कई मुद्दे अहम

मोदी और जिनपिंग की बातचीत में भारत-चीन संबंधों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठ सकते हैं। इनमें सीमा पर शांति और स्थिरता, व्यापार असंतुलन, बाजार पहुंच, निवेश और वीजा से जुड़े विषय शामिल हैं। दोनों देशों के बीच सीमा पर सैन्य तनाव कम करने की दिशा में पिछले कुछ समय में कदम उठाए गए हैं, लेकिन कई महत्वपूर्ण मुद्दे अब भी लंबित हैं।

अक्टूबर 2024 में कजान में मोदी और जिनपिंग की मुलाकात के बाद सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया गया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य करने के प्रयास हुए हैं।

BRICS के मंच पर भी अहम होगी मुलाकात

नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS Summit में दुनिया के कई प्रमुख नेता हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन में वैश्विक शासन, बहुपक्षीय संस्थाओं को मजबूत करने, व्यापार, निवेश, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संघर्षों जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है।

भारत के लिए BRICS सम्मेलन एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक अवसर है। चीन और रूस जैसे प्रमुख देशों के साथ संवाद के अलावा भारत वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने पर भी जोर दे रहा है।

सात साल बाद भारत आए शी जिनपिंग

शी जिनपिंग की मौजूदा भारत यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह 2019 के बाद उनकी भारत की पहली यात्रा है। उनकी यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत-चीन संबंधों में तनाव के बाद धीरे-धीरे सुधार की प्रक्रिया चल रही है।

2024 के बाद दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क और संवाद बढ़ा है। अगस्त 2025 में SCO Summit के दौरान मोदी और जिनपिंग की मुलाकात में भी दोनों नेताओं ने संबंधों में सकारात्मक गति बनाए रखने और सीमा क्षेत्रों में शांति सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया था।

रिश्तों में सुधार की कोशिश, लेकिन चुनौतियां बरकरार

भारत और चीन के रिश्तों में सुधार के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच अविश्वास पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। सीमा विवाद, व्यापार असंतुलन और रणनीतिक मुद्दे अब भी चुनौती बने हुए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि शीर्ष नेताओं की मुलाकात से रिश्तों को स्थिरता देने की कोशिश आगे बढ़ सकती है, लेकिन किसी बड़े बदलाव की उम्मीद तत्काल करना जल्दबाजी होगी।

दुनिया की नजर मोदी-जिनपिंग मुलाकात पर

BRICS Summit के दौरान मोदी और जिनपिंग की बैठक भारत-चीन संबंधों के साथ-साथ व्यापक वैश्विक राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच संवाद बढ़ने से एशिया में स्थिरता और आर्थिक बीजिंग मतभेदों के बावजूद संवाद और सहयोग का रास्ता खुला रखना चाहता है। अब नजर इस बात पर होगी कि दोनों नेताओं की बातचीत के सहयोग को बढ़ावा मिल सकता है।

चीन की ओर से बैठक से पहले दिया गया संदेश स्पष्ट संकेत देता है कि बीजिंग मतभेदों के बावजूद संवाद और सहयोग का रास्ता खुला रखना चाहता है। अब नजर इस बात पर होगी कि दोनों नेताओं की बातचीत के बाद भारत-चीन संबंधों को आगे किस दिशा में ले जाने पर सहमति बनती है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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