नागदा में सकल हिंदू समाज ने नवरात्रि के दौरान व्यावसायिक गरबा आयोजनों की अनुमति निरस्त करने की मांग की। SDM को सौंपे ज्ञापन में धार्मिक मर्यादा, महिलाओं की सुरक्षा और नशाखोरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई गई।
“गरबा प्रदर्शन नहीं, आस्था की अभिव्यक्ति है”
सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए धार्मिक गरबों के व्यावसायीकरण पर रोक की मांग, सकल हिंदू समाज ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
संवाददाता : निलेश मेहता
नागदा। नागदा गरबा आयोजन को धार्मिक और सांस्कृतिक मर्यादाओं के अनुरूप आयोजित करने तथा सनातन संस्कृति की रक्षा और संवर्धन की मांग को लेकर नगर में ‘धार्मिक सांस्कृतिक आयोजन बचाओ मंच’ के बैनर तले सकल हिंदू समाज एकजुट हो गया है। शुक्रवार को समाजजनों ने अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) को ज्ञापन सौंपकर नवरात्रि के अवसर पर होने वाले व्यावसायिक गरबा आयोजनों की अनुमति पूर्णतः निरस्त करने की पुरजोर मांग की।
सकल हिंदू समाज का कहना है कि नवरात्रि का पर्व मां शक्ति की आराधना और जन-जन की धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ है। ऐसे में गरबा आयोजनों के मूल धार्मिक और सांस्कृतिक स्वरूप को बनाए रखना आवश्यक है।
नागदा गरबा आयोजन में व्यावसायिकता और अमर्यादित आचरण पर चिंता
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि नवरात्रि मात्र मनोरंजन या उत्सव का साधन नहीं है, बल्कि मां शक्ति की आराधना और जन-जन की आस्था का प्रतीक है। वर्तमान समय में व्यावसायिक आयोजनों में सनातन मर्यादाओं का उल्लंघन, अशोभनीय प्रदर्शन और फूहड़ता देखने को मिल रही है, जिससे युवा पीढ़ी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
सकल हिंदू समाज ने नागदा गरबा आयोजन के दौरान धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं की पवित्रता बनाए रखने की मांग की है। समाजजनों का कहना है कि नवरात्रि जैसे पावन पर्व को व्यावसायिक स्वरूप देने के बजाय इसे मां शक्ति की आराधना और सनातन संस्कृति के अनुरूप मनाया जाना चाहिए।
सुरक्षा, नशाखोरी और असामाजिक गतिविधियों को लेकर जताई चिंता
ज्ञापन में प्रमुख रूप से सुरक्षा, नशाखोरी और असामाजिक गतिविधियों पर चिंता व्यक्त की गई। समाजजनों ने प्रशासन से मांग की है कि पंडालों के आसपास नशाखोरी करने वालों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाए तथा धार्मिक मर्यादाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
विशेष रूप से माताओं-बहनों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की मांग की गई है। सकल हिंदू समाज ने स्पष्ट किया कि धार्मिक आयोजनों की पवित्रता और सुरक्षा व्यवस्था से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।
नागदा गरबा आयोजन को लेकर ये प्रमुख मांगें
व्यावसायिक आयोजनों पर रोक
आगामी नवरात्रि पर्व पर व्यावसायिक गरबा आयोजनों की अनुमति निरस्त की जाए तथा जिन आयोजनों को अनुमति दी जा चुकी है, उन्हें तत्काल रद्द किया जाए।
नशाखोरी पर कड़ी कार्रवाई
गणेश पंडालों एवं आगामी गरबा पंडालों के आसपास नशा करने और बेचने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएं।
सुरक्षा एवं मर्यादा
माताओं-बहनों की सुरक्षा और धार्मिक पवित्रता से कोई समझौता न किया जाए। आयोजन स्थलों पर ऐसा वातावरण सुनिश्चित किया जाए, जिससे धार्मिक और सांस्कृतिक मर्यादा कायम रहे।
“नवरात्रि व्यवसाय का बाजार नहीं, भक्ति का पावन पर्व”
सकल हिंदू समाज, नागदा ने अपने संदेश में कहा—
“गरबा प्रदर्शन नहीं, आस्था की अभिव्यक्ति है। नवरात्रि व्यवसाय का बाजार नहीं बल्कि भक्ति का पावन पर्व है, जिसकी पवित्रता बनाए रखना हम सभी का दायित्व है।”
ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से नागदा गरबा आयोजन सहित नवरात्रि के दौरान आयोजित होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों की पवित्रता और मूल स्वरूप की रक्षा करने की मांग की गई है।
सकल हिंदू समाज का कहना है कि सनातन संस्कृति और धार्मिक आयोजनों की मर्यादा को बनाए रखने के लिए प्रशासन को आवश्यक कदम उठाने चाहिए। व्यावसायिकता, नशाखोरी और असामाजिक गतिविधियों पर सख्ती से रोक लगाई जाए, ताकि श्रद्धालु धार्मिक वातावरण में नवरात्रि पर्व और गरबा उत्सव में शामिल हो सकें।
इस अवसर पर सकल हिंदू समाज एवं धर्मप्रेमी नागरिक व बहनें बड़ी संख्या में उपस्थित रहीं।


