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Raghav Chadha Voter List Row: पंजाब से नाम हटने के बाद दिल्ली की मतदाता सूची में एंट्री, AAP ने उठाए सवाल

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Published On: 9 September 2026
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Raghav Chadha Voter List Row: पंजाब से नाम हटने के बाद दिल्ली की मतदाता सूची में एंट्री, AAP ने उठाए सवाल

राजेंद्र नगर विधानसभा क्षेत्र की वोटर लिस्ट में सामने आया नाम, राघव चड्ढा ने कहा—चुनाव आयोग के नियमों के तहत कराई प्रक्रिया

नई दिल्ली। भाजपा के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम दिल्ली की मतदाता सूची में शामिल होने के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से उनका नाम हटाए जाने के कुछ समय बाद दिल्ली के राजेंद्र नगर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में उनका नाम सामने आया है। इस घटनाक्रम को लेकर आम आदमी पार्टी ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। वहीं, राघव चड्ढा ने किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार करते हुए कहा है कि मतदाता के रूप में पंजीकरण निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत कराया गया है।

मामले पर सियासी बयानबाजी तेज होने के साथ यह सवाल भी उठ रहा है कि पंजाब से नाम हटने के बाद दिल्ली की सूची में उनका पंजीकरण कब और किस प्रक्रिया के तहत किया गया। फिलहाल किसी सक्षम प्राधिकारी ने इस मामले में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि नहीं की है।

पंजाब की ड्राफ्ट सूची से हटाया गया था नाम

रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब में विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद जारी की गई ड्राफ्ट मतदाता सूची में राघव चड्ढा का नाम शामिल नहीं था। सूची में उन्हें कथित रूप से स्थानांतरित मतदाता की श्रेणी में दिखाया गया था। उस समय उन्होंने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया था।

इसके बाद अब दिल्ली के राजेंद्र नगर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में उनका नाम दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। राघव चड्ढा पहले राजेंद्र नगर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व भी कर चुके हैं। बाद में उन्हें पंजाब से राज्यसभा भेजा गया था।

क्रमांक 747 पर नाम दर्ज होने का दावा

आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि नई दिल्ली के राजेंद्र नगर क्षेत्र के संबंधित मतदान केंद्र की ड्राफ्ट सूची में पहले कुल 746 मतदाता दर्ज थे। उस समय इस सूची में राघव चड्ढा का नाम नहीं था, लेकिन बाद में निर्वाचन पोर्टल पर उनका नाम क्रमांक 747 पर दिखाई देने लगा।

भारद्वाज ने सवाल किया कि यदि ड्राफ्ट मतदाता सूची की प्रक्रिया निर्धारित अवधि तक स्थिर थी, तो इसके बाद नया नाम किस आधार पर जोड़ा गया। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या राघव चड्ढा ने दिल्ली में मतदाता बनने के लिए नया आवेदन दिया था और पंजाब की मतदाता सूची से उनका नाम हटाए जाने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी।

AAP ने चुनाव आयोग से नाम जोड़ने की तारीख, आवेदन और अनुमोदन की प्रक्रिया सार्वजनिक करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आयोग को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। में भी इन आरोपों और संबंधित प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है।

चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर AAP के सवाल

AAP नेताओं ने पूछा है कि राघव चड्ढा का मतदाता पंजीकरण पंजाब से दिल्ली स्थानांतरित किया गया या दिल्ली में नए मतदाता के रूप में आवेदन स्वीकार किया गया। पार्टी ने यह जानकारी भी मांगी है कि दोनों राज्यों में एक ही मतदाता पहचान संख्या का इस्तेमाल हुआ अथवा नया नंबर जारी किया गया।

सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि आम मतदाताओं को नाम जुड़वाने अथवा संशोधन कराने में लंबी प्रक्रिया का सामना करना पड़ता है, जबकि प्रभावशाली लोगों के मामलों में आवेदन तेजी से स्वीकृत हो जाते हैं। यह AAP का राजनीतिक आरोप है और चुनाव अधिकारियों की ओर से राघव चड्ढा के मामले में किसी विशेष सुविधा की पुष्टि नहीं की गई है।

दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की सामान्य जानकारी के अनुसार, ड्राफ्ट सूची प्रकाशित होने के बाद प्राप्त आवेदनों की जांच संबंधित निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों द्वारा की जाती है। पात्र पाए जाने पर नाम जोड़ा जा सकता है। मतदाता अपनी स्थिति पर भी जांच सकते हैं।

राघव चड्ढा ने आरोपों को किया खारिज

विवाद के बीच राघव चड्ढा ने AAP के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में उनका नाम चुनाव आयोग के नियमों और कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए जोड़ा गया है। उनका कहना है कि उन्होंने कोई तथ्य नहीं छिपाया और न ही किसी नियम का उल्लंघन किया।

चड्ढा ने AAP की प्रतिक्रिया पर तंज कसते हुए उसकी तुलना संबंध टूटने के बाद नाराज पूर्व साथी के व्यवहार से की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल की सदस्यता और मतदाता सूची में नाम होना दो अलग-अलग विषय हैं। मतदाता सूची किसी पार्टी की सदस्यता सूची नहीं है।

क्या एक व्यक्ति दो स्थानों पर मतदाता बन सकता है?

चुनाव संबंधी नियमों के अनुसार, कोई भी भारतीय नागरिक एक समय में केवल एक निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता के रूप में पंजीकृत रह सकता है। निवास स्थान बदलने पर मतदाता नए निर्वाचन क्षेत्र में पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकता है। इसके बाद पुराने निर्वाचन क्षेत्र की सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया अपनाई जाती है।

राज्यसभा सांसद बनने या पद पर बने रहने के लिए संबंधित व्यक्ति का उसी राज्य का मतदाता होना अनिवार्य नहीं है, जिस राज्य से वह राज्यसभा के लिए चुना गया है। इसलिए पंजाब की मतदाता सूची से नाम हटने और दिल्ली में दर्ज होने से उनकी राज्यसभा सदस्यता स्वतः प्रभावित नहीं होती। हालांकि, दोनों स्थानों पर एक साथ नाम रहने की स्थिति नियमों के विपरीत होगी।

चुनाव आयोग के जवाब का इंतजार

इस मामले में असली स्थिति आवेदन की तारीख, सत्यापन, पुराने पंजीकरण को हटाने और नए पंजीकरण की मंजूरी से जुड़े आधिकारिक रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। AAP ने जहां इसे मतदाता सूची की प्रक्रिया से जुड़ा गंभीर मामला बताया है, वहीं राघव चड्ढा ने इसे राजनीतिक विवाद बताते हुए अपना पंजीकरण पूरी तरह वैध कहा है।

अब चुनाव आयोग अथवा दिल्ली के निर्वाचन अधिकारियों की विस्तृत सफाई का इंतजार है। आधिकारिक रिकॉर्ड से ही यह साफ होगा कि राघव चड्ढा का नाम दिल्ली की मतदाता सूची में कब और किस आधार पर शामिल किया गया।

 

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