झिरन्या थाना क्षेत्र के साईखेड़ा में कथित अवैध और जहरीली शराब की बिक्री को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। महिलाओं और पुरुषों ने थाने पहुंचकर कार्रवाई की मांग की।
साईखेड़ा में अवैध शराब का बड़ा खेल: 5 गंभीर सवाल, पुलिस-आबकारी बेखबर?
गांव में ठेका नहीं, फिर शराब पहुंचा कौन रहा? महिलाओं को थाने तक आना पड़ा, अब विभाग बोला—“जानकारी नहीं, दबिश की योजना बनाएंगे”
झिरन्या।
साईखेड़ा में अवैध शराब की कथित बिक्री को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है। झिरन्या थाना क्षेत्र से महज करीब 4 किलोमीटर दूर ग्राम साईखेड़ा में कथित अवैध और जहरीली शराब की बिक्री को लेकर ग्रामीण गंभीर आरोप लगा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में शराब का कोई अधिकृत ठेका नहीं है, इसके बावजूद शराब की बिक्री हो रही है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल उठता है कि जब गांव में शराब का ठेका ही नहीं है तो शराब आखिर आ कहां से रही है? गांव तक शराब कौन पहुंचा रहा है और खुलेआम हो रही कथित बिक्री किसकी निगरानी में चल रही है?
साईखेड़ा में अवैध शराब को लेकर ग्रामीणों के गंभीर आरोप
मामला तब और गंभीर हो जाता है जब ग्रामीण शराब के सेवन से युवाओं की असमय मौत होने के आरोप लगा रहे हैं। ग्रामीणों के इन आरोपों के बाद पुलिस और आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्या पुलिस और आबकारी विभाग को गांव में चल रहे इस कथित अवैध शराब के कारोबार की जानकारी नहीं थी? यदि जानकारी नहीं थी तो नियमित निगरानी और कार्रवाई की व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं और यदि जानकारी थी तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
ग्रामीणों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ गया है। उनका कहना है कि गांव में शराब की बिक्री बंद होनी चाहिए और जिम्मेदार विभागों को इस मामले में तत्काल प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए।
महिलाओं को सड़क से थाने तक आना पड़ा
साईखेड़ा में अवैध शराब बंद कराने की मांग को लेकर गांव की महिलाओं और पुरुषों ने प्रदर्शन किया। इसके बाद ग्रामीण चैनपुर थाने पहुंचे और जिला कलेक्टर, आबकारी अधिकारी, एसडीएम एवं थाना प्रभारी के नाम ज्ञापन सौंपा।
ग्रामीणों की यह पहल व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है कि जिस अवैध शराब की बिक्री को रोकना पुलिस और आबकारी विभाग की जिम्मेदारी है, उसके लिए ग्रामीणों को ही आंदोलन कर थाने तक क्यों पहुंचना पड़ा?
गांव की महिलाओं का थाने तक पहुंचना यह बताता है कि ग्रामीण इस मामले को लेकर कितने गंभीर हैं। अब ग्रामीणों की नजर पुलिस और आबकारी विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।
आबकारी अधिकारी बोले—“आवेदन की जानकारी नहीं”
मामले को लेकर आबकारी सहायक निरीक्षक सार्थक वर्मा ने कहा, “आवेदन की जानकारी नहीं है। मैं टीआई साहब से बात करके सामूहिक दबिश देने का प्लान करते हैं।”
आबकारी अधिकारी के इस बयान के बाद सवाल यह भी उठता है कि ग्रामीणों की शिकायत विभाग तक कब पहुंचेगी और कथित अवैध शराब की बिक्री रोकने के लिए जमीनी स्तर पर कार्रवाई कब शुरू होगी?
बीट प्रभारी बोले—शराब बिक रही है तो कार्रवाई करेंगे
वहीं बीट प्रभारी एसआई रमेश वास्कले ने कहा, “गांव में गांव वाले शराब बंद करना चाहते हैं, वहां कोई ठेका नहीं है। मैं भी नया-नया आया हूं। अगर शराब बिक रही है तो कार्रवाई करेंगे।”
अब देखना यह होगा कि ग्रामीणों के प्रदर्शन और ज्ञापन के बाद साईखेड़ा में अवैध शराब की कथित बिक्री को लेकर पुलिस और आबकारी विभाग कब कार्रवाई करते हैं।
साईखेड़ा मामले से उठ रहे 5 बड़े सवाल
- गांव में अधिकृत शराब ठेका नहीं है तो शराब कहां से पहुंच रही है?
- कथित अवैध शराब बेचने वालों तक पुलिस और आबकारी विभाग अब तक क्यों नहीं पहुंचा?
- ग्रामीणों को शराब बंद कराने के लिए थाने तक क्यों आना पड़ा?
- ग्रामीणों द्वारा युवाओं की असमय मौत को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की जांच कब होगी?
- सामूहिक दबिश की योजना कब जमीन पर दिखाई देगी?
फिलहाल ग्रामीणों ने प्रशासन से साईखेड़ा में अवैध शराब की कथित बिक्री पर तत्काल रोक लगाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। अब पुलिस और आबकारी विभाग की कार्रवाई पर सभी की निगाहें रहेंगी।
