इंदौर। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का 19 सितंबर को इंदौर में प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम होने वाला है। कार्यक्रम से पहले ही वंदे मातरम् को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। बीजेपी नेता और पुरुषार्थ संस्था के प्रमुख नानूराम कुमावत ने मांग की है कि राहुल गांधी के कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं से सामूहिक रूप से वंदे मातरम् का गायन कराया जाए। उन्होंने कहा कि यदि कार्यक्रम में राष्ट्रगीत का सामूहिक गायन नहीं कराया गया तो वे आगे विरोध प्रदर्शन करेंगे।
शनिवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में नानूराम कुमावत ने राहुल गांधी के कार्यक्रम में वंदे मातरम् के सामूहिक गायन की मांग रखी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के बीच राष्ट्रगीत का गायन राष्ट्रीय भावना और देश के प्रति सम्मान को मजबूत करने का माध्यम बन सकता है। इसी मांग के बाद इंदौर में राजनीतिक बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है।
पत्रकारों के सवाल पर कुमावत ने गाने की कोशिश की
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों ने नानूराम कुमावत से सवाल किया कि जब वे राहुल गांधी के कार्यक्रम में वंदे मातरम् के सामूहिक गायन की मांग कर रहे हैं, तो क्या वे स्वयं पूरा वंदे मातरम् गाकर सुना सकते हैं।
सवाल के जवाब में कुमावत ने वंदे मातरम् की कुछ पंक्तियां गाने की कोशिश की। हालांकि, इस दौरान वे कई जगह शब्दों के उच्चारण में रुकते और अटकते नजर आए। पत्रकारों ने उनसे पूरा राष्ट्रगीत सुनाने को कहा, लेकिन वे सभी छह छंदों का पूरा गायन नहीं कर सके।
उन्होंने अपनी याद के अनुसार कुछ पंक्तियां गाकर सुनाईं। इस दौरान उनकी प्रस्तुति का वीडियो भी सामने आया है। वीडियो सामने आने के बाद यह मामला राजनीतिक चर्चा और सोशल मीडिया पर बहस का विषय बन गया है।
बैठे-बैठे वंदे मातरम् गाने पर भी सवाल
कुमावत द्वारा वंदे मातरम् की पंक्तियां बैठे-बैठे गाए जाने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। पत्रकारों के सामने उन्होंने अपनी जगह से उठे बिना ही कुछ पंक्तियां सुनाईं। इसके बाद राष्ट्रगीत के गायन के दौरान निर्धारित मर्यादा और सम्मान से जुड़े नियमों को लेकर चर्चा तेज हो गई।
वंदे मातरम् को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर पहले से ही अलग-अलग विचार सामने आते रहे हैं। ऐसे में राहुल गांधी के कार्यक्रम से पहले इस मुद्दे के उठने से इंदौर की सियासत में भी इसकी चर्चा बढ़ गई है।
छह छंदों को लेकर चर्चा
वंदे मातरम् के गायन को लेकर जारी दिशा-निर्देशों के संदर्भ में राष्ट्रगीत के सभी छह छंदों के गायन और इसके दौरान सम्मानजनक मुद्रा में खड़े रहने की बात चर्चा में है। इसी वजह से सार्वजनिक आयोजनों में राष्ट्रगीत के गायन के तरीके और नियमों को लेकर भी बहस हो रही है।
नानूराम कुमावत की ओर से राहुल गांधी के कार्यक्रम में छात्रों से सामूहिक रूप से वंदे मातरम् गाने की मांग इसी संदर्भ में सामने आई है। उनका कहना है कि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल होंगे, इसलिए वहां राष्ट्रगीत का सामूहिक गायन कराया जाना चाहिए।
कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म
राहुल गांधी के इंदौर दौरे को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक गतिविधियां पहले से ही तेज हैं। ऐसे में वंदे मातरम् का मुद्दा सामने आने के बाद कार्यक्रम से जुड़ी सियासत और गरमा गई है।
कुमावत ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांग पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपना सकते हैं। इससे आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और राजनीतिक बयान सामने आने की संभावना है।
वहीं, प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूरा वंदे मातरम् नहीं गा पाने और बैठे-बैठे कुछ पंक्तियां गाने का वीडियो सामने आने के बाद विपक्षी दलों और सोशल मीडिया यूजर्स की ओर से भी प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं। हालांकि, इस पूरे मामले को लेकर अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण सामने आ रहे हैं।
‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम पर सबकी नजर
राहुल गांधी का 19 सितंबर को प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम छात्र-युवा केंद्रित बताया जा रहा है। कार्यक्रम में छात्रों से जुड़े मुद्दों, शिक्षा, रोजगार और युवाओं की भूमिका जैसे विषयों पर चर्चा होने की उम्मीद है। कार्यक्रम से पहले वंदे मातरम् को लेकर उठी मांग ने इसकी राजनीतिक चर्चा को और बढ़ा दिया है।
बीजेपी नेता की मांग के बाद अब निगाहें कार्यक्रम आयोजकों की प्रतिक्रिया पर हैं। सवाल यह है कि क्या राहुल गांधी के कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं से सामूहिक रूप से वंदे मातरम् का गायन कराया जाएगा या नहीं।
सोशल मीडिया पर वीडियो की चर्चा
कुमावत के प्रेस कॉन्फ्रेंस में वंदे मातरम् गाने की कोशिश का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई है। कुछ लोग उनके द्वारा पूरी रचना नहीं गा पाने को मुद्दा बना रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे राजनीतिक विवाद को अनावश्यक रूप से बढ़ाने वाला मामला बता रहे हैं।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि राष्ट्रगीत को लेकर सार्वजनिक मंचों पर राजनीतिक बयानबाजी किस सीमा तक होनी चाहिए। वहीं, समर्थकों का तर्क है कि राष्ट्रीय गीतों और प्रतीकों के प्रति सम्मान की भावना को सार्वजनिक आयोजनों में बढ़ावा दिया जाना जरूरी है।
राहुल गांधी के कार्यक्रम से पहले नई सियासी बहस
इंदौर में 19 सितंबर को होने वाले राहुल गांधी के कार्यक्रम से पहले वंदे मातरम् को लेकर शुरू हुई बहस ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। एक ओर बीजेपी नेता नानूराम कुमावत कार्यक्रम में सामूहिक गायन की मांग कर रहे हैं और मांग पूरी नहीं होने पर विरोध की चेतावनी दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके प्रेस कॉन्फ्रेंस में वंदे मातरम् की कुछ पंक्तियां गाने का वीडियो चर्चा में है।
फिलहाल पूरा विवाद कुमावत की मांग, वंदे मातरम् के गायन से जुड़े नियमों और राहुल गांधी के आगामी कार्यक्रम के इर्द-गिर्द केंद्रित है। आने वाले दिनों में दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों की ओर से इस मुद्दे पर बयानबाजी और तेज हो सकती है।
अब यह देखना अहम होगा कि 19 सितंबर को होने वाले ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में आयोजक वंदे मातरम् को लेकर क्या व्यवस्था करते हैं। कार्यक्रम में राष्ट्रगीत का सामूहिक गायन होता है या नहीं, इस पर राजनीतिक दलों और आम लोगों की नजर बनी हुई है। फिलहाल एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठी मांग ने इंदौर में राहुल गांधी के प्रस्तावित कार्यक्रम से पहले ही सियासी माहौल को गरमा दिया है।
