वैज्ञानिक तरीके से तय होगी भोपाल के बड़े तालाब की वास्तविक सीमा, NGT के निर्देश पर सर्वे शुरू
भदभदा से ड्रोन मैपिंग की शुरुआत, भोज वेटलैंड के साथ कलियासोत और केरवा जलाशयों का भी होगा सीमांकन
भोपाल। राजधानी भोपाल की पहचान और लाखों लोगों की प्यास बुझाने वाले बड़े तालाब की वास्तविक सीमा अब आधुनिक एवं वैज्ञानिक तकनीक से तय की जाएगी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देश के बाद प्रशासन ने भोज वेटलैंड, कलियासोत और केरवा जलाशयों के नए सिरे से सीमांकन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सर्वे के लिए राजस्व, नगर निगम, जल संसाधन, वन और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित सात विभागों के अधिकारियों एवं विशेषज्ञों की टीम तैनात की गई है।
सीमांकन की शुरुआत शनिवार सुबह भदभदा क्षेत्र से की गई। यहां ड्रोन मैपिंग, सैटेलाइट इमेज, जियो-टैगिंग और भौतिक निरीक्षण के माध्यम से जलाशय की वास्तविक सीमा, फुल टैंक लेवल और उसके आसपास के प्रतिबंधित क्षेत्र की पहचान की जाएगी। सर्वे से प्राप्त आंकड़ों का राजस्व रिकॉर्ड और पुराने नक्शों से मिलान किया जाएगा।
भदभदा से शुरू हुआ वैज्ञानिक सर्वे
प्रशासन ने सर्वे के शुरुआती केंद्र के रूप में भदभदा को चुना है। इसका प्रमुख कारण यह है कि बड़े तालाब का पानी भदभदा बांध के माध्यम से कलियासोत जलाशय की ओर जाता है। ऐसे में यहां से सर्वे शुरू करने पर बड़े तालाब और उससे जुड़े जल प्रवाह क्षेत्र की स्थिति का व्यवस्थित अध्ययन किया जा सकेगा।
NGT की समिति, पर्यावरण विशेषज्ञों और संबंधित विभागों के अधिकारियों की उपस्थिति में ड्रोन से क्षेत्र की मैपिंग की जाएगी। टीम जलाशय के किनारों, जलभराव क्षेत्र, जल प्रवाह मार्गों और निर्माण गतिविधियों का रिकॉर्ड तैयार करेगी। इसके साथ ही प्रत्येक महत्वपूर्ण स्थान की भौगोलिक स्थिति भी दर्ज की जाएगी।
सर्वे की रूपरेखा भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा की अध्यक्षता में हुई बैठक में तय की गई है। संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करते हुए वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित अंतिम रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
ड्रोन और सैटेलाइट तस्वीरों से तय होगा FTL
इस सर्वे का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बड़े तालाब का फुल टैंक लेवल यानी FTL निर्धारित करना है। FTL उस अधिकतम सीमा को दर्शाता है, जहां तक जलाशय पूरी क्षमता से भरने पर पानी पहुंच सकता है। इसी सीमा के आधार पर तालाब का संरक्षण क्षेत्र और उसके आसपास निर्माण संबंधी प्रतिबंध तय किए जाते हैं।
ड्रोन के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड किए जाएंगे। सैटेलाइट से प्राप्त पुरानी एवं वर्तमान तस्वीरों की तुलना करके यह पता लगाया जाएगा कि समय के साथ तालाब की सीमा और आसपास के भू-उपयोग में कितना बदलाव आया है। जियो-टैगिंग के माध्यम से तालाब की सीमा के प्रत्येक महत्वपूर्ण बिंदु के सटीक स्थान को दर्ज किया जाएगा।
वैज्ञानिक सर्वे के दौरान आधुनिक तकनीक से तैयार डिजिटल नक्शों का राजस्व विभाग के खसरा नक्शों, जल संसाधन विभाग के रिकॉर्ड और नगर निगम की जानकारी से मिलान किया जाएगा। इसका उद्देश्य सीमा को लेकर विभागीय रिकॉर्ड में मौजूद अंतर को दूर करना है।
वर्षों में कई बार हो चुका है सीमांकन
भोपाल के बड़े तालाब की सीमा निर्धारित करने के लिए पिछले लगभग तीन दशकों में कई बार सर्वे और सीमांकन कराया जा चुका है। इसके बावजूद अलग-अलग विभागों के नक्शों एवं रिकॉर्ड में अंतर सामने आता रहा है। कई स्थानों पर FTL और बफर जोन की सीमा स्पष्ट नहीं होने के कारण निर्माण और अतिक्रमण संबंधी विवाद भी बने हुए हैं।
पहले किए गए सर्वे पारंपरिक तकनीक और उपलब्ध राजस्व रिकॉर्ड पर आधारित थे। नए सर्वे में ड्रोन, सैटेलाइट चित्र और भौगोलिक सूचना प्रणाली जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इससे अधिक सटीक और प्रमाणित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने की उम्मीद है।
के अनुसार, वर्ष 2022 की अधिसूचना में भोज वेटलैंड का कुल FTL क्षेत्रफल 3,946.33 हेक्टेयर माना गया था। इसमें बड़े तालाब का क्षेत्रफल 3,872.43 हेक्टेयर और छोटे तालाब का क्षेत्रफल 73.90 हेक्टेयर दर्ज किया गया।
सात विभागों के विशेषज्ञ निभाएंगे महत्वपूर्ण भूमिका
वैज्ञानिक सीमांकन में राजस्व विभाग के अधिकारी पुराने खसरा रिकॉर्ड और भूमि स्वामित्व से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराएंगे। नगर निगम निर्माण अनुमतियों, सीवेज व्यवस्था और नगरीय सीमा का रिकॉर्ड प्रस्तुत करेगा। जल संसाधन विभाग जलाशयों के FTL, जल प्रवाह और बांध से संबंधित तकनीकी जानकारी देगा।
वन विभाग आसपास के हरित क्षेत्र और जैव विविधता से जुड़े तथ्यों का परीक्षण करेगा। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जल गुणवत्ता तथा तालाब में मिलने वाले सीवेज और प्रदूषण के स्रोतों का अध्ययन करेगा। अन्य तकनीकी विभाग ड्रोन सर्वे, डिजिटल मानचित्र और सैटेलाइट डेटा के विश्लेषण में सहयोग करेंगे।
सभी विभागों की संयुक्त रिपोर्ट के आधार पर तालाब की वास्तविक सीमा और संरक्षण क्षेत्र निर्धारित किया जाएगा। इससे किसी एक विभाग के रिकॉर्ड पर निर्भरता कम होगी और भविष्य में सीमा संबंधी विवादों के समाधान में मदद मिलेगी।
सीमांकन के बाद अतिक्रमणों की होगी पहचान
सर्वे पूरा होने के बाद वैज्ञानिक नक्शे के आधार पर यह पता लगाया जाएगा कि तालाब के FTL, बफर जोन और प्रभाव क्षेत्र में कितने निर्माण मौजूद हैं। नियमों का उल्लंघन कर बनाए गए निर्माणों को चिह्नित करने के बाद प्रशासन कानूनी प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई कर सकता है।
इससे पहले सात गांवों—प्रेमपुरा, धरमपुरी, सेवनिया गोंड, गौरा, बिशनखेड़ी, बीलखेड़ा और कोटरा सुल्तानाबाद—में हुए सर्वे के दौरान FTL के 50 मीटर क्षेत्र में 117 अतिक्रमण चिह्नित किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इनमें सरकारी और निजी दोनों प्रकार की जमीनों पर बने निर्माण शामिल बताए गए थे। के मुताबिक, NGT ने अवैध निर्माणों की सूची तैयार कर समयबद्ध कार्रवाई और अनुपालन रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे।
भोपाल की जल सुरक्षा से जुड़ा बड़ा तालाब
भोज वेटलैंड में बड़ा और छोटा तालाब शामिल हैं। यह रामसर सूची में शामिल अंतरराष्ट्रीय महत्व का वेटलैंड है। बड़ा तालाब भोपाल की पेयजल व्यवस्था, भूजल स्तर, जैव विविधता और स्थानीय पर्यावरण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
तालाब के आसपास अनियंत्रित निर्माण, अतिक्रमण, कचरा और सीवेज के प्रवेश से इसके पारिस्थितिक संतुलन पर लगातार दबाव बढ़ा है। वैज्ञानिक सीमांकन होने से तालाब की कानूनी सीमा स्पष्ट होगी और उसके संरक्षण के लिए दीर्घकालीन योजना बनाने में सहायता मिलेगी। प्रशासन के सामने अब बड़ी चुनौती यह रहेगी कि सर्वे के निष्कर्षों को केवल रिकॉर्ड तक सीमित न रखकर तालाब के संरक्षण के लिए प्रभावी कार्रवाई भी की जाए।
