₹65 करोड़ का MP सरकार का स्टेट प्लेन नहीं बिका, अब दोबारा होगी स्क्रैप बिक्री की तैयारी
ग्वालियर के महाराजपुरा एयरबेस पर खड़ा है दुर्घटनाग्रस्त Beechcraft King Air B-200GT, पहली EOI में नहीं मिला कोई खरीदार
ग्वालियर। मध्यप्रदेश सरकार के दुर्घटनाग्रस्त स्टेट प्लेन को बेचने की पहली कोशिश फिलहाल सफल नहीं हो सकी है। ग्वालियर के महाराजपुरा एयरबेस पर खड़े Beechcraft King Air B-200GT (VT-MPQ) को खरीदने के लिए राज्य सरकार की ओर से जारी एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट यानी EOI में किसी कंपनी या फर्म ने रुचि नहीं दिखाई।
अब सरकार इस विमान को स्क्रैप के रूप में बेचने के लिए नए सिरे से EOI जारी करने की तैयारी कर रही है। पहली बिक्री प्रक्रिया में प्रस्ताव नहीं मिलने के बाद विमान की बिक्री का मामला एक बार फिर नए सिरे से शुरू किया जाएगा।
EOI में नहीं आया एक भी प्रस्ताव
राज्य सरकार ने क्षतिग्रस्त विमान की बिक्री के लिए 7 अगस्त को EOI जारी किया था। इसके माध्यम से इच्छुक कंपनियों और फर्मों से ऑनलाइन प्रस्ताव आमंत्रित किए गए थे। प्रस्ताव जमा करने की अंतिम तारीख 17 अगस्त निर्धारित की गई थी।
निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद भी विमान को खरीदने के लिए कोई प्रस्ताव सामने नहीं आया। इसके बाद अब सरकार ने नए सिरे से बिक्री प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की है।
सरकार की कोशिश है कि अगली EOI प्रक्रिया के माध्यम से किसी इच्छुक खरीदार तक पहुंचा जा सके और लंबे समय से एयरबेस पर खड़े इस क्षतिग्रस्त विमान का निपटारा किया जा सके।
करीब ₹65 करोड़ में खरीदा गया था विमान
मध्यप्रदेश सरकार ने यह विमान सितंबर 2020 में अमेरिकी कंपनी Textron Aviation से करीब 65 करोड़ रुपये की लागत से खरीदा था। यह विमान राज्य सरकार के महत्वपूर्ण विमानों में शामिल था।
हालांकि खरीद के करीब आठ महीने बाद ही विमान हादसे का शिकार हो गया। 6 मई 2021 को लैंडिंग के दौरान विमान का अगला हिस्सा रनवे पर लगे अरेस्टर बैरियर से टकरा गया। टक्कर के कारण विमान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और इसके बाद से इसका संचालन नहीं हो सका।
हादसे के बाद पायलट पर हुई कार्रवाई
विमान दुर्घटना के बाद मामले की जांच की गई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, DGCA ने हादसे के लिए पायलट माजिद अख्तर को जिम्मेदार माना था और उनका फ्लाइंग लाइसेंस निलंबित किया गया था।
राज्य सरकार की ओर से भी पायलट को निलंबित किया गया और बाद में उनकी सेवाएं लेना बंद कर दिया गया।
विमान दुर्घटना के कारणों और उससे जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच के बाद विमान को दोबारा उपयोग में लाने के बजाय इसे बिक्री के लिए रखने की प्रक्रिया शुरू की गई।
दुर्घटना के समय विमान का बीमा नहीं था
इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया था कि दुर्घटना के समय विमान का बीमा नहीं था। यानी हादसे के बाद विमान को हुए नुकसान की भरपाई बीमा के माध्यम से नहीं हो सकी।
बताया गया है कि दुर्घटना के समय तक विमान ने केवल 208 घंटे की उड़ान भरी थी और इसकी 204 लैंडिंग हुई थीं। इतने कम संचालन के बाद विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और लंबे समय से उपयोग में नहीं है।
₹6 करोड़ रखा गया था बेस प्राइस
पिछली EOI में सरकार ने दुर्घटनाग्रस्त विमान के लिए 6 करोड़ रुपये का बेस प्राइस निर्धारित किया था। इसके अलावा स्टेट हैंगर में रखे विमान के स्पेयर पार्ट्स के लिए 1 करोड़ रुपये का बेस प्राइस तय किया गया था।
इस तरह सरकार ने विमान और संबंधित स्पेयर पार्ट्स को बिक्री प्रक्रिया में शामिल किया था। हालांकि तय समय सीमा तक कोई खरीदार सामने नहीं आया।
अब सरकार नए सिरे से EOI जारी करने की तैयारी कर रही है। नई प्रक्रिया में बेस प्राइस या अन्य शर्तों में कोई बदलाव किया जाएगा या नहीं, यह नई EOI जारी होने के बाद स्पष्ट होगा।
लंबे समय से एयरबेस पर खड़ा है विमान
हादसे के बाद से यह विमान ग्वालियर के महाराजपुरा एयरबेस पर खड़ा है। वर्षों से उपयोग में नहीं आने के कारण विमान का मामला अब बिक्री और निपटारे की प्रक्रिया तक पहुंच गया है।
सरकार के सामने चुनौती यह है कि विमान को उचित कीमत पर बेचा जाए और लंबे समय से खड़े विमान तथा उसके स्पेयर पार्ट्स का नियमानुसार निपटारा किया जा सके।
अब दोबारा बिक्री प्रक्रिया पर नजर
पहली EOI में कोई प्रस्ताव नहीं आने के बाद अब सभी की नजर सरकार की अगली बिक्री प्रक्रिया पर है। नई EOI में संभावित खरीदारों के लिए क्या शर्तें रखी जाएंगी और विमान की कीमत में कोई बदलाव होगा या नहीं, यह महत्वपूर्ण रहेगा।
सरकार की ओर से नई EOI जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस बार कितनी कंपनियां या फर्में विमान खरीदने में रुचि दिखाती हैं।
₹65 करोड़ की खरीद से ₹6 करोड़ के बेस प्राइस तक
मध्यप्रदेश सरकार ने जिस विमान को वर्ष 2020 में करीब ₹65 करोड़ में खरीदा था, वह महज कुछ महीनों के भीतर हादसे के बाद उपयोग से बाहर हो गया। अब वर्षों बाद उसी विमान को स्क्रैप के रूप में बेचने की प्रक्रिया चल रही है।
पहली EOI में इसका बेस प्राइस ₹6 करोड़ रखा गया था, लेकिन कोई खरीदार सामने नहीं आया। ऐसे में अब नए सिरे से बिक्री प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की जा रही है।
फिलहाल विमान महाराजपुरा एयरबेस पर खड़ा है और सरकार की अगली EOI के बाद ही इसकी बिक्री को लेकर तस्वीर साफ होगी।
