मिथिलेश कैमरे इंदौर संभागीय अध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं। पारंपरिक लाठी खेल संघ की जिम्मेदारी मिलने के बाद वे इंदौर संभाग के 8 जिलों में संगठन का विस्तार और युवाओं को लाठी खेल से जोड़ने का कार्य करेंगे।
बड़ी जिम्मेदारी: मिथिलेश कैमरे बने पारंपरिक लाठी खेल संघ के इंदौर संभागीय अध्यक्ष, 8 जिलों में बढ़ाएंगे पारंपरिक खेल की ताकत
रिपोर्टर – दैनिक स्वराज वाणी, इंदौर
इंदौर। मिथिलेश कैमरे इंदौर संभागीय अध्यक्ष के रूप में पारंपरिक लाठी खेल संघ, मध्य प्रदेश की जिम्मेदारी संभालेंगे। संघ की कार्यकारिणी समिति की बैठक में सर्वसम्मति से मिथिलेश कैमरे को इंदौर संभाग अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया है। उनके खेल संगठनात्मक अनुभव, नेतृत्व क्षमता और पारंपरिक लाठी खेल के प्रति समर्पण को देखते हुए यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।
संघ के अनुसार मिथिलेश कैमरे से अपेक्षा की गई है कि वे संगठन के उद्देश्यों, मूल्यों और परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाने के साथ इंदौर संभाग में लाठी खेल की गतिविधियों का संचालन, विस्तार और सुदृढ़ीकरण करेंगे। इसके साथ ही अधिक से अधिक युवाओं को पारंपरिक लाठी खेल से जोड़ने की दिशा में काम करेंगे।
मिथिलेश कैमरे इंदौर संभागीय अध्यक्ष के रूप में आठ जिलों में करेंगे कार्य
नई जिम्मेदारी के तहत अब संभाग के अलीराजपुर, बड़वानी, बुरहानपुर, धार, इंदौर, झाबुआ, खंडवा और खरगोन सहित आठ जिलों में पारंपरिक लाठी संघ की नियुक्तियां कर संगठन को मजबूत करने का कार्य किया जाएगा।
पारंपरिक लाठी खेल संघ, मध्य प्रदेश, ट्रेडिशनल लाठी स्पोर्ट्स फेडरेशन-इंडिया से संबद्ध है। साथ ही इंटरनेशनल लाठी फेडरेशन, एशियन लाठी फेडरेशन एवं साउथ एशियन लाठी फेडरेशन का सदस्य है। संघ को विश्वास है कि मिथिलेश कैमरे के नेतृत्व में जिस तरह इंदौर जिला संगठन ने नई ऊंचाइयां प्राप्त की हैं, उसी तरह अब इंदौर संभाग में भी संगठन और पारंपरिक लाठी खेल को नई पहचान मिलेगी।
25 वर्षों से ताइक्वांडो और खेल क्षेत्र में योगदान
मिथिलेश कैमरे पिछले करीब 25 वर्षों से ताइक्वांडो एवं खेल के क्षेत्र में योगदान दे रहे हैं। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय कोच की भूमिका निभाते हुए उन्होंने सैकड़ों खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया है। उनके द्वारा प्रशिक्षित खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में पदक प्राप्त कर चुके हैं।
मिथिलेश कैमरे स्वयं भी भारतीय पैरा टीम के दल का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। खेल के क्षेत्र में लंबे अनुभव के कारण उनकी नई नियुक्ति को पारंपरिक लाठी खेल के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ताइक्वांडो ट्रेनिंग सेंटर और रविदास व्यायाम शाला से भी जुड़े हैं कैमरे
वर्तमान में मिथिलेश कैमरे इंदौर में ताइक्वांडो ट्रेनिंग सेंटर का संचालन कर रहे हैं और स्कूल में भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसके अतिरिक्त वे सार्वजनिक श्री रविदास व्यायाम शाला के अध्यक्ष पद पर रहते हुए संस्था का संचालन कर रहे हैं।उनके द्वारा ताइक्वांडो की राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जा चुका है। खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें कई पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।
इंदौर के 65 अखाड़ों के खिलाड़ियों को मिल सकता है बड़ा मंच
इंदौर शहर में करीब 65 अखाड़े संचालित होते हैं। इनके खिलाड़ी वर्तमान में मुख्य रूप से वर्ष में एक बार अनंत चतुर्दशी के अवसर पर अपनी कला और खेल कौशल का प्रदर्शन करते हैं। मिथिलेश कैमरे की नियुक्ति के बाद इन खिलाड़ियों को जिला, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की लाठी प्रतियोगिताओं से जोड़ने की दिशा में काम होने की उम्मीद है।इससे पारंपरिक अखाड़ों में अभ्यास करने वाले युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए बड़ा प्रतिस्पर्धात्मक मंच मिल सकेगा और पारंपरिक लाठी खेल को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में भी मदद मिलेगी।
राष्ट्रीय प्रतियोगिता में एक स्वर्ण और दो रजत पदक
हाल ही में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में इंदौर की सार्वजनिक श्री रविदास व्यायाम शाला के जांबाज खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक स्वर्ण और दो रजत पदक हासिल किए हैं। इस उपलब्धि ने इंदौर के पारंपरिक खिलाड़ियों की क्षमता को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित किया है।अब मिथिलेश कैमरे इंदौर संभागीय अध्यक्ष के रूप में अलीराजपुर, बड़वानी, बुरहानपुर, धार, इंदौर, झाबुआ, खंडवा और खरगोन में संगठनात्मक नियुक्तियां कर पारंपरिक लाठी खेल संघ की गतिविधियों को आगे बढ़ाने का कार्य करेंगे।
रमेश मैदोला, आकाश विजयवर्गीय और गोलू शुक्ला ने दी बधाई
मिथिलेश कैमरे की नियुक्ति पर मध्य प्रदेश ओलंपिक संघ के अध्यक्ष रमेश मैदोला, आकाश विजयवर्गीय, पारंपरिक लाठी संघ के प्रदेश अध्यक्ष गोलू शुक्ला और श्री रविदास व्यायाम शाला के उस्ताद कमल पाल ने बधाई दी है।उक्त जानकारी पारंपरिक लाठी संघ के प्रदेश महासचिव मनोज बजाज ने दी।
