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आचार्य श्री विशुद्धसागर जी प्रवचन: जीवन बदल देंगे गुरु वाणी के ये 5 संदेश, बोले- समय की कीमत करो

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Published On: 4 September 2026

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आचार्य श्री विशुद्धसागर जी प्रवचन में समय, कर्म, अहिंसा और सुसंगति के 5 महत्वपूर्ण संदेश दिए। दिल्ली के ऋषभोदय में गुरुदेव ने कहा- समय की कीमत करो, समय तुम्हारी कीमत करेगा।

समय की कीमत करो, समय तुम्हारी कीमत करेगा: आचार्य श्री विशुद्धसागर जी

ऋषभोदय दिल्ली की धर्मसभा में गुरु वाणी, बोले- कुसंगति छोड़ सुसंगति अपनाएं, स्पर्धा में नहीं श्रद्धा में जिएं

राजेश जैन दद्दू
दिल्ली।

दिल्ली के ऋषभोदय में विराजित दिगम्बर जैन पट्टाचार्य परम पूज्य आचार्य श्री विशुद्धसागर जी गुरुदेव ने शुक्रवार, 4 सितंबर को आयोजित धर्मसभा में जीवन, कर्म, समय, मृत्यु और संगति के महत्व पर प्रेरणादायी प्रवचन दिए। आचार्य श्री ने कहा कि मनुष्य को समय की कीमत समझनी चाहिए, क्योंकि “समय की कीमत करो, समय तुम्हारी कीमत करेगा।” जीवन में सही समय पर किया गया कार्य ही सिद्धि और सफलता प्रदान करता है।

विनाश काल में विपरीत हो जाती है बुद्धि

आचार्य श्री ने कहा कि जब व्यक्ति के अशुभ कर्मों का उदय और विनाश का समय आता है तो उसकी बुद्धि विपरीत होने लगती है। पुण्य क्षीण होने पर व्यक्ति के विचार भी निम्न होने लगते हैं। उसके भाव और भाषा दोनों अशुभ होने लगते हैं।

उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति सज्जनों को सताता है, वह शीघ्र ही अपने पुण्य का क्षय कर लेता है। इसलिए मनुष्य को अपने आचरण, विचार और वाणी के प्रति सदैव सजग रहना चाहिए।

‘सबके दिन एक जैसे नहीं रहते’

आचार्य श्री विशुद्धसागर जी ने जीवन की नश्वरता का संदेश देते हुए कहा कि सबके दिन एक जैसे नहीं होते। नारायण श्रीकृष्ण ने कभी राज्य किया, लेकिन वे भी इस संसार में नहीं रहे। जो कभी भव्य महल हुआ करते थे, आज उनमें से अनेक खंडहर दिखाई देते हैं।

उन्होंने भगवान श्रीराम और भगवान महावीर वर्धमान का उल्लेख करते हुए कहा कि मृत्यु किसी के साथ पक्षपात नहीं करती। जो जन्मा है, उसकी मृत्यु निश्चित है। इसलिए मनुष्य को अहंकार और इठलाने के बजाय अपने चित्त को संभालना चाहिए।

किसी को मत सताओ, समय बदलते देर नहीं लगती

गुरुदेव ने अहिंसा का संदेश देते हुए कहा कि किसी को मत सताओ, अन्यथा भविष्य में तुम्हें भी किसी के द्वारा सताया जा सकता है। किसी को मत मारो, क्योंकि आज जो बलवान है वह भविष्य में बलहीन भी हो सकता है।

उन्होंने कहा कि समय बदलते देर नहीं लगती और पलभर में परिस्थितियां बदल सकती हैं। मृत्यु निकट आने पर व्यक्ति को पलक उठाने में भी ताकत लगानी पड़ती है। इसलिए शक्ति और सामर्थ्य मिलने पर उसका दुरुपयोग नहीं करना चाहिए।

समय पर किया कार्य ही देता है सफलता

आचार्य श्री ने समय को सिद्धि का सोपान बताते हुए कहा कि जो समय की कीमत करता है, दुनिया भी उसी की कीमत करती है। जो समय के महत्व को नहीं समझता और सही समय पर नहीं संभलता, उसे जीवनभर पछताना पड़ सकता है।

उन्होंने अनुशासित जीवन का संदेश देते हुए कहा कि समय पर भोजन करें, समय पर विश्राम करें, समय पर उठें और समय देखकर बोलें। समय पर किया गया भोजन अमृत के समान है, जबकि असमय किया गया भोजन विष के समान हो सकता है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि समय पर फसल बोने पर ही अच्छी फसल मिलती है और स्वाति नक्षत्र में सीप में गिरी पानी की बूंद मोती बन जाती है।

‘स्पर्धा में मत जियो, श्रद्धा में जियो’

आचार्य श्री विशुद्धसागर जी ने सुसंगति का महत्व बताते हुए कहा कि यदि अपनी गति सुधारनी है तो अच्छी संगति करनी चाहिए। जो ज्येष्ठ पुरुषों और साधु-महात्माओं की संगति करता है, उसके जीवन और परिणामों में सकारात्मक परिवर्तन आता है।

उन्होंने श्रद्धालुओं को संदेश दिया कि कुसंगति का त्याग करें और सुसंगति प्राप्त करें। स्पर्धा में मत जियो, श्रद्धा में जियो। व्यर्थ के प्रपंचों में उलझकर समय नष्ट करने के बजाय समय बचाकर जीवन में आगे बढ़ना चाहिए।

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