साहित्य जगत के पितामह जगदीश मित्तल के निधन से उप्र में शोक की लहर, मेरठ की संस्थाओं ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
मेरठ (उत्तर प्रदेश): भारतीय साहित्य एवं काव्य जगत को एक नई दिशा देने वाले ‘राष्ट्रीय कवि संगम’ के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जगदीश मित्तल जी का कल दिल्ली में निधन हो गया। उनके देवलोकगमन की सूचना मिलते ही उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश के साहित्यिक और सांस्कृतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई। विशेष रूप से मेरठ की तमाम सामाजिक और साहित्यिक संस्थाओं में गहरा दुख व्याप्त है।
साहित्यकारों ने उनके निधन को हिंदी काव्य-परंपरा और साहित्यिक संगठन तंत्र के लिए एक अपूरणीय क्षति करार दिया है।
साहित्यिक मंचों के शिल्पी थे जगदीश मित्तल: मयंक अग्रवाल
राष्ट्रीय कवि संगम (मेरठ प्रांत) द्वारा जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से संगठन के सभी पदाधिकारियों एवं कवियों ने अपनी गहरी शोक संवेदनाएं व्यक्त कीं।
राष्ट्रीय कवि संगम (मेरठ प्रांत) के अध्यक्ष श्री मयंक अग्रवाल और पश्चिम उत्तर प्रदेश के प्रभारी श्री शील वर्धन ने संयुक्त रूप से कहा कि जगदीश मित्तल जी ने देश के कोने-कोने से युवा कवियों को खोजकर उन्हें राष्ट्रीय मंच प्रदान करने का ऐतिहासिक कार्य किया। वे केवल एक संगठनकर्ता नहीं, बल्कि हजारों नवोदित कवियों के मार्गदर्शक थे।
इस अवसर पर संगठन की ओर से श्रीमती कोमल रस्तोगी, श्री प्रशांत और श्री विमल ग्रोवर सहित कई गणमान्य साहित्यकारों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखकर ईश्वर से प्रार्थना की।
युवाओं के प्रेरणास्रोत और समाज को जोड़ने वाला व्यक्तित्व: अतिवीर जैन ‘पराग’
अखिल भारतीय राष्ट्रीय साहित्य परिषद के संस्थापक राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व उपनिदेशक (रक्षा मंत्रालय), कवि अतिवीर जैन ‘पराग’ ने भी एक पृथक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर गहरा दुख व्यक्त किया।
मित्तल जी के व्यक्तित्व और कृतित्व को याद करते हुए अतिवीर जैन ‘पराग’ ने कहा:
“आदरणीय जगदीश मित्तल जी अत्यंत सौम्य, सरस और विनम्र स्वभाव के धनी थे। वे हमेशा युवाओं को आगे बढ़ाने और साहित्य के माध्यम से समाज को एक सूत्र में पिरोने के लिए तत्पर रहते थे। उनका जाना साहित्य संसार के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत है। उनकी कमी को पूरा कर पाना असंभव होगा।”
मेरठ के गणमान्य नागरिकों और साहित्यकारों ने जताया दुख
जगदीश मित्तल जी के निधन पर मेरठ क्षेत्र के कई प्रबुद्ध नागरिकों, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। शोक व्यक्त करने वालों में मुख्य रूप से श्री विपिन गोयल, श्री संजय शर्मा, श्री संजय जैन और श्री राम लखन पटेल शामिल रहे।
सभी ने एक स्वर में कहा कि राष्ट्रीय कवि संगम के माध्यम से मित्तल जी ने हिंदी भाषा, राष्ट्रवाद और काव्य संस्कृति की जो अलख जगाई है, उसे सदैव याद रखा जाएगा। उनकी स्मृतियां और उनके द्वारा स्थापित संगठन आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे।
