शहडोल के सरकारी स्कूल में बच्चों से कराई छज्जे की सफाई, बारिश के बीच जोखिम भरे काम का वीडियो वायरल
गोरतरा ग्राम पंचायत के प्राथमिक विद्यालय का मामला, ऊंचाई पर चढ़े दिखाई दिए बच्चे; सुरक्षा व्यवस्था और जिम्मेदारों की भूमिका पर उठे सवाल
शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच एक सरकारी स्कूल का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में स्कूल में पढ़ने वाले कुछ बच्चे भवन की छत और छज्जे पर चढ़कर सफाई करते दिखाई दे रहे हैं। बारिश के दौरान बच्चों से ऊंचाई पर जोखिम भरा काम कराए जाने के आरोप ने विद्यालय प्रबंधन और शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह मामला जिले की गोरतरा ग्राम पंचायत स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय का बताया जा रहा है। वायरल वीडियो के अनुसार, बच्चों से स्कूल की छत की दीवार और छज्जे के आसपास जमा गंदगी साफ कराई जा रही थी। हालांकि, वीडियो कब बनाया गया और बच्चों को सफाई करने के लिए किसने कहा, इसकी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
बारिश के बीच छज्जे पर चढ़े दिखाई दिए बच्चे
वायरल वीडियो में कथित रूप से छोटे बच्चे स्कूल भवन के ऊंचे हिस्से पर खड़े होकर सफाई करते नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि बारिश के कारण छत और छज्जे के पास गंदगी जमा हो गई थी, जिसे हटाने के लिए बच्चों को ऊंचाई पर चढ़ाया गया।
बारिश के दौरान छत और छज्जे की सतह पर फिसलन बढ़ जाती है। ऐसे में बच्चों का वहां खड़े होकर सफाई करना बेहद जोखिम भरा हो सकता था। संतुलन बिगड़ने या पैर फिसलने की स्थिति में गंभीर दुर्घटना हो सकती थी। गनीमत रही कि वायरल वीडियो से संबंधित किसी दुर्घटना की जानकारी सामने नहीं आई है।
बच्चों की सुरक्षा को लेकर उठे गंभीर सवाल
विद्यालय वह स्थान होता है जहां अभिभावक अपने बच्चों को पढ़ाई और सुरक्षित वातावरण की उम्मीद के साथ भेजते हैं। ऐसे में बच्चों से ऊंचाई पर चढ़ाकर सफाई कराना विद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी और सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े करता है।
यदि विद्यालय भवन की सफाई जरूरी थी तो यह कार्य प्रशिक्षित सफाई कर्मचारी, पंचायत कर्मचारी या अन्य जिम्मेदार व्यक्ति से कराया जाना चाहिए था। आवश्यक सुरक्षा उपकरणों और निगरानी के बिना बच्चों से ऐसा काम कराना उनकी जान को खतरे में डाल सकता है।
सवाल यह भी उठ रहा है कि जब बच्चे छज्जे पर सफाई कर रहे थे, उस दौरान विद्यालय के शिक्षक और अन्य कर्मचारी कहां थे। बच्चों को ऊंचाई पर जाने से रोका क्यों नहीं गया और यदि उन्हें सफाई के लिए कहा गया था तो यह निर्देश किसने दिया था।
भारी बारिश से प्रभावित है शहडोल का जनजीवन
शहडोल जिले में भारी बारिश के कारण कई क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित है। प्रशासन लगातार नागरिकों से नदी-नालों, जलभराव वाले क्षेत्रों और कमजोर इमारतों से दूर रहने की अपील कर रहा है। ऐसे समय में सरकारी विद्यालय के बच्चों को छत या छज्जे पर चढ़ते देखे जाने की घटना ने चिंता और बढ़ा दी है।
बारिश के मौसम में स्कूल भवनों की छत, सीढ़ियां और खुले हिस्से सामान्य दिनों की तुलना में अधिक खतरनाक हो सकते हैं। इसके अलावा पुराने भवनों में दीवार या छज्जा कमजोर होने की आशंका भी बनी रहती है। इसलिए विद्यार्थियों को ऐसी जगहों पर जाने से रोकना विद्यालय प्रबंधन की प्राथमिक जिम्मेदारी मानी जाती है।
अभिभावकों में घटना को लेकर नाराजगी
वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद बच्चों के अभिभावकों और स्थानीय लोगों के बीच नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि पढ़ाई करने वाले बच्चों से जोखिम भरा सफाई कार्य कराया जाना स्वीकार नहीं किया जा सकता।
अभिभावकों की चिंता है कि यदि सफाई के दौरान कोई बच्चा नीचे गिर जाता तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता। लोगों ने शिक्षा विभाग से घटना की निष्पक्ष जांच कराने और बच्चों को छज्जे पर भेजने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति की पहचान करने की मांग की है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि विद्यालयों में स्वच्छता आवश्यक है, लेकिन उसके लिए बच्चों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। सफाई और भवन के रखरखाव के लिए उचित व्यवस्था करना संबंधित विभाग और स्थानीय प्रशासन का दायित्व है।
शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल
इस मामले ने सरकारी विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा के लिए निर्धारित दिशा-निर्देशों के पालन को लेकर भी प्रश्न खड़े किए हैं। शिक्षा विभाग की ओर से समय-समय पर विद्यालयों में सुरक्षित वातावरण बनाए रखने के निर्देश दिए जाते हैं। इसके बावजूद यदि बच्चों से ऊंचाई पर चढ़कर सफाई कराई गई तो यह निर्देशों की अनदेखी मानी जा सकती है।
अब यह जांच का विषय है कि विद्यालय में नियमित सफाई की क्या व्यवस्था है, भवन की देखरेख की जिम्मेदारी किसकी है और बच्चों से सफाई कराने की नौबत क्यों आई। यह भी देखा जाना जरूरी है कि इस काम के लिए किसी शिक्षक या कर्मचारी ने निर्देश दिया था अथवा बच्चे स्वयं छज्जे पर चढ़ गए थे।
वायरल वीडियो की सत्यता की जांच जरूरी
सोशल मीडिया पर वायरल किसी वीडियो के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले उसकी सत्यता, स्थान और समय की पुष्टि आवश्यक है। संबंधित वीडियो गोरतरा ग्राम पंचायत के शासकीय प्राथमिक विद्यालय का बताया जा रहा है, लेकिन शिक्षा विभाग अथवा जिला प्रशासन का विस्तृत आधिकारिक बयान अभी सामने नहीं आया है।
जांच में वीडियो की तारीख, उसमें दिखाई दे रहे स्थान, मौजूद कर्मचारियों और पूरे घटनाक्रम की परिस्थितियों का सत्यापन किया जाना चाहिए। संबंधित शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों के बयान भी लिए जा सकते हैं। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बच्चों को सफाई के लिए किसने कहा था और मामले में किस स्तर पर लापरवाही हुई।
जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मामले का संज्ञान लेकर जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि बच्चों से जान जोखिम में डालकर सफाई कराने का आरोप सही पाया जाता है तो जिम्मेदार कर्मचारियों या अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
इसके साथ ही जिले के सभी सरकारी विद्यालयों में भवन और छात्र सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं की समीक्षा कराने की भी जरूरत बताई जा रही है। स्कूल परिसर में सफाई, छत से पानी की निकासी और भवन के रखरखाव के लिए कर्मचारियों की स्पष्ट जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
फिलहाल वायरल वीडियो ने शिक्षा व्यवस्था के सामने एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा कर दिया है—जिस विद्यालय में बच्चों को सुरक्षित भविष्य की शिक्षा दी जाती है, वहां उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? अब जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की जांच तथा आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
