भोपाल में 190 प्रतिष्ठानों की सीलिंग के बाद थमी कार्रवाई, रहवासियों ने सुप्रीम कोर्ट में सौंपे दस्तावेज
तीन दिनों तक चली कार्रवाई के चौथे दिन एक भी प्रतिष्ठान सील नहीं, 15 सितंबर को होगी मामले की अगली सुनवाई
भोपाल। राजधानी भोपाल के आवासीय क्षेत्रों में संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ नगर निगम की ओर से की जा रही सीलिंग की कार्रवाई अचानक थम गई है। नगर निगम ने लगातार तीन दिनों में शहर के कुल 190 प्रतिष्ठानों को सील किया था, लेकिन चौथे दिन किसी भी दुकान या व्यावसायिक संस्थान पर कार्रवाई नहीं की गई। सीलिंग और नोटिस के विरोध में व्यापारियों के बढ़ते आक्रोश के बीच इस कार्रवाई के रुकने से कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
दूसरी ओर, नगर निगम, नगरीय प्रशासन विभाग और रहवासी पक्ष से जुड़े लोग अपना-अपना पक्ष रखने के लिए सर्वोच्च न्यायालय पहुंचे हैं। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को प्रस्तावित है। इस दौरान नगर निगम को अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी न्यायालय के समक्ष पेश करनी है।
तीन दिनों में 190 प्रतिष्ठानों पर लगा ताला
नगर निगम ने 31 अगस्त को शहर में बड़े स्तर पर कार्रवाई करते हुए कुल 109 प्रतिष्ठानों को बंद कराया था। इसके अगले दिन एक सितंबर को 61 प्रतिष्ठानों पर सीलिंग की कार्रवाई की गई। दो सितंबर को अभियान की गति और धीमी हो गई तथा सिर्फ 20 प्रतिष्ठानों को सील किया गया।
इस प्रकार तीन दिनों में सील किए गए प्रतिष्ठानों की संख्या बढ़कर 190 हो गई। लेकिन तीन सितंबर को नगर निगम की किसी भी टीम ने शहर में सीलिंग नहीं की। अधिकारियों के अनुसार, हाईकोर्ट में जमीन से जुड़े मामलों के कारण निगम की टीम और अधिकारी व्यस्त थे, जिसके चलते सीलिंग अभियान नहीं चलाया जा सका।
हालांकि, व्यापारी संगठनों और स्थानीय लोगों के विरोध के बीच अचानक कार्रवाई रुकने को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि सीलिंग के कारण उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है और कर्मचारियों के सामने भी रोजगार का संकट पैदा हो गया है।
छोटे व्यापारियों पर कार्रवाई का आरोप
याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने नगर निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे पक्षपातपूर्ण बताया है। उनका कहना है कि रहवासियों की ओर से अरेरा कॉलोनी में संचालित कथित अवैध मॉल और बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की शिकायत की गई थी, लेकिन उन पर अब तक प्रभावी सीलिंग कार्रवाई नहीं की गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरी ओर छोटे व्यापारियों और दुकानदारों के प्रतिष्ठानों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी को लेकर रहवासियों और प्रभावित पक्षों में नाराजगी है। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट पहुंचकर संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं और निगम की कथित पक्षपातपूर्ण कार्रवाई की जांच कराने की मांग की है।
उनका कहना है कि यदि जांच में अधिकारियों की लापरवाही या पक्षपात सामने आता है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जानी चाहिए। अब सर्वोच्च न्यायालय के सामने दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और तर्कों पर विचार किया जाएगा।
दिल्ली पहुंचे नगरीय प्रशासन और नगर निगम के अधिकारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए नगरीय आवास एवं प्रशासन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और भोपाल नगर निगम से जुड़े अधिकारी दिल्ली में मौजूद हैं। बताया जा रहा है कि राज्य सरकार और नगर निगम सर्वोच्च न्यायालय में अपना पक्ष मजबूती से प्रस्तुत करने की तैयारी कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों ने सरकार और नगर निगम की ओर से कानूनी पक्ष रखने के लिए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से भी मुलाकात की है। मामले की अगली सुनवाई के दौरान नगर निगम न्यायालय से अतिरिक्त समय मांग सकता है।
अधिकारियों की कोशिश है कि आवासीय क्षेत्रों में चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, छोटे दुकानदारों और स्थानीय रहवासियों के हितों के बीच कोई व्यावहारिक समाधान निकाला जा सके। हालांकि, इस पर अंतिम दिशा सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगी।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने समाधान निकालने का दिया भरोसा
प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भोपाल में चल रही सीलिंग की कार्रवाई को लेकर कहा कि इससे शहर के व्यापारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि नगरीय प्रशासन विभाग के सभी वरिष्ठ अधिकारी इस समय दिल्ली में हैं और वरिष्ठ कानूनी विशेषज्ञों के साथ मामले पर चर्चा की जा रही है।
मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि सरकार ऐसा रास्ता तलाशने का प्रयास करेगी, जिससे भोपाल के व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों को नुकसान न उठाना पड़े। सरकार मामले के कानूनी पक्ष के साथ शहर की व्यावहारिक परिस्थितियों पर भी विचार कर रही है।
उन्होंने भोपाल के मास्टर प्लान को लेकर भी महत्वपूर्ण बयान दिया। विजयवर्गीय के अनुसार, राजधानी के मास्टर प्लान पर चर्चा जारी है और इस संबंध में जल्द निर्णय लिया जा सकता है। सीलिंग की कार्रवाई के बीच मास्टर प्लान को लेकर सरकार के स्तर पर चल रही चर्चा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आठ हजार से अधिक प्रतिष्ठानों को जारी हुए नोटिस
भोपाल नगर निगम ने पिछले एक महीने के दौरान आठ हजार से अधिक दुकानदारों और प्रतिष्ठान संचालकों को नोटिस जारी किए हैं। इनमें से कई व्यापारियों को 24 घंटे के भीतर आवासीय भवन में चल रही व्यावसायिक गतिविधियां बंद करने के निर्देश दिए गए थे।
नोटिस में कहा गया था कि निर्धारित समय में व्यावसायिक गतिविधि बंद नहीं करने की स्थिति में संबंधित प्रतिष्ठान को सील कर दिया जाएगा। नगर निगम के निर्देश के बाद कई कारोबारियों ने अपने प्रतिष्ठानों के बाहर स्वेच्छा से दुकान बंद करने से संबंधित पोस्टर और बैनर लगा दिए।
व्यापारियों का कहना है कि अचानक नोटिस और सीलिंग के कारण उनके सामने आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। कई प्रतिष्ठान वर्षों से संबंधित क्षेत्रों में संचालित हो रहे हैं और वहां बड़ी संख्या में कर्मचारी काम करते हैं। ऐसे में व्यापारी सरकार से कानूनी और नीतिगत समाधान की मांग कर रहे हैं।
चार दिनों से नए नोटिस जारी नहीं
नगर निगम ने बड़ी संख्या में नोटिस जारी करने के बाद पिछले चार दिनों से नए नोटिस देना भी बंद कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि पहले जारी किए गए नोटिसों और संबंधित संपत्तियों के दस्तावेजों का परीक्षण किया जा रहा है।
जांच के दौरान यह देखा जा रहा है कि संबंधित भवन का स्वीकृत उपयोग क्या है, वहां किस प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि संचालित हो रही है और निर्माण नगर निगम से स्वीकृत नक्शे के अनुसार हुआ है या नहीं। दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट में चल रहा आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग का मामला
भोपाल के आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियों और कथित अवैध निर्माण से संबंधित मामले की सुनवाई सर्वोच्च न्यायालय में चल रही है। अगस्त के पहले सप्ताह में हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार द्वारा गठित 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी।
इसके साथ ही मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से दुकान संचालकों को मिले राहत आदेशों को भी निरस्त कर दिया गया था। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि उसके निर्देश पर चल रही जांच में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।
अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी। नगर निगम को सुनवाई के दौरान सीलिंग, नोटिस और अवैध व्यावसायिक गतिविधियों पर अब तक की गई कार्रवाई का विवरण प्रस्तुत करना है। इसी आदेश के बाद शहर में नोटिस और सीलिंग अभियान तेज किया गया था।
फिलहाल कार्रवाई अस्थायी रूप से थमी हुई दिखाई दे रही है। अब व्यापारियों, रहवासियों और नगर निगम की निगाहें 15 सितंबर को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। न्यायालय के अगले निर्देश से ही यह स्पष्ट होगा कि भोपाल में सीलिंग अभियान आगे जारी रहेगा या प्रभावित व्यापारियों और रहवासियों के लिए कोई वैकल्पिक रास्ता निकाला जाएगा।
