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पड़ाना : प्रशासन की अनदेखी से परेशान स्कूली बच्चों ने फावड़ा उठाकर सड़क के जानलेवा गड्ढे भरे, ग्रामीणों ने प्रयास की सराहना की।

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Published On: 4 September 2026
पड़ाना

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विभाग की अनदेखी से परेशान स्कूली बच्चों ने खुद भरे सड़क के गड्ढे

बारिश के बाद तारागंज-इकलेरा-बाबडल्या मार्ग की हालत बदहाल

संवाददाता :मनोज कुमार पुष्पद

पड़ाना। स्थानीय बाबडल्या गांव में सड़क की बदहाली ने ग्रामीणों और स्कूली बच्चों की परेशानी बढ़ा दी है। कुछ वर्षों पहले लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत बनाई गई तारागंज-इकलेरा-बाबडल्या सड़क बारिश के बाद जगह-जगह गहरे गड्ढों में तब्दील हो गई है। सड़क पर पानी और कीचड़ भर जाने के कारण आवागमन मुश्किल हो गया है। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूल आने-जाने वाले बच्चों को उठानी पड़ रही है।

ग्रामीणों के मुताबिक बारिश के दिनों में सड़क की स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि वाहन चालकों और राहगीरों को हर समय हादसे का डर बना रहता है। सड़क पर बने गहरे गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता। ऐसे में दोपहिया वाहन चालकों के साथ-साथ पैदल चलने वाले लोगों के लिए भी यह रास्ता जोखिम भरा हो गया है।

स्कूल जाने वाले बच्चों को हो रही सबसे ज्यादा परेशानी

बाबडल्या गांव से प्रतिदिन बड़ी संख्या में विद्यार्थी स्कूल आते-जाते हैं। बारिश के दौरान सड़क पर कीचड़ और पानी जमा होने के कारण बच्चों को स्कूल पहुंचने में काफी दिक्कत होती है। कई बार रास्ते में फिसलकर बच्चों के गिरने और चोटिल होने की घटनाएं भी सामने आती रही हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की स्थिति लंबे समय से खराब होने के बावजूद संबंधित विभाग की ओर से गड्ढों को भरने या सड़क की मरम्मत के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। इससे लोगों में नाराजगी है।

बच्चों को स्कूल जाने के दौरान होने वाली परेशानी को देखते हुए गांव के कुछ विद्यार्थियों ने खुद ही सड़क की स्थिति सुधारने का निर्णय लिया।

बच्चों ने उठाया फावड़ा और तगाड़ी

प्रशासन और विभागीय व्यवस्था की ओर से मदद का इंतजार करने के बजाय स्कूली बच्चों ने स्वयं सड़क के गड्ढे भरने की जिम्मेदारी उठाई। बच्चों ने सड़क के आसपास पड़े पत्थर और मलबे को एकत्र किया और उन्हें गड्ढों में डालकर रास्ते को अस्थायी रूप से चलने योग्य बनाया।

बच्चों ने फावड़ा और तगाड़ी की मदद से सड़क पर पड़े मलबे और पत्थरों को गड्ढों तक पहुंचाया। इसके बाद गड्ढों में पत्थर और मलबा डालकर उन्हें भरने का प्रयास किया गया।

इस काम में अभिषेक परमार, राम राजपूत, यशराज परमार, कृष्णा परमार और घनश्याम पुष्पद सहित अन्य बच्चों ने हिस्सा लिया। बच्चों ने अपनी सुरक्षा और स्कूल आने-जाने की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सड़क की तत्काल समस्या का अस्थायी समाधान करने का प्रयास किया।

जानलेवा गड्ढों को बनाया चलने लायक

बारिश के कारण सड़क पर बने गड्ढे कई जगह इतने गहरे हो गए थे कि उनमें दोपहिया वाहन फंसने का खतरा बना हुआ था। पानी भरने के बाद गड्ढों का अंदाजा नहीं लगने से दुर्घटना की आशंका और बढ़ जाती थी।

बच्चों द्वारा पत्थर और मलबा डालने के बाद कई गड्ढों को कुछ हद तक समतल किया गया। इससे लोगों को रास्ते से गुजरने में थोड़ी राहत मिली है। हालांकि यह व्यवस्था पूरी तरह अस्थायी है और सड़क की वास्तविक मरम्मत की जरूरत बनी हुई है।

ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों ने जो काम किया है, वह जिम्मेदार नागरिक होने का उदाहरण है, लेकिन सड़क की स्थायी मरम्मत की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की है। बच्चों द्वारा गड्ढे भरना विभागीय व्यवस्था का विकल्प नहीं हो सकता।

ग्रामीणों ने बच्चों के प्रयास की सराहना की

सड़क की खराब स्थिति से परेशान ग्रामीणों ने स्कूली बच्चों के प्रयास की सराहना की है। ग्रामीणों का कहना है कि जिन बच्चों को स्कूल जाने के लिए इस सड़क का रोज इस्तेमाल करना पड़ता है, उन्होंने अपनी परेशानी को दूर करने के लिए स्वयं आगे आकर काम किया।

ग्रामीणों ने कहा कि बच्चों ने जिस तरह से फावड़ा, तगाड़ी और पत्थरों की मदद से गड्ढे भरे, वह सराहनीय है। लेकिन सवाल यह भी है कि आखिर बच्चों को यह काम करने की जरूरत क्यों पड़ी।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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