ग्वालियर नगर निगम में संपत्तिकर रिकॉर्ड से छेड़छाड़ का आरोप, फर्जी रसीद से रजिस्ट्री; पूर्व अधिकारियों समेत चार पर FIR
ई-नगरपालिका की लॉग रिपोर्ट से खुला मामला, प्रॉपर्टी ID, मालिक का नाम, कॉलोनी और निर्मित क्षेत्रफल बदलने का आरोप
ग्वालियर। ग्वालियर नगर निगम के संपत्तिकर रिकॉर्ड में कथित हेरफेर और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर संपत्ति की रजिस्ट्री कराने का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि नगर निगम के रिकॉर्ड में दर्ज एक संपत्ति की मूल प्रॉपर्टी आईडी में बदलाव कर दूसरी आईडी तैयार की गई। इसके बाद संपत्ति मालिक का नाम, कॉलोनी का विवरण और निर्मित क्षेत्रफल तक बदल दिया गया। बाद में कथित रूप से फर्जी संपत्तिकर रसीद के आधार पर संपत्ति की बिक्री और रजिस्ट्री भी करा दी गई।
नगर निगम की जांच और ई-नगरपालिका की लॉग रिपोर्ट में रिकॉर्ड से छेड़छाड़ से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आने के बाद विश्वविद्यालय थाना पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इनमें संपत्ति के विक्रेता और खरीदार के अलावा नगर निगम के एक निलंबित तथा एक सेवानिवृत्त अधिकारी का नाम भी शामिल है। पुलिस अब पूरे प्रकरण में अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
वार्ड क्रमांक 30 के टैगोर नगर की संपत्ति से जुड़ा मामला
यह मामला ग्वालियर नगर निगम के वार्ड क्रमांक 30 अंतर्गत टैगोर नगर स्थित एक संपत्ति से संबंधित है। शिकायतकर्ता सुरेश बनवानी के अनुसार, संबंधित संपत्ति की मूल संपत्तिकर आईडी 1000255876 थी। आरोप है कि इसी संपत्ति के लिए दूसरी आईडी 1000107294 का इस्तेमाल किया गया और कथित गलत दस्तावेजों के आधार पर नगर निगम के रिकॉर्ड में दूसरे व्यक्ति का नाम दर्ज कर दिया गया।
शिकायत मिलने के बाद नगर निगम स्तर पर मामले की जांच शुरू की गई। जांच के दौरान संपत्तिकर रिकॉर्ड, संबंधित दस्तावेजों और ई-नगरपालिका पोर्टल की गतिविधियों का परीक्षण किया गया। इसमें संपत्ति से संबंधित जानकारियों में अलग-अलग तारीखों पर बदलाव किए जाने की बात सामने आई।
करीब डेढ़ घंटे के भीतर बदला गया मालिक का नाम
नगर निगम की जांच में ई-नगरपालिका की लॉग रिपोर्ट महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, 20 मार्च 2025 को शाम 4 बजकर 17 मिनट से 5 बजकर 41 मिनट के बीच संबंधित संपत्ति के रिकॉर्ड में बदलाव किया गया था।
आरोप है कि इस अवधि के दौरान रिकॉर्ड में दर्ज मालिक का नाम विजय पुत्र राजाराम पाल से बदलकर जयनारायण पुत्र स्वर्गीय उदय सिंह कर दिया गया। इसके साथ ही संपत्ति से संबंधित कॉलोनी का नाम भी बदल दिया गया। जांच में यह भी सामने आया कि 28 मार्च 2025 को संपत्ति के निर्मित क्षेत्रफल में परिवर्तन किया गया था।
इन बदलावों के सामने आने के बाद यह सवाल खड़ा हुआ कि नगर निगम के आधिकारिक डिजिटल रिकॉर्ड में संशोधन किसके निर्देश पर और किन दस्तावेजों के आधार पर किया गया। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इन बदलावों के पीछे तकनीकी प्रक्रिया का दुरुपयोग हुआ या इसमें अन्य लोगों की भी मिलीभगत थी।
पूर्व अधिकारियों की यूजर ID के इस्तेमाल का आरोप
नगर निगम की जांच के अनुसार, रिकॉर्ड में किए गए बदलावों से जुड़ी लॉग रिपोर्ट में तत्कालीन सहायक राजस्व निरीक्षक एवं कर संग्राहक नरेंद्र कुशवाह की यूजर आईडी और तत्कालीन एपीटीओ महेंद्र शर्मा की ईएनपी 1.0 यूजर आईडी का उपयोग होना पाया गया।
इस आधार पर नगर निगम ने नरेंद्र कुशवाह को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। निगम के अनुसार, उनका जवाब 31 जुलाई 2026 को प्राप्त हुआ, लेकिन उसे संतोषजनक नहीं माना गया। नरेंद्र कुशवाह पहले से निलंबित बताए गए हैं, जबकि महेंद्र शर्मा नगर निगम की सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
हालांकि, पुलिस जांच पूरी होने और न्यायालय का निर्णय आने तक आरोपों को प्रमाणित नहीं माना जा सकता। पुलिस डिजिटल लॉग, दस्तावेजों और संबंधित अधिकारियों के बयानों के आधार पर वास्तविक जिम्मेदारी निर्धारित करेगी।
मई 2025 में संपत्ति बेचने का आरोप
जांच में यह भी सामने आया कि कथित रूप से रिकॉर्ड में बदलाव होने के बाद 15 मई 2025 को जयनारायण ने संबंधित संपत्ति अशोक सिंह पुत्र नन्हे सिंह, निवासी यमुना नगर, ग्वालियर को बेच दी। इस संपत्ति की बिक्री के दौरान जिस संपत्तिकर रसीद का उपयोग किया गया, वह जांच में संदिग्ध पाई गई।
नगर निगम के अनुसार, रजिस्ट्री में लगाई गई संपत्तिकर रसीद उसके कार्यालय से जारी नहीं हुई थी। इसी आधार पर आशंका जताई गई कि कथित रूप से फर्जी संपत्तिकर रसीद तैयार कर संपत्ति की बिक्री और रजिस्ट्री कराई गई। अब पुलिस यह पता लगा रही है कि रसीद किसने तैयार की, उसमें नगर निगम से संबंधित विवरण कहां से लिया गया और रजिस्ट्री की प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका रही।
नगर निगम ने पुलिस को सौंपे महत्वपूर्ण दस्तावेज
मामले की जांच के दौरान नगर निगम ने मूल संपत्तिकर रसीद, कथित फर्जी रसीद, संपत्ति का लेजर, रजिस्ट्री के दस्तावेज, टीसी, राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट और ई-नगरपालिका की प्रमाणित लॉग फाइल सहित कई महत्वपूर्ण दस्तावेज एकत्र किए।
निगमायुक्त के निर्देश पर नगर निगम के संपत्तिकर विभाग के कार्यालय अधीक्षक ने विश्वविद्यालय थाने में शिकायत दर्ज कराई। प्रारंभिक जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर पुलिस ने विक्रेता जयनारायण, खरीदार अशोक सिंह, तत्कालीन सहायक राजस्व निरीक्षक नरेंद्र कुशवाह और तत्कालीन एपीटीओ महेंद्र शर्मा के खिलाफ FIR दर्ज की है।
धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र सहित विभिन्न धाराओं में मामला
पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, पद के कथित दुरुपयोग और आपराधिक षड्यंत्र से संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है। जांच में आरोपियों से पूछताछ के साथ नगर निगम के डिजिटल रिकॉर्ड और दस्तावेजों का तकनीकी परीक्षण भी किया जा सकता है।
पुलिस के सामने सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि संपत्ति की प्रॉपर्टी आईडी और मालिक का नाम बदलने की प्रक्रिया किस स्तर पर शुरू हुई। इसके अलावा यह भी जांच का विषय है कि रिकॉर्ड में बदलाव के लिए उपलब्ध यूजर आईडी का इस्तेमाल संबंधित अधिकारियों ने स्वयं किया था या उनकी जानकारी के बिना किसी अन्य व्यक्ति ने इसका उपयोग किया।
अन्य लोगों की भूमिका की भी होगी जांच
पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कथित फर्जी संपत्तिकर रसीद किस माध्यम से बनाई गई और संपत्ति की रजिस्ट्री के दौरान उसकी सत्यता की जांच क्यों नहीं हो सकी। मामले में नगर निगम के अन्य कर्मचारियों, दस्तावेज तैयार करने वालों अथवा संपत्ति के सौदे से जुड़े लोगों की भूमिका सामने आने पर जांच का दायरा बढ़ सकता है।
संपत्तिकर रिकॉर्ड में कथित हेरफेर का यह मामला नगर निगम की डिजिटल व्यवस्था और आंतरिक निगरानी प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। फिलहाल पुलिस दस्तावेजों और तकनीकी साक्ष्यों की जांच कर रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।
