Indore अंडरग्राउंड मेट्रो रूट की रेंज में कई हेरिटेज इमारतें, धर्म स्थल और जल स्त्रोत भी, हाईकोर्ट में लगी याचिका
Indore। इंदौर शहर में इन दिनों मेट्रो को लेकर दो बड़ी गतिविधियां एक साथ चल रही हैं। एक तरफ जहां यलो लाइन पर मेट्रो रेल शुरू होने जा रही है, वहीं दूसरी ओर एयरपोर्ट से अंडरग्राउंड मेट्रो के लिए सुरंग बनाने का काम भी जल्द शुरू होने जा रहा है। इसी बीच एक महत्वपूर्ण और चिंताजनक जानकारी सामने आई है कि अंडरग्राउंड मेट्रो रूट की 200 मीटर की रेंज में शहर की कई ऐतिहासिक इमारतें, धार्मिक स्थल और बोरिंग जैसे जल स्त्रोत मौजूद हैं, जिसे लेकर अब विवाद खड़ा हो गया है।
नियमों से कम दूरी पर हैं संवेदनशील स्थल
नियमों के अनुसार ऐसे संवेदनशील एवं ऐतिहासिक स्थान मेट्रो रूट से कम से कम 300 मीटर की दूरी पर होने चाहिए, ताकि निर्माण कार्य के दौरान इन्हें किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे। लेकिन जानकारी के अनुसार, कई महत्वपूर्ण इमारतें और स्थल तय मानक से कहीं कम, यानी महज 200 मीटर की रेंज में स्थित हैं। हालांकि मेट्रो प्रबंधन ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि ये सभी स्थान निर्धारित सुरक्षित रेंज से बाहर ही हैं और इनसे किसी प्रकार का खतरा नहीं है।
लेकिन इसके बावजूद इस मुद्दे को लेकर विवाद थमा नहीं है। किशोर कोड़वानी नामक व्यक्ति ने इस संबंध में एमपी हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से आशंका जताई है कि अंडरग्राउंड मेट्रो रूट के निर्माण कार्य से आसपास की ऐतिहासिक इमारतों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। इस याचिका के दाखिल होने के बाद अब पूरे मामले पर हाईकोर्ट में सुनवाई होने की संभावना है।
दो चरणों में तैयार होगा अंडरग्राउंड मेट्रो रूट
जानकारी के अनुसार इंदौर में अंडरग्राउंड मेट्रो रेल का निर्माण कार्य कुल दो चरणों में पूरा किया जाएगा। इसका पहला चरण एयरपोर्ट से रीगल तक बनाया जाएगा, जिसके अंतर्गत करीब 9 किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड टनल का निर्माण किया जाएगा। इस पहले चरण के लिए टनल बनाने की मशीन को लेकर काम 22 सितंबर से एयरपोर्ट के नजदीकी क्षेत्र में शुरू होने जा रहा है, जिसकी तैयारियां अंतिम चरण में हैं।
वहीं दूसरा चरण खजराना से रीगल तक बनाया जाएगा, जिसमें करीब साढ़े तीन किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड सुरंग तैयार की जाएगी। इस दूसरे चरण के निर्माण कार्य के लिए फिलहाल टेंडर की प्रक्रिया जारी है, और जल्द ही इसे अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है।
Indore मेट्रो रूट की रेंज में आ रहीं ये प्रमुख ऐतिहासिक इमारतें
प्राप्त जानकारी के मुताबिक अंडरग्राउंड मेट्रो रूट की रेंज में इंदौर शहर की कई प्रतिष्ठित एवं ऐतिहासिक धरोहरें शामिल बताई जा रही हैं। इनमें शहर का गौरव माने जाने वाला राजवाड़ा, ऐतिहासिक छत्रियां, गांधी हॉल, रानी सराय, एमपी हाईकोर्ट और जिला कोर्ट की भव्य इमारतें, अहिल्या लाइब्रेरी तथा प्रसिद्ध हुकमचंद घंटाघर जैसी प्रमुख धरोहरें शामिल हैं। ये सभी स्थान न केवल इंदौर की ऐतिहासिक पहचान का हिस्सा हैं, बल्कि शहर के पर्यटन के दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
इसके साथ ही इस रेंज में कई धार्मिक स्थल भी शामिल बताए जा रहे हैं, जिनमें गोवर्धननाथ मंदिर, जानकीनाथ मंदिर, बड़ा गणपति मंदिर, छोटा गणपति मंदिर, गोपाल मंदिर, तेरापंथी जैन मंदिर तथा गायत्री मंदिर प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन धार्मिक स्थलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई है, ऐसे में यहां निर्माण कार्य को लेकर स्थानीय लोगों में भी चिंता का माहौल है।
रहवासी इलाकों में जल स्रोतों पर भी मंडरा रहा संकट
अंडरग्राउंड मेट्रो का यह रूट शहर के कई घनी आबादी वाले रहवासी इलाकों से होकर भी गुजरेगा। इनमें एमजी रोड, अहिल्या पल्टन, मल्हारगंज, जूनी इंदौर, रविंद्र नगर, तिलक नगर और सांई कृपा नगर जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। इन इलाकों में रहने वाले स्थानीय निवासियों ने वर्षों की मेहनत और खर्च से अपने घरों में बोरिंग एवं अन्य निजी जल स्रोत तैयार करवाए हैं। अब इन जल स्रोतों के भी मेट्रो रूट की रेंज में आने की आशंका जताई जा रही है, जिसे लेकर स्थानीय निवासियों में गहरा संशय और चिंता का माहौल बना हुआ है।
निवासियों का कहना है कि यदि अंडरग्राउंड निर्माण कार्य के दौरान उनके जल स्रोत प्रभावित होते हैं, तो इससे उन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में पानी की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इस संबंध में स्थानीय लोग प्रशासन से स्पष्ट जानकारी और उचित समाधान की मांग कर रहे हैं।
हाईकोर्ट के फैसले पर टिकीं सबकी निगाहें
इस पूरे मामले को लेकर अब आम जनता के साथ-साथ इतिहासकारों, पर्यावरणविदों और स्थानीय निवासियों की भी नजर इस बात पर टिकी है कि एमपी हाईकोर्ट में दाखिल याचिका पर अंततः क्या निर्णय आता है। साथ ही यह भी देखना दिलचस्प होगा कि मेट्रो प्रबंधन इन ऐतिहासिक इमारतों, धार्मिक स्थलों और जल स्रोतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आगे क्या ठोस कदम उठाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि विकास कार्यों के साथ-साथ शहर की ऐतिहासिक धरोहरों और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखना भी उतना ही आवश्यक है। ऐसे में यह मामला आने वाले समय में इंदौर के विकास बनाम विरासत संरक्षण की बहस का एक महत्वपूर्ण केंद्र बिंदु बन सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें हाईकोर्ट की अगली सुनवाई और मेट्रो प्रबंधन की आगामी रणनीति पर टिकी हुई हैं।
